July 7, 2026 10:18 PM

Indradev Singh Murder Case: 24 Years Later बड़ा Justice! 3 Accused Get Life Imprisonment in Shocking Verdict

करीब 24 साल पुराने Indradev Singh Murder Case में आखिरकार अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया। पूर्व लखनऊ बार एसोसिएशन अध्यक्ष इंद्रदेव सिंह की हत्या के तीन दोषियों को उम्रकैद की सजा मिली। फैसले के दौरान उनकी पत्नी और गौतम बुद्ध नगर पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह भी कोर्ट

EDITED BY: Rudra Pratap Singh

UPDATED: Tuesday, July 7, 2026

Indradev Singh Murder Case: 24 Years Later बड़ा Justice! 3 Accused Get Life Imprisonment in Shocking Verdict

Indradev Singh Murder Case: 24 Years Later बड़ा Justice! 3 Accused Get Life Imprisonment in Shocking Verdict

करीब 24 वर्षों तक चले बहुचर्चित Indradev Singh Murder Case में आखिरकार न्याय की बड़ी जीत हुई। लखनऊ की विशेष CBI अदालत ने पूर्व लखनऊ बार एसोसिएशन अध्यक्ष इंद्रदेव सिंह की हत्या के तीन दोषियों—विक्रम यादव उर्फ कालिया, पन्ना सिंह और बृजेश यादव—को उम्रकैद की सजा सुनाई।

फैसला सुनाए जाने के दौरान इंद्रदेव सिंह की पत्नी नयनतारा सिंह और उनकी बेटी, गौतम बुद्ध नगर पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह, अदालत में मौजूद थीं।

24 साल बाद आया ऐतिहासिक फैसला

विशेष CBI न्यायाधीश वायु नंदन मिश्रा ने मंगलवार को तीनों दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

अदालत ने तीनों पर कुल 1.5 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। आदेश के अनुसार, जुर्माने की 80% राशि शिकायतकर्ता परिवार को मुआवजे के रूप में दी जाएगी।

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कोर्ट में भावुक दिखीं लक्ष्मी सिंह

फैसला सुनाए जाने के बाद लक्ष्मी सिंह अपनी मां नयनतारा सिंह का हाथ पकड़कर चुपचाप अदालत परिसर से बाहर निकलीं।

2000 बैच की IPS अधिकारी लक्ष्मी सिंह अपने पिता की हत्या के समय केवल 28 वर्ष की थीं। उस समय वह पश्चिम बंगाल कैडर में कार्यरत थीं। बाद में तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती की मंजूरी से उनका उत्तर प्रदेश कैडर में तबादला हुआ।

Indradev Singh Murder Case

कैसे हुई थी इंद्रदेव सिंह की हत्या?

8 अगस्त 2002 की दोपहर इंद्रदेव सिंह अपनी पत्नी और बेटे के साथ लखनऊ जिला अदालत से खरीदारी के लिए निकले थे।

जैसे ही वे कैसरबाग टेलीफोन एक्सचेंज के पास पहुंचे, बाइक सवार दो हमलावरों ने उन पर नजदीक से गोली चला दी।

गोली उनके गर्दन में लगी और उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।

इस हत्या से पूरे लखनऊ की कानूनी बिरादरी में भारी आक्रोश फैल गया था।

जमीन विवाद बना हत्या की वजह

Indradev Singh Murder Case की शुरुआती जांच लखनऊ पुलिस की SIT ने की थी।

बाद में जनदबाव के चलते मामला CBI को सौंप दिया गया।

CBI जांच में सामने आया कि हत्या के पीछे सीतापुर रोड की जमीन का विवाद था।

जांच एजेंसी के अनुसार, इंद्रदेव सिंह ने अपने सहयोगी मन्ना लाल गुप्ता को जमीन विकसित करने की जिम्मेदारी दी थी, लेकिन लेनदेन में कथित गड़बड़ियों के बाद दोनों के बीच विवाद बढ़ गया।

CBI का आरोप था कि मन्ना लाल गुप्ता ने सुपारी देकर इंद्रदेव सिंह की हत्या करवाई।

50 गवाहों ने पेश किए सबूत

CBI ने 7 अगस्त 2003 को छह आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की।

मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने 50 गवाह पेश किए।

तीन मुख्य आरोपी—मन्ना लाल गुप्ता, वेद प्रकाश लोहिया और छोटे लाल यादव—सुनवाई के दौरान ही मृत्यु हो गई।

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दोषियों की भूमिका क्या थी?

CBI के अनुसार—

  • विक्रम यादव ने इंद्रदेव सिंह को गोली मारी।
  • बृजेश यादव बाइक चला रहा था।
  • पन्ना सिंह हत्या की साजिश में शामिल था।

तीनों को पहले ही 30 जून 2026 को हत्या और आपराधिक साजिश का दोषी ठहराया जा चुका था।

अब आगे क्या होगा?

दोषियों के वकील ने कहा है कि वे हाई कोर्ट में इस फैसले के खिलाफ अपील करेंगे।

हालांकि, Indradev Singh Murder Case में आए इस फैसले को लंबे समय से न्याय का इंतजार कर रहे परिवार और कानूनी समुदाय के लिए एक बड़ी राहत माना जा रहा है।(source)

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