RBI SNFA Rules 2026 : भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकिंग क्षेत्र में फंसे हुए ऋणों (Stressed Assets) के प्रबंधन को और पारदर्शी बनाने के लिए RBI SNFA Rules 2026 जारी किए हैं। इन नए नियमों के तहत बैंकों द्वारा डिफॉल्ट करने वाले उधारकर्ताओं से प्राप्त गैर-वित्तीय संपत्तियों (Specified Non-Financial Assets – SNFAs) के अधिग्रहण, मूल्यांकन, प्रबंधन और बिक्री के लिए विस्तृत दिशानिर्देश तय किए गए हैं।
RBI SNFA Rules 2026 के अनुसार, बैंकों को ऐसी संपत्तियों की बिक्री मुख्य रूप से सार्वजनिक नीलामी के माध्यम से करनी होगी। इसके अलावा, जब्त की गई संपत्ति को मूल उधारकर्ता या उससे जुड़े पक्षों को दोबारा बेचने पर रोक लगा दी गई है।
RBI का मानना है कि इन उपायों से वसूली प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और बैंकिंग प्रणाली में जवाबदेही मजबूत होगी।

RBI SNFA Rules 2026 में SNFA क्या है?
RBI SNFA Rules 2026 में SNFA यानी Specified Non-Financial Assets को परिभाषित किया गया है। यह वे अचल संपत्तियां हैं जिन्हें बैंक ऋण चुकाने में असफल रहने वाले उधारकर्ताओं से वसूली के हिस्से के रूप में प्राप्त करते हैं।
इन संपत्तियों में आवासीय भवन, वाणिज्यिक संपत्तियां, औद्योगिक भूमि और अन्य रियल एस्टेट शामिल हो सकते हैं।
नए नियमों के तहत कोई भी बैंक तभी SNFA प्राप्त कर सकता है जब संबंधित ऋण को आधिकारिक रूप से गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (NPA) घोषित कर दिया गया हो।
यदि किसी संपत्ति के हस्तांतरण से केवल ऋण का एक हिस्सा ही समायोजित होता है, तो बची हुई राशि को पुनर्गठन (Restructuring) नियमों के अनुसार ही प्रबंधित किया जाएगा।
RBI SNFA Rules 2026 का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बैंक ऐसे मामलों में पर्याप्त प्रावधान और जोखिम प्रबंधन बनाए रखें।
मूल्यांकन और होल्डिंग अवधि पर सख्त प्रावधान
RBI SNFA Rules 2026 के तहत संपत्तियों के मूल्यांकन के लिए भी कड़े नियम बनाए गए हैं।
RBI ने निर्देश दिया है कि किसी भी SNFA को बैंक अपनी पुस्तकों में दो मूल्यों में से जो कम हो, उसी पर दर्ज करेगा। इसमें पहला मूल्य समाप्त किए गए ऋण का नेट बुक वैल्यू होगा और दूसरा स्वतंत्र बाहरी मूल्यांकनकर्ताओं द्वारा निर्धारित डिस्ट्रेस सेल वैल्यू।
इसके लिए कम से कम दो स्वतंत्र मूल्यांकनकर्ताओं की रिपोर्ट आवश्यक होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि RBI SNFA Rules 2026 के तहत अपनाई गई यह व्यवस्था बैंक बैलेंस शीट में संपत्तियों के कृत्रिम रूप से अधिक मूल्यांकन को रोकने में मदद करेगी।
इसके अलावा RBI ने बैंकों को निर्देश दिया है कि वे SNFA के अधिग्रहण और निपटान के लिए अपनी आंतरिक नीति तैयार करें। इस नीति में पात्रता मानदंड, स्वीकृति प्रक्रिया, वसूली के प्रयास, परिसंपत्तियों की सीमा और निपटान की समयसीमा शामिल होनी चाहिए।
नए नियमों के अनुसार बैंक किसी SNFA को अधिकतम सात वर्षों तक ही अपने पास रख सकते हैं।
संपत्ति की बिक्री और रिपोर्टिंग में बढ़ेगी पारदर्शिता
RBI SNFA Rules 2026 के तहत सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि बैंक जब्त की गई संपत्तियों को मूल उधारकर्ता या उससे जुड़े व्यक्तियों को वापस नहीं बेच सकेंगे।
RBI का मानना है कि इससे वसूली प्रक्रिया के दुरुपयोग को रोका जा सकेगा और पारदर्शिता बढ़ेगी।
इसके अलावा केंद्रीय बैंक ने निर्देश दिया है कि ऐसी संपत्तियों की बिक्री प्राथमिक रूप से SARFAESI Act, 2002 के सिद्धांतों के अनुरूप सार्वजनिक नीलामी के माध्यम से की जाए।
RBI SNFA Rules 2026 में लेखांकन और खुलासा (Disclosure) संबंधी नियम भी स्पष्ट किए गए हैं। अब SNFA को बैंकों के सकल NPA, शुद्ध NPA या अन्य तनावग्रस्त परिसंपत्तियों का हिस्सा नहीं माना जाएगा।
इसके बजाय इन्हें बैलेंस शीट में “Non-Banking Assets Acquired in Satisfaction of Claims” नामक अलग श्रेणी में दिखाया जाएगा।
साथ ही बैंकों को RBI के CIMS पोर्टल पर इन संपत्तियों से संबंधित विस्तृत वार्षिक रिपोर्ट जमा करनी होगी। रिपोर्ट में अधिग्रहण, बिक्री, आयु-आधारित वर्गीकरण और बैंक के स्वयं के उपयोग में लाई गई संपत्तियों की जानकारी शामिल होगी।
RBI ने यह भी स्पष्ट किया है कि 30 सितंबर 2026 तक बैंकों के पास मौजूद पुरानी संपत्तियों को 30 सितंबर 2027 तक नए ढांचे के अनुरूप लाना होगा। RBI SNFA Rules 2026 आधिकारिक रूप से 1 अक्टूबर 2026 से लागू होंगे।




