अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे को लेकर चल रहे विवाद के बीच अब 900 किलो से अधिक चांदी को लेकर नया मामला सामने आया है। Ram Mandir Donation Controversy के बीच मंदिर ट्रस्ट ने स्पष्ट किया है कि श्रद्धालुओं द्वारा दान की गई 900 किलो से ज्यादा चांदी को जांच और शुद्धिकरण के लिए हैदराबाद भेजा गया था। ट्रस्ट के मुताबिक इसका उद्देश्य चांदी की शुद्धता की जांच करना और उसे पिघलाकर सुरक्षित चांदी की ईंटों के रूप में संरक्षित करना था।
इसी बीच चढ़ावे में कथित गड़बड़ी के मामले में चल रही जांच, ट्रस्ट पदाधिकारियों के बयान और इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के बाद यह पूरा मामला एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है।

900 किलो चांदी हैदराबाद क्यों भेजी गई?
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, राम मंदिर में भक्तों द्वारा दान की गई 900 किलो से अधिक चांदी को Security Printing and Minting Corporation of India Limited> (SPMCIL) के पास हैदराबाद भेजा गया। इस सरकारी संस्था का काम चांदी की शुद्धता की जांच करना और उसे पिघलाकर मानक स्वरूप में तैयार करना था।
रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि इस पूरी प्रक्रिया में परिवहन, सुरक्षा व्यवस्था, सैंपलिंग, अशुद्धियां हटाने और चांदी को ईंटों में बदलने पर लाखों रुपये खर्च हुए। बताया गया कि केवल चांदी को कड़ी सुरक्षा के बीच हैदराबाद पहुंचाने में ही एक लाख रुपये से अधिक का खर्च आया।
ट्रस्ट के अनुसार, जांच के दौरान अशुद्धियां अलग करने के बाद चांदी की शुद्धता लगभग 90 प्रतिशत पाई गई। हालांकि इन दावों की पुष्टि जांच एजेंसियां अपने स्तर पर कर रही हैं।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि नवंबर 2024 और मार्च 2025 में हुई ट्रस्ट की बैठकों में यह सुझाव दिया गया था कि मंदिर परिसर में कीमती आभूषण और बहुमूल्य दान स्वीकार करने वाले श्रद्धालुओं के लिए अलग और अधिक जवाबदेह व्यवस्था विकसित की जाए, ताकि भविष्य में किसी तरह का विवाद उत्पन्न न हो।
चढ़ावा विवाद पर ट्रस्ट अध्यक्ष और कोषाध्यक्ष की सफाई

Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust के अध्यक्ष Mahant Nritya Gopal Das ने इस पूरे मामले को करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा विषय बताया है।
उन्होंने अपने बयान में कहा कि मंदिर में दान से जुड़ी कथित चोरी की घटना से उन्हें गहरा दुख पहुंचा है। उन्होंने प्रधानमंत्री Narendra Modi> और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath> से इस मामले में हस्तक्षेप करने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने की अपील की। साथ ही उन्होंने लोगों से इस मुद्दे का राजनीतिक लाभ उठाने से बचने का आग्रह भी किया।
इससे पहले ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष Govind Dev Giri ने भी विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया था। उन्होंने कहा कि दान गिनने के दौरान कथित चोरी की घटना अत्यंत पीड़ादायक है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि मंदिर के मुख्य कोष का पूरा हिसाब-किताब सुरक्षित है और उसका नियमित ऑडिट कराया जाता है। उनके अनुसार ट्रस्ट के सभी वित्तीय लेन-देन बैंकिंग माध्यम से किए जाते हैं तथा उनके पास भुगतान संबंधी कोई प्रत्यक्ष अधिकार नहीं है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से कभी नकद दान स्वीकार नहीं किया, केवल दो विशेष परिस्थितियों में दान लिया गया था, जिसकी विधिवत रसीद जारी की गई थी।
हाईकोर्ट में क्या हुआ?
इस पूरे मामले के बीच एक महत्वपूर्ण कानूनी घटनाक्रम भी सामने आया। लखनऊ स्थित Allahabad High Court की खंडपीठ ने इस प्रकरण में सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका खारिज कर दी।
यह याचिका मोहित अशोक नामक याचिकाकर्ता द्वारा दायर की गई थी। राज्य सरकार की ओर से अदालत में यह दलील दी गई कि इसी विषय से जुड़ा मामला पहले से ही सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है, इसलिए इस स्तर पर अलग सुनवाई उचित नहीं होगी। इसके बाद न्यायालय ने याचिका खारिज कर दी।
हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि मामले की जांच बंद हो गई है। पुलिस और विशेष जांच दल (SIT) अभी भी दान, आभूषणों और अन्य चढ़ावे से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कर रहे हैं।
जांच जारी, अंतिम निष्कर्ष का इंतजार
Ram Mandir Donation Controversy में फिलहाल कई स्तरों पर जांच जारी है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि चढ़ावे से जुड़े रिकॉर्ड, कीमती धातुओं और अन्य दान सामग्री का रखरखाव किस प्रकार किया गया तथा कहीं किसी स्तर पर कोई अनियमितता हुई या नहीं।
दूसरी ओर ट्रस्ट लगातार यह कह रहा है कि मंदिर के मुख्य कोष, दान और मूल्यवान धार्मिक वस्तुओं का रिकॉर्ड सुरक्षित है तथा जांच पूरी होने के बाद तथ्य पूरी तरह स्पष्ट हो जाएंगे।
फिलहाल इस मामले में कई आरोप, स्पष्टीकरण और जांच समानांतर रूप से चल रहे हैं। ऐसे में अंतिम निष्कर्ष जांच एजेंसियों की रिपोर्ट और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा। करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले पर देशभर की नजर बनी हुई है।





