भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने जुलाई चरण के RBI Consumer Confidence Survey और महंगाई अपेक्षा (Inflation Expectations) सर्वे की शुरुआत कर दी है। इस पहल के तहत देश के शहरी और ग्रामीण परिवारों से आर्थिक स्थिति, आय, खर्च, रोजगार और भविष्य में महंगाई को लेकर उनकी राय जुटाई जाएगी।
RBI Consumer Confidence Survey से प्राप्त आंकड़े आरबीआई की मौद्रिक नीति और आर्थिक विश्लेषण के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं।आरबीआई के अनुसार, RBI Consumer Confidence Survey का उद्देश्य यह समझना है कि आम उपभोक्ता वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों को किस तरह देख रहे हैं और आने वाले महीनों को लेकर उनकी क्या अपेक्षाएं हैं।इसके साथ ही महंगाई अपेक्षा सर्वे के जरिए यह भी जाना जाएगा कि लोगों को अगले तीन महीने और अगले एक वर्ष में कीमतों में कितनी बढ़ोतरी की उम्मीद है।
RBI Consumer Confidence Survey और यह सर्वे मिलकर उपभोक्ता व्यवहार का व्यापक आकलन करने में मदद करते हैं।विशेषज्ञों के अनुसार, RBI Consumer Confidence Survey के नतीजे भारतीय अर्थव्यवस्था की जमीनी स्थिति को समझने के साथ-साथ भविष्य की ब्याज दरों और मौद्रिक नीति से जुड़े निर्णयों के लिए भी महत्वपूर्ण संकेत प्रदान करते हैं।
RBI Consumer Confidence Survey: क्या है यह सर्वे और क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
भारतीय रिजर्व बैंक समय-समय पर तीन प्रमुख सर्वे आयोजित करता है। इनमें Inflation Expectations Survey of Households (IESH), Urban Consumer Confidence Survey (UCCS) और Rural Consumer Confidence Survey (RCCS) शामिल हैं। जुलाई चरण में भी इन तीनों सर्वेक्षणों के माध्यम से देशभर के चयनित परिवारों से विभिन्न आर्थिक पहलुओं पर जानकारी एकत्र की जाएगी।
RBI Consumer Confidence Survey का मुख्य उद्देश्य यह जानना होता है कि लोग वर्तमान आर्थिक माहौल को किस प्रकार महसूस कर रहे हैं। इसमें उनसे रोजगार की स्थिति, परिवार की आय, खर्च करने की क्षमता, सामान्य आर्थिक स्थिति और भविष्य की उम्मीदों से जुड़े सवाल पूछे जाते हैं। दूसरी ओर, महंगाई अपेक्षा सर्वे के जरिए यह समझने की कोशिश की जाती है कि लोगों को अगले तीन महीने और अगले एक वर्ष में कीमतों में कितनी बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।
इन सर्वेक्षणों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इनमें केवल सरकारी आंकड़ों पर निर्भर रहने के बजाय सीधे नागरिकों की राय ली जाती है। इससे रिजर्व बैंक को यह समझने में आसानी होती है कि सरकारी आंकड़ों और आम लोगों के अनुभवों के बीच कितना अंतर है। यदि लोगों को भविष्य में महंगाई बढ़ने की आशंका होती है तो इसका असर उनके खर्च और बचत के फैसलों पर भी पड़ सकता है। यही कारण है कि RBI Consumer Confidence Survey को मौद्रिक नीति निर्माण के लिए एक महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है।

शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों से जुटाए जाएंगे आंकड़े
