July 16, 2026 7:52 PM

Maruti Grand Vitara E20 विवाद में डॉक्टर के पक्ष में फैसला, नई कार देने का आदेश

छत्तीसगढ़ की उपभोक्ता आयोग ने Maruti Grand Vitara E20 विवाद में डॉक्टर के पक्ष में फैसला सुनाते हुए डीलर को 45 दिनों के भीतर E20-समर्थित नई कार देने का आदेश दिया है। आदेश का पालन नहीं होने पर पूरी रकम लौटानी होगी।

EDITED BY: Shiva

UPDATED: Thursday, July 16, 2026

Maruti Grand Vitara E20 विवाद में डॉक्टर के पक्ष में फैसला, नई कार देने का आदेश

Maruti Grand Vitara E20 : छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने Maruti Grand Vitara E20 मामले में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। आयोग ने एक कार डीलर को निर्देश दिया है कि वह शिकायतकर्ता डॉक्टर को 45 दिनों के भीतर उसी मॉडल की नई Maruti Grand Vitara E20-अनुकूल कार उपलब्ध कराए। यदि तय समय में नई कार नहीं दी जाती है, तो ग्राहक द्वारा चुकाई गई पूरी राशि वापस करनी होगी।

यह मामला उपभोक्ता अधिकारों और वाहन बिक्री में पारदर्शिता को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आयोग ने माना कि ग्राहक को एक पुराना मॉडल नई कार के रूप में बेचा गया, जो E20 पेट्रोल के अनुरूप नहीं था। इसी वजह से वाहन में बार-बार तकनीकी समस्याएं सामने आईं।

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Maruti Grand Vitara E20 विवाद में डॉक्टर के पक्ष में फैसला, नई कार देने का आदेश
 

Maruti Grand Vitara E20 मामले की शुरुआत कैसे हुई?

शिकायतकर्ता डॉ. प्रेमराज देबता ने जून 2024 में लगभग 18.29 लाख रुपये में Maruti Grand Vitara E20 स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड ज़ेटा प्लस मॉडल खरीदा था। इसके अलावा उन्होंने लगभग 1.86 लाख रुपये बीमा और आरटीओ शुल्क के रूप में भी भुगतान किया।

कार की वारंटी मई 2029 या एक लाख किलोमीटर तक के लिए थी। शुरुआती पांच महीनों में वाहन लगभग 21,913 किलोमीटर चला।

11 नवंबर 2024 को अचानक कार के डैशबोर्ड पर इंजन संबंधी चेतावनी दिखाई दी और वाहन बीच रास्ते में बंद हो गया। इसके बाद डॉ. देबता कार को उसी शोरूम में ले गए जहां से उन्होंने Maruti Grand Vitara E20 खरीदी थी।

डीलर ने जांच के बाद दावा किया कि वाहन में मिलावटी पेट्रोल का उपयोग किया गया था, जिससे इंजन खराब हुआ। हालांकि इसके बाद भी कई बार मरम्मत के बावजूद समस्या दोबारा आती रही।

आयोग ने क्यों माना डीलर की गलती?

सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि जिस Maruti Grand Vitara E20 कार को नई बताकर बेचा गया था, उसका निर्माण जनवरी 2023 में हुआ था। यानी ग्राहक को मई 2024 में लगभग 17 महीने पुरानी कार नई बताकर बेची गई।

आयोग ने यह भी पाया कि वाहन E20 पेट्रोल के अनुरूप नहीं था। जबकि डीलर और निर्माता इंजन खराब होने का कारण ईंधन में गड़बड़ी बता रहे थे, आयोग ने कहा कि ईंधन की गुणवत्ता पर ग्राहक का कोई नियंत्रण नहीं हो सकता।

रिकॉर्ड के अनुसार ग्राहक ने कई बार पेट्रोल बदलवाया, टैंक की सफाई करवाई और वाहन की बार-बार सर्विस करवाई, लेकिन Maruti Grand Vitara E20 से जुड़ी समस्या दूर नहीं हुई।

आयोग ने माना कि यदि वाहन वास्तव में E20 पेट्रोल के अनुरूप नहीं था और उसे नई कार के रूप में बेचा गया, तो यह सेवा में कमी (Deficiency in Service) और अनुचित व्यापारिक व्यवहार (Unfair Trade Practice) की श्रेणी में आता है।

Maruti Grand Vitara E20 विवाद में डॉक्टर के पक्ष में फैसला, नई कार देने का आदेश

आयोग का बड़ा आदेश और मुआवजा

उपभोक्ता आयोग ने अपने फैसले में स्पष्ट निर्देश दिया कि डीलर और निर्माता 45 दिनों के भीतर शिकायतकर्ता को उसी मॉडल की नई Maruti Grand Vitara E20-अनुकूल कार उपलब्ध कराएं।

यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर नई कार उपलब्ध नहीं कराई जाती, तो शिकायतकर्ता द्वारा वाहन, बीमा और अन्य शुल्कों सहित जमा की गई पूरी राशि वापस करनी होगी।

इसके अलावा आयोग ने मानसिक उत्पीड़न के लिए शिकायतकर्ता को एक लाख रुपये का मुआवजा देने का भी आदेश दिया है। यदि यह राशि 45 दिनों के भीतर नहीं दी जाती है, तो उस पर 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।

यह फैसला उन उपभोक्ताओं के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है जो वाहन खरीदते समय मॉडल वर्ष, निर्माण तिथि और तकनीकी अनुकूलता जैसी जानकारियों पर भरोसा करते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि Maruti Grand Vitara E20 मामले में आया यह निर्णय वाहन उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश है कि ग्राहकों को उत्पाद की सही जानकारी देना अनिवार्य है। यदि किसी पुराने मॉडल को नई कार के रूप में बेचा जाता है या उसकी तकनीकी क्षमता के बारे में गलत जानकारी दी जाती है, तो उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत कार्रवाई हो सकती है।

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