ADAS and connected car technology : भारत सरकार ने ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए ऑटोमोटिव रडार और कनेक्टेड कार कम्युनिकेशन सिस्टम्स में इस्तेमाल होने वाले कुछ रेडियो स्पेक्ट्रम बैंड्स को लाइसेंसिंग आवश्यकता से मुक्त कर दिया है। इस फैसले को देश में उन्नत वाहन सुरक्षा तकनीकों और भविष्य की स्वायत्त ड्राइविंग प्रणालियों को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकार ने 77GHz से 81GHz फ्रीक्वेंसी बैंड में काम करने वाले ऑटोमोटिव रडार सिस्टम्स को लाइसेंसिंग नियमों से छूट दे दी है। इसके अलावा 5.9GHz फ्रीक्वेंसी बैंड पर संचालित होने वाले कनेक्टेड वाहन संचार सिस्टम्स के लिए भी लाइसेंस की आवश्यकता समाप्त कर दी गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से भारत की नीतियां अमेरिका और यूरोप जैसे विकसित बाजारों के अनुरूप हो जाएंगी। इससे वाहन निर्माता कंपनियां और तकनीकी सप्लायर्स बिना अलग भारतीय संस्करण विकसित किए अपने वैश्विक उत्पादों को भारतीय बाजार में आसानी से पेश कर सकेंगे।
ये भी पढ़े: Honda CBR1000RR-R Fireblade SP की भारत में वापसी, कीमत में ₹4.51 लाख का बड़ा इजाफा

क्या है ऑटोमोटिव रडार और ADAS?
ऑटोमोटिव रडार आधुनिक वाहनों में इस्तेमाल होने वाली एक महत्वपूर्ण तकनीक है, जो वाहन के आसपास की वस्तुओं, अन्य वाहनों और संभावित खतरों का पता लगाने में मदद करती है।
इसी तकनीक के आधार पर कई एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम्स (ADAS) काम करते हैं। इनमें ऑटोमैटिक इमरजेंसी ब्रेकिंग, एडाप्टिव क्रूज कंट्रोल, ब्लाइंड-स्पॉट मॉनिटरिंग और लेन असिस्ट जैसे फीचर्स शामिल हैं।
ये सिस्टम सड़क पर वाहन की सुरक्षा बढ़ाने और दुर्घटनाओं के जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भविष्य में सेल्फ-ड्राइविंग कारों के विकास के लिए भी रडार तकनीक को सबसे अहम आधारों में से एक माना जाता है।
सरकार द्वारा लाइसेंसिंग प्रक्रिया हटाने से इन तकनीकों को अपनाने की लागत कम हो सकती है, जिससे अधिक वाहन निर्माताओं को इन्हें अपने मॉडलों में शामिल करने का अवसर मिलेगा।
V2X तकनीक को मिलेगा बढ़ावा
सरकार द्वारा 5.9GHz फ्रीक्वेंसी बैंड को लाइसेंसिंग से मुक्त करने का एक बड़ा प्रभाव Vehicle-to-Everything (V2X) तकनीक पर पड़ सकता है।
V2X सिस्टम वाहनों को अन्य वाहनों, ट्रैफिक इंफ्रास्ट्रक्चर और सड़क किनारे लगे उपकरणों के साथ संवाद करने की क्षमता प्रदान करता है।
उदाहरण के लिए, यदि किसी ब्लाइंड मोड़ के पीछे कोई वाहन अचानक ब्रेक लगाता है या कोई आपातकालीन वाहन तेजी से आ रहा है, तो V2X सिस्टम पहले से ही चालक को चेतावनी दे सकता है।
इस तकनीक का उद्देश्य केवल वाहन सुरक्षा बढ़ाना ही नहीं बल्कि ट्रैफिक प्रबंधन और सड़कों पर समग्र दक्षता को भी बेहतर बनाना है।

ऑटोमोबाइल कंपनियों को कैसे होगा फायदा?
इस फैसले का सबसे बड़ा लाभ उन वाहन निर्माताओं को मिल सकता है जो पहले से वैश्विक स्तर पर उन्नत सुरक्षा तकनीकों का उपयोग कर रहे हैं।
मर्सिडीज-बेंज और BMW जैसी लग्जरी कंपनियां अपने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में पहले से रडार आधारित ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम्स उपलब्ध कराती हैं। अब इन तकनीकों को भारतीय बाजार में लाना उनके लिए अधिक आसान और लागत प्रभावी हो सकता है।
इसके अलावा भारतीय कंपनियां जैसे मारुति सुजुकी, टाटा मोटर्स और महिंद्रा भी इस बदलाव से लाभान्वित हो सकती हैं। जैसे-जैसे ADAS फीचर्स अधिक लोकप्रिय होंगे, घरेलू निर्माता भी इन्हें बड़े पैमाने पर अपने वाहनों में शामिल कर सकते हैं।
तकनीकी सप्लायर्स को भी मिलेगा फायदा
इस नीति परिवर्तन से केवल वाहन निर्माता ही नहीं बल्कि तकनीकी सप्लायर कंपनियां भी लाभान्वित होंगी।
Bosch, Continental और Qualcomm जैसी कंपनियां ऑटोमोटिव रडार, सेंसर और कनेक्टेड वाहन तकनीकों के क्षेत्र में प्रमुख भूमिका निभाती हैं। लाइसेंसिंग प्रक्रिया हटने से इन कंपनियों के लिए भारत में अपने समाधान पेश करना और आसान हो सकता है।
इसके साथ ही नई तकनीकों की उपलब्धता बढ़ने से ऑटोमोबाइल उद्योग में नवाचार और प्रतिस्पर्धा को भी बढ़ावा मिल सकता है।

सड़क सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण कदम
भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां सड़क दुर्घटनाओं की संख्या काफी अधिक है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024 में देश में लगभग पांच लाख सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें 1.77 लाख से अधिक लोगों की जान गई।
ऐसे में ADAS और V2X जैसी तकनीकों को सड़क सुरक्षा बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण उपकरण माना जा रहा है। ये सिस्टम उन परिस्थितियों में भी चेतावनी देने में सक्षम हैं जहां चालक की दृश्यता सीमित होती है या पारंपरिक सेंसर पर्याप्त जानकारी नहीं दे पाते।
हालांकि सरकार ने फिलहाल इन तकनीकों को अनिवार्य नहीं बनाया है, लेकिन लाइसेंसिंग बाध्यता हटाकर इनके लिए रास्ता आसान जरूर कर दिया है।
ऑटोमोटिव रडार और कनेक्टेड कार तकनीकों के लिए स्पेक्ट्रम लाइसेंसिंग समाप्त करने का सरकार का फैसला भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे ADAS, V2X और भविष्य की स्वायत्त ड्राइविंग तकनीकों को अपनाने में तेजी आ सकती है। साथ ही वाहन निर्माताओं और तकनीकी कंपनियों के लिए लागत कम होने की संभावना है। सड़क सुरक्षा को बेहतर बनाने और आधुनिक वाहन तकनीकों को बढ़ावा देने के लिहाज से यह निर्णय आने वाले वर्षों में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।




