July 8, 2026 9:01 PM

AIFF Striker Rule U-Turn: Indian Striker Mandatory Rule वापस, Clubs को मिली बड़ी राहत!

AIFF Striker Rule में बड़ा बदलाव करते हुए AIFF ने Indian striker को पूरे 90 मिनट मैदान पर रखने की अनिवार्यता खत्म कर दी है। साथ ही OCI खिलाड़ियों और ISL के नए कमर्शियल मॉडल पर भी बड़ा फैसला लिया गया है।

EDITED BY: Rudra Pratap Singh

UPDATED: Wednesday, July 8, 2026

AIFF Striker Rule U-Turn: Indian Striker Mandatory Rule वापस, Clubs को मिली बड़ी राहत!

AIFF Striker Rule को लेकर भारतीय फुटबॉल में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन (AIFF) ने अपने पहले के फैसले से पीछे हटते हुए साफ कर दिया है कि अब Indian Super League (ISL) और Indian Football League (IFL) के क्लबों के लिए किसी भारतीय स्ट्राइकर (No. 9) को पूरे 90 मिनट मैदान पर खिलाना अनिवार्य नहीं होगा।

यह फैसला उन क्लबों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, जिन्होंने इस नियम पर गंभीर आपत्ति जताई थी। AIFF का कहना है कि टीम चयन और रणनीति पूरी तरह कोच का अधिकार है और फेडरेशन किसी क्लब पर ऐसा नियम लागू नहीं कर सकती।

AIFF Striker Rule पर क्यों बदला फैसला?

20 जून 2026 को AIFF की Special General Body Meeting के बाद जारी बयान में कहा गया था कि भारतीय स्ट्राइकरों को अधिक मैच अनुभव देने के लिए हर टीम को पूरे मुकाबले में एक भारतीय स्ट्राइकर मैदान पर रखना होगा।

हालांकि अब AIFF General Secretary एम. सत्यनारायण ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट किया कि यह नियम अनिवार्य नहीं रहेगा।

उन्होंने कहा कि हर मैच की रणनीति अलग होती है और किसी भी कोच को यह बताना कि वह किस खिलाड़ी को कितनी देर मैदान पर रखे, व्यावहारिक नहीं है।

AIFF ने यह भी माना कि भारत की सबसे बड़ी कमजोरी अब भी एक भरोसेमंद स्ट्राइकर की कमी है, लेकिन इसका समाधान नियम थोपकर नहीं बल्कि खिलाड़ियों के विकास से निकलेगा।

Indian Strikers की कमी बनी सबसे बड़ी चुनौती

भारतीय फुटबॉल पिछले कई वर्षों से Sunil Chhetri के बाद एक स्थायी स्ट्राइकर की तलाश कर रहा है।

कई राष्ट्रीय कोचों ने अलग-अलग खिलाड़ियों को आजमाया, लेकिन अभी तक कोई भी खिलाड़ी लगातार प्रदर्शन करके Chhetri की जगह नहीं ले पाया है।

इसी वजह से AIFF भारतीय स्ट्राइकरों को अधिक मौके देने की कोशिश कर रहा था, लेकिन क्लबों का मानना था कि ऐसा नियम खेल की प्रतिस्पर्धा और कोच की स्वतंत्रता को प्रभावित करेगा।

Clubs ने क्यों किया विरोध?

ISL क्लबों ने AIFF के इस प्रस्ताव पर कई सवाल उठाए थे।

क्लबों का कहना था कि यदि हर टीम के लिए भारतीय स्ट्राइकर अनिवार्य कर दिया जाता है तो सीमित संख्या में उपलब्ध स्ट्राइकरों की मांग अचानक बढ़ जाएगी। इससे खिलाड़ियों की ट्रांसफर फीस और वेतन में भारी बढ़ोतरी होगी, जिसका असर लीग की आर्थिक स्थिरता पर पड़ेगा।

क्लबों ने यह भी कहा कि किसी भी पेशेवर फुटबॉल लीग में टीम चयन पूरी तरह कोच की रणनीति पर आधारित होना चाहिए।

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OCI Rule पर भी AIFF ने दी बड़ी स्पष्टता

AIFF Striker Rule के साथ-साथ Overseas Citizen of India (OCI) खिलाड़ियों को लेकर भी बड़ा अपडेट सामने आया है।

AIFF ने स्पष्ट किया कि 2026-27 सीजन में OCI कार्डधारक खिलाड़ियों को विदेशी खिलाड़ी (Foreign Player) ही माना जाएगा।

फेडरेशन ने कहा कि क्लब चाहें तो OCI खिलाड़ियों को अपनी टीम में शामिल कर सकते हैं, लेकिन इससे विदेशी खिलाड़ियों की गिनती में कोई बदलाव नहीं होगा।

इस स्पष्टीकरण से उन भ्रमों को भी दूर किया गया जिनमें माना जा रहा था कि OCI खिलाड़ियों के कारण विदेशी खिलाड़ियों की सीमा बदल सकती है।

AIFF Striker Rule
 

ISL के Commercial Rights अब Clubs के पास

AIFF ने एक और बड़ा फैसला लेते हुए ISL के Commercial Rights लीग के 14 क्लबों को सौंप दिए हैं।

इस समझौते की अवधि चार साल होगी, जबकि दो साल बाद बाहर निकलने (Opt-Out) का विकल्प भी रखा गया है।

FC Goa के CEO Ravi Puskur ने कहा कि इस समझौते का सबसे बड़ा उद्देश्य लीग को आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाना है।

उन्होंने बताया कि क्लब जल्द ही Broadcasting Rights के लिए Request for Proposal (RFP) जारी करेंगे ताकि नए ब्रॉडकास्ट पार्टनर चुने जा सकें।

नई Holding Company संभालेगी Commercial Operations

ISL क्लब मिलकर एक नई Holding Company बनाएंगे, जो लीग के Commercial Operations और Revenue Management का काम संभालेगी।

यदि अगले चार वर्षों के दौरान कोई क्लब ISL से Relegate होता है तो उसकी जगह प्रमोट होने वाला नया क्लब इस कंपनी का हिस्सा बन जाएगा।

AIFF का मानना है कि इससे लीग की Commercial Stability और Long-Term Growth को मजबूती मिलेगी।

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Indian Football के लिए क्या मायने रखता है यह फैसला?

विशेषज्ञों का मानना है कि AIFF Striker Rule में किया गया बदलाव व्यावहारिक कदम है। इससे कोचों को अपनी रणनीति के अनुसार टीम चुनने की स्वतंत्रता मिलेगी, जबकि AIFF और क्लब मिलकर युवा भारतीय स्ट्राइकरों को बेहतर प्रशिक्षण और अधिक अवसर देने पर ध्यान दे सकते हैं।

दूसरी ओर, Commercial Rights क्लबों को सौंपने का फैसला भारतीय फुटबॉल के प्रोफेशनल मॉडल को और मजबूत बना सकता है।

निष्कर्ष

AIFF Striker Rule पर लिया गया यू-टर्न भारतीय फुटबॉल के लिए एक महत्वपूर्ण फैसला माना जा रहा है। AIFF ने स्पष्ट कर दिया है कि वह क्लबों पर किसी खिलाड़ी को अनिवार्य रूप से खिलाने का दबाव नहीं बनाएगा। साथ ही OCI नियम और ISL के नए Commercial Model को लेकर भी स्थिति साफ कर दी गई है। अब सभी की नजरें सितंबर 2026 से शुरू होने वाले नए ISL सीजन पर होंगी।(source)

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