थॉमस टुखेल इंग्लैंड वर्ल्ड कप अभियान के सबसे बड़े रणनीतिकार बनकर उभरे हैं। नॉकआउट मुकाबलों में उनकी सूझबूझ, समय पर किए गए बदलाव और खिलाड़ियों की स्पष्ट भूमिकाओं ने इंग्लैंड को मुश्किल परिस्थितियों से बाहर निकालने में अहम भूमिका निभाई। यह सिर्फ खिलाड़ियों की गुणवत्ता नहीं, बल्कि टुखेल की योजनाबद्ध रणनीति का परिणाम है कि इंग्लैंड लगातार बड़े मुकाबलों में दबाव झेलकर भी जीत हासिल कर रहा है।
सब्स्टीट्यूशन नहीं, ‘स्पेशल ऑप्स’ का हिस्सा
थॉमस टुखेल अपने विकल्प खिलाड़ियों को सिर्फ बेंच स्ट्रेंथ नहीं मानते। उनके लिए हर सब्स्टीट्यूट एक “स्पेशल ऑप्स” मिशन का हिस्सा होता है। मैच शुरू होने से पहले ही हर खिलाड़ी को उसकी संभावित भूमिका समझा दी जाती है कि किस परिस्थिति में उसे मैदान पर उतरना है और क्या योगदान देना है।
राउंड ऑफ 32 और राउंड ऑफ 16 में इंग्लैंड की जीत इसका सबसे बड़ा उदाहरण रही। मैच के दौरान किए गए बदलावों ने पूरे मुकाबले का रुख बदल दिया।
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एंथनी गॉर्डन ने पलटा मुकाबला
कांगो के खिलाफ इंग्लैंड पिछड़ रहा था। ऐसे समय में टुखेल ने मार्कस रैशफोर्ड की जगह एंथनी गॉर्डन को मैदान पर उतारा।
गॉर्डन ने आते ही खेल की गति बदल दी और हैरी केन के दोनों गोल में अहम भूमिका निभाते हुए दो असिस्ट दिए। यह बदलाव साबित करता है कि टुखेल हर खिलाड़ी को पहले से तय जिम्मेदारी के साथ मैदान में भेजते हैं।

मेक्सिको के खिलाफ डिफेंसिव मास्टरक्लास
मेक्सिको के खिलाफ मुकाबले में इंग्लैंड को 54वें मिनट में बड़ा झटका लगा जब जारेल क्वांसाह को रेड कार्ड मिला।
ऐसी स्थिति में टुखेल ने आक्रामक खिलाड़ी बुकायो साका को बाहर बुलाकर जॉन स्टोन्स को मैदान पर उतारा। इसके बाद एजरी कॉन्सा की जगह डैन बर्न को भेजा गया।
34 वर्षीय डैन बर्न ने इंग्लैंड के लिए डेब्यू करते हुए अंतिम मिनटों में लगातार क्लियरेंस कर टीम की बढ़त बचाए रखी। वहीं जॉन स्टोन्स और जेड स्पेंस ने भी शानदार रक्षात्मक प्रदर्शन किया। इन बदलावों ने मेक्सिको की वापसी की उम्मीद पूरी तरह खत्म कर दी।
टुखेल की सोच ने बदली इंग्लैंड की रणनीति
थॉमस टुखेल इंग्लैंड वर्ल्ड कप : इंग्लैंड की कमान संभालने के बाद थॉमस टुखेल ने कई साहसिक फैसले लिए।
उन्होंने ट्रेंट अलेक्जेंडर-अर्नोल्ड जैसे स्टार खिलाड़ी को टीम से बाहर रखा और डिफेंस को प्राथमिकता दी। हालांकि रीस जेम्स चोटिल हो गए, लेकिन टुखेल का फोकस शुरुआत से ही मजबूत रक्षात्मक संरचना तैयार करने पर रहा।
उनका मानना है कि इंग्लैंड के पास गोल करने वाले खिलाड़ी पहले से मौजूद हैं, लेकिन बड़ी प्रतियोगिताएं मजबूत डिफेंस के दम पर जीती जाती हैं।
जॉर्डन हेंडरसन की वापसी भी रही मास्टरस्ट्रोक
जॉर्डन हेंडरसन के चयन पर काफी सवाल उठे थे, लेकिन टुखेल ने उन्हें सिर्फ खिलाड़ी नहीं बल्कि टीम लीडर के रूप में देखा।
युवा खिलाड़ियों के अनुसार हेंडरसन ड्रेसिंग रूम का माहौल सकारात्मक बनाए रखते हैं और जरूरत पड़ने पर टीम की आवाज बनते हैं। जूड बेलिंघम और मॉर्गन रोजर्स जैसे खिलाड़ियों ने भी उनकी नेतृत्व क्षमता की खुलकर तारीफ की।

नॉकआउट मुकाबलों के विशेषज्ञ हैं टुखेल
थॉमस टुखेल की पहचान हमेशा से बड़े मुकाबलों के कोच के रूप में रही है।
चेल्सी के साथ उन्होंने बेहद कम समय में टीम की खेल शैली बदलते हुए यूईएफए चैंपियंस लीग का खिताब दिलाया था। मजबूत डिफेंस, तेज काउंटर अटैक और सटीक रणनीति उनकी कोचिंग की सबसे बड़ी पहचान है।
इंग्लैंड के साथ भी वही रणनीति दिखाई दे रही है, जहां हर बदलाव पहले से तैयार योजना का हिस्सा नजर आता है।
सेमीफाइनल से पहले सबसे बड़ी ताकत
थॉमस टुखेल इंग्लैंड वर्ल्ड कप: अब इंग्लैंड का सामना नॉर्वे जैसी मजबूत टीम से होना है। लेकिन जिस तरह टुखेल हर मैच में परिस्थिति के अनुसार रणनीति बदल रहे हैं, उससे साफ है कि इंग्लैंड केवल स्टार खिलाड़ियों के भरोसे नहीं, बल्कि योजनाबद्ध फुटबॉल के दम पर आगे बढ़ रहा है।
अगर उनकी ‘स्पेशल ऑप्स’ रणनीति आगे भी सफल रहती है, तो इंग्लैंड विश्व कप जीतने के सबसे बड़े दावेदारों में शामिल हो सकता है।
निष्कर्ष
थॉमस टुखेल इंग्लैंड वर्ल्ड कप अभियान में सिर्फ कोच नहीं, बल्कि रणनीतिक मास्टरमाइंड बनकर उभरे हैं। उनकी सटीक सब्स्टीट्यूशन, मजबूत डिफेंस और हर खिलाड़ी के लिए तय भूमिका ने इंग्लैंड को नॉकआउट मुकाबलों में नई पहचान दी है। आने वाले मुकाबलों में भी उनकी यही रणनीति टीम की सबसे बड़ी ताकत साबित हो सकती है।(source)




