June 28, 2026 11:33 PM

Telangana School Urdu Row: उर्दू पढ़ाने के विवाद में स्कूल प्रिंसिपल से मारपीट, BJP नेता पर FIR

Telangana School Urdu Row ने निजामाबाद में नया विवाद खड़ा कर दिया है। उर्दू पढ़ाने के आरोप को लेकर स्कूल प्रिंसिपल से कथित मारपीट हुई, जबकि दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

EDITED BY: Rudra Pratap Singh

UPDATED: Sunday, June 28, 2026

Telangana School Urdu Row: निजामाबाद के स्कूल में उर्दू पढ़ाने को लेकर विवाद

Telangana School Urdu Row: के तहत तेलंगाना के निजामाबाद जिले के आर्मूर स्थित भारत चंद्र हाई स्कूल में शुक्रवार को बड़ा विवाद सामने आया। आरोप है कि 10 से 15 लोगों का एक समूह स्कूल परिसर में घुस गया और प्रिंसिपल आमिर खान के साथ कथित तौर पर मारपीट की। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुप्स पर तेजी से वायरल हो गया, जिसके बाद मामला राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा का विषय बन गया।

37 वर्षीय आमिर खान ने बताया कि वह पिछले 15 वर्षों से अंग्रेजी पढ़ा रहे हैं और वर्ष 2025 से इस निजी स्कूल में प्रिंसिपल के रूप में कार्यरत हैं। उनके अनुसार, स्कूल में उर्दू की कक्षाएं उन्होंने नहीं बल्कि एक अलग शिक्षक ने ली थीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्कूल प्रबंधन समिति के निर्णय के बाद उर्दू को दूसरी भाषा के रूप में शामिल करने की योजना बनाई गई थी।

प्रिंसिपल ने बताया कि स्कूल के लगभग 25 प्रतिशत छात्र मुस्लिम समुदाय से हैं और कई अभिभावकों ने दूसरी भाषा के रूप में उर्दू पढ़ाने की मांग की थी। इसी के आधार पर नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में केवल दो दिनों तक उर्दू वर्णमाला की कक्षाएं आयोजित की गई थीं।

Telangana School Urdu Row: उर्दू पढ़ाने के विवाद में स्कूल प्रिंसिपल से मारपीट, BJP नेता पर FIR
 

विरोध के बाद बंद हुई उर्दू की कक्षाएं, फिर बढ़ा विवाद

Telangana School Urdu Row उस समय और गहरा गया जब कुछ हिंदू अभिभावकों ने स्कूल में उर्दू पढ़ाए जाने का विरोध किया। आमिर खान के अनुसार, विरोध के बाद स्कूल प्रबंधन ने तत्काल फैसला लेते हुए उर्दू की कक्षाएं बंद कर दीं। उन्होंने कहा कि इसके बाद स्कूल में उर्दू की कोई कक्षा आयोजित नहीं की गई।

हालांकि मामला यहीं नहीं रुका। भारतीय जनता पार्टी की आर्मूर इकाई ने इस मुद्दे को उठाया। स्थानीय भाजपा अध्यक्ष एम. बालू ने आरोप लगाया कि स्कूल में केवल उर्दू ही नहीं बल्कि नमाज़ और कलिमा भी सिखाई जा रही थी।

स्कूल प्रबंधन ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। स्कूल के संवाददाता मल्लेश ने पुलिस को दी गई शिकायत में कहा कि किसी भी छात्र को धार्मिक शिक्षा नहीं दी गई। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल दो दिनों तक उर्दू की वर्णमाला सिखाई गई थी और किसी भी प्रकार का धार्मिक पाठ नहीं पढ़ाया गया।

प्रबंधन का कहना है कि यह फैसला पूरी तरह शैक्षणिक आवश्यकता और अभिभावकों की मांग के आधार पर लिया गया था, न कि किसी धार्मिक उद्देश्य से।

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दोनों पक्षों की शिकायत पर पुलिस ने शुरू की जांच

Telangana School Urdu Row के बाद आर्मूर पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायतों पर कार्रवाई शुरू कर दी है। स्कूल प्रबंधन की शिकायत के आधार पर भाजपा नेता एम. बालू के खिलाफ स्कूल परिसर में जबरन प्रवेश करने और मारपीट करने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है।

दूसरी ओर आर्मूर के तहसीलदार सत्यनारायण की शिकायत पर स्कूल के प्रिंसिपल और संवाददाता के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196 तथा धारा 3(5) के तहत विभिन्न समुदायों के बीच वैमनस्य फैलाने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि दोनों शिकायतों की निष्पक्ष जांच की जा रही है और सभी उपलब्ध साक्ष्यों, वायरल वीडियो तथा संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद कानून के अनुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

इस बीच भाजपा नेता एम. बालू ने स्वीकार किया कि उन्होंने प्रिंसिपल के साथ हाथापाई की थी। हालांकि उन्होंने दावा किया कि उन्हें संदेह था कि स्कूल में हिंदू छात्रों को इस्लाम अपनाने के लिए प्रभावित किया जा रहा था। स्कूल प्रबंधन और प्रिंसिपल ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है।

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Telangana School Urdu Row ने शिक्षा और भाषा पर नई बहस छेड़ी

Telangana School Urdu Row ने एक बार फिर भाषा, शिक्षा और धार्मिक संवेदनशीलता से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय बहस का विषय बना दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी भाषा का अध्ययन अपने आप में धार्मिक शिक्षा नहीं माना जा सकता, लेकिन ऐसे मामलों में पारदर्शिता और अभिभावकों के साथ स्पष्ट संवाद आवश्यक होता है।

घटना के वायरल वीडियो ने भी इस विवाद को और अधिक चर्चा में ला दिया है। कई लोगों ने स्कूल परिसर में हिंसा और शिक्षकों के साथ मारपीट की निंदा की है, जबकि कुछ लोगों ने स्कूल प्रबंधन के निर्णय पर सवाल उठाए हैं।

फिलहाल प्रशासन पूरे मामले की जांच कर रहा है और दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर कायम हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि स्कूल में वास्तव में क्या पढ़ाया गया था और वायरल आरोपों में कितनी सच्चाई है। तब तक यह मामला तेलंगाना की राजनीति और शिक्षा व्यवस्था दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण मुद्दा बना रहेगा।(source)

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