July 28, 2026 9:57 PM

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भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन ने रचा नया इतिहास, 1,200 किमी का सफर पूरा कर बचाया हजारों लीटर डीजल

भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन ने 1,200 किलोमीटर से अधिक का सफल सफर तय कर स्वच्छ और हरित रेल परिवहन की दिशा में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। इस दौरान ट्रेन ने 3,200 लीटर से अधिक डीजल की बचत भी की।

EDITED BY: Rudra Pratap Singh

UPDATED: Tuesday, July 28, 2026

भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन ने रचा नया इतिहास, 1,200 किमी का सफर पूरा कर बचाया हजारों लीटर डीजल
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भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन ने रचा नया इतिहास, 1,200 किमी की सफल यात्रा से बदलेगी भारतीय रेल की तस्वीर

भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन ने देश के रेल इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। 17 जुलाई को हरियाणा के जींद से हरी झंडी मिलने के बाद इस अत्याधुनिक ट्रेन ने 1,200 किलोमीटर से अधिक की सफल यात्रा पूरी कर ली है। रेल मंत्रालय के अनुसार, इस दौरान ट्रेन ने 3,200 लीटर से अधिक डीजल की बचत की है, जिससे भारत के स्वच्छ ऊर्जा मिशन को बड़ी मजबूती मिली है।

इस सफलता के बाद अब भारतीय रेलवे जल्द ही इस ट्रेन का दिल्ली रूट पर ट्रायल शुरू करने की तैयारी कर रहा है। अधिकारियों का मानना है कि यह परियोजना भविष्य में देशभर में हाइड्रोजन आधारित रेल नेटवर्क की नींव रख सकती है।


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिखाई थी हरी झंडी

भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 जुलाई को हरियाणा के जींद से रवाना किया था। यह परियोजना केंद्र सरकार के आत्मनिर्भर भारत अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जा रही है।

रेल मंत्रालय का कहना है कि ट्रेन ने शुरुआती संचालन के दौरान बिना किसी बड़ी तकनीकी समस्या के 1,200 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय की है। यह उपलब्धि भारतीय रेलवे की स्वदेशी तकनीक विकसित करने की क्षमता को भी दर्शाती है।


कैसे काम करती है भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन?

भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन पारंपरिक डीजल इंजन से बिल्कुल अलग तकनीक पर आधारित है।

इस ट्रेन में फ्यूल सेल (Fuel Cell) तकनीक का उपयोग किया गया है, जिसमें हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की रासायनिक प्रतिक्रिया से बिजली उत्पन्न होती है। यही बिजली ट्रेन के मोटरों को चलाती है।

सबसे खास बात यह है कि इस प्रक्रिया में धुआं या कार्बन उत्सर्जन नहीं होता। इसका एकमात्र उप-उत्पाद जलवाष्प (Water Vapour) होता है, जिससे यह पर्यावरण के लिए बेहद अनुकूल परिवहन प्रणाली बन जाती है।

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पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से तैयार हुई ट्रेन

रेल मंत्रालय के अनुसार, भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन पूरी तरह भारतीय रेलवे द्वारा विकसित स्वदेशी परियोजना है।

इस ट्रेन में—

  • 10 आधुनिक यात्री कोच
  • 2 हाइड्रोजन ड्राइविंग पावर कार
  • कुल 2,400 किलोवाट क्षमता
  • लिथियम आयरन फॉस्फेट (LiFePO₄) बैटरी प्रणाली

शामिल हैं।

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसे भारतीय इंजीनियरिंग क्षमता और स्वदेशी तकनीक की बड़ी सफलता बताया है।

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भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन
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जींद में बना देश का पहला हाइड्रोजन स्टेशन

भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन के संचालन के लिए भारतीय रेलवे ने हरियाणा के जींद में देश का पहला समर्पित हाइड्रोजन स्टोरेज और रिफ्यूलिंग स्टेशन भी विकसित किया है।

इस स्टेशन की प्रमुख विशेषताएं—

  • 500 बार तक दबाव में हाइड्रोजन भंडारण
  • 350 बार दबाव पर ईंधन भरने की सुविधा
  • लगभग 3,000 किलोग्राम ग्रीन हाइड्रोजन की भंडारण क्षमता

यह सुविधा ट्रेन के नियमित संचालन को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाए

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सुरक्षा के लिए लगाए गए अत्याधुनिक सिस्टम

रेल मंत्रालय ने बताया कि भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन में अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप कई उन्नत सुरक्षा व्यवस्थाएं दी गई हैं।

इनमें शामिल हैं—

  • हाइड्रोजन लीकेज डिटेक्शन सिस्टम
  • हीट, स्मोक और फ्लेम सेंसर
  • ऑटोमैटिक इमरजेंसी शटडाउन सिस्टम
  • लगातार वेंटिलेशन व्यवस्था
  • संचालन से पहले तकनीकी सुरक्षा परीक्षण
  • अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों का पालन

इन सुविधाओं का उद्देश्य भारतीय परिस्थितियों में ट्रेन का सुरक्षित संचालन सुनिश्चित करना है।


अब दिल्ली रूट पर शुरू होगा अगला ट्रायल

जींद और सोनीपत के बीच सफल परीक्षण के बाद अब भारतीय रेलवे दिल्ली रूट पर भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का ट्रायल शुरू करने की तैयारी कर रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह चरण भी सफल रहता है, तो आने वाले वर्षों में देश के कई प्रमुख रेल मार्गों पर हाइड्रोजन ट्रेनें संचालित की जा सकती हैं।

इससे डीजल पर निर्भरता कम होगी, कार्बन उत्सर्जन घटेगा और भारत स्वच्छ ऊर्जा आधारित परिवहन के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ेगा।


भारत के हरित भविष्य की ओर बड़ा कदम

भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन केवल एक नई रेल सेवा नहीं, बल्कि देश की हरित ऊर्जा और स्वदेशी तकनीक की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।

1,200 किलोमीटर की सफल यात्रा, हजारों लीटर डीजल की बचत और शून्य कार्बन उत्सर्जन जैसी उपलब्धियां यह संकेत देती हैं कि भारतीय रेलवे भविष्य में पर्यावरण-अनुकूल परिवहन का नया मॉडल बन सकता है।

यदि आगामी परीक्षण भी सफल रहते हैं, तो यह परियोजना भारत को स्वच्छ, आधुनिक और टिकाऊ रेल परिवहन के क्षेत्र में नई पहचान दिला सकती है।(SOURCE)

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