आरबीआई के अनुसार शहरी उपभोक्ता विश्वास सर्वे नियमित रूप से देश के 19 प्रमुख शहरों में आयोजित किया जाता है। इनमें अहमदाबाद, बेंगलुरु, भोपाल, भुवनेश्वर, चंडीगढ़, चेन्नई, दिल्ली, गुवाहाटी, हैदराबाद, जयपुर, जम्मू, कोलकाता, लखनऊ, मुंबई, नागपुर, पटना, रायपुर, रांची और तिरुवनंतपुरम शामिल हैं। वहीं ग्रामीण उपभोक्ता विश्वास सर्वे 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के ग्रामीण तथा अर्ध-शहरी क्षेत्रों के परिवारों को कवर करता है।
ग्रामीण क्षेत्रों में सर्वे के दौरान लोगों से स्थानीय रोजगार, कृषि आधारित आय, घरेलू खर्च, कीमतों में बदलाव और भविष्य की आर्थिक संभावनाओं के बारे में जानकारी ली जाती है। वहीं शहरी क्षेत्रों में नौकरी, वेतन, उपभोक्ता खर्च, जीवन-यापन की लागत और आर्थिक विश्वास से जुड़े प्रश्न पूछे जाते हैं।
RBI Consumer Confidence Survey के माध्यम से प्राप्त यह जानकारी देश के अलग-अलग हिस्सों में आर्थिक गतिविधियों का तुलनात्मक आकलन करने में भी सहायक होती है। इससे यह पता लगाया जा सकता है कि किन क्षेत्रों में आर्थिक विश्वास मजबूत है और किन इलाकों में लोगों की चिंताएं बढ़ रही हैं।
मौद्रिक नीति और ब्याज दरों पर कैसे पड़ता है असर?
भारतीय रिजर्व बैंक का प्रमुख लक्ष्य मूल्य स्थिरता बनाए रखना और आर्थिक विकास को समर्थन देना है। इसके लिए वह समय-समय पर रेपो रेट सहित विभिन्न मौद्रिक नीतिगत फैसले लेता है। ऐसे निर्णय लेते समय केवल महंगाई के आधिकारिक आंकड़ों पर ही नहीं बल्कि लोगों की महंगाई संबंधी उम्मीदों और उपभोक्ता विश्वास पर भी ध्यान दिया जाता है।
यदि RBI Consumer Confidence Survey से यह संकेत मिलता है कि उपभोक्ताओं का विश्वास मजबूत हो रहा है और खर्च बढ़ने की संभावना है, तो यह अर्थव्यवस्था में मांग बढ़ने का संकेत हो सकता है। दूसरी ओर यदि लोगों को भविष्य में महंगाई बढ़ने की आशंका है, तो रिजर्व बैंक को अपनी मौद्रिक नीति में संतुलन बनाने की जरूरत पड़ सकती है।
हाल के दिनों में बाजार की निगाहें महंगाई के ताजा आंकड़ों पर भी टिकी हुई हैं। विभिन्न आर्थिक अनुमानों के अनुसार जून महीने में खुदरा महंगाई में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है, जिससे भविष्य की नीतिगत रणनीति पर चर्चा तेज हो गई है। ऐसे माहौल में जुलाई चरण का RBI Consumer Confidence Survey नीति निर्माताओं के लिए और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है।
सर्वे में भाग लेने वाले लोगों के लिए आरबीआई की अपील
भारतीय रिजर्व बैंक ने चयनित परिवारों से सर्वेक्षण में सक्रिय सहयोग करने की अपील की है। केंद्रीय बैंक का कहना है कि सर्वेक्षण के दौरान एकत्र की गई जानकारी केवल सांख्यिकीय और नीतिगत उद्देश्यों के लिए उपयोग की जाती है तथा व्यक्तिगत जानकारी की गोपनीयता का पूरा ध्यान रखा जाता है।(SOURCE)
विशेषज्ञों का मानना है कि RBI Consumer Confidence Survey जैसे सर्वे केवल आर्थिक संकेतकों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे यह समझने में भी मदद करते हैं कि आम नागरिक देश की आर्थिक स्थिति को किस नजर से देख रहे हैं। इससे सरकार और केंद्रीय बैंक को भविष्य की आर्थिक चुनौतियों के अनुरूप बेहतर रणनीति बनाने में सहायता मिलती है।




