July 6, 2026 8:19 PM

राजीव गांधी की हत्या के बाद कैसे बदली Sonia Gandhi की राजनीति? जानिए कांग्रेस की कमान संभालने से लेकर यूपीए सरकार बनाने तक का पूरा सफर

Sonia Gandhi: 1991 में राजीव गांधी की हत्या के बाद सोनिया गांधी ने राजनीति से दूरी बनाए रखने की कोशिश की, लेकिन परिस्थितियों ने उन्हें कांग्रेस की कमान संभालने के लिए मजबूर कर दिया। विरोध, विदेशी मूल का विवाद और सत्ता की राजनीति के बीच उन्होंने कैसे

EDITED BY: Vishal Yadav

UPDATED: Monday, July 6, 2026

राजीव गांधी की हत्या के बाद कैसे बदली Sonia Gandhi की राजनीति? जानिए कांग्रेस की कमान संभालने से लेकर यूपीए सरकार बनाने तक का पूरा सफर

राजीव गांधी की 21 मई 1991 को हुई हत्या केवल गांधी परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि भारतीय राजनीति के लिए भी एक बड़ा मोड़ साबित हुई। पूर्व प्रधानमंत्री की हत्या के बाद सबसे बड़ा सवाल यह था कि कांग्रेस पार्टी की कमान अब किसके हाथों में होगी। उस समय पार्टी के भीतर कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे, लेकिन कार्यकर्ताओं और नेताओं की नजरें एक ही व्यक्ति पर टिक गईं—Sonia Gandhi

हालांकि उस समय सोनिया गांधी राजनीति में आने के पक्ष में नहीं थीं। उन्होंने सार्वजनिक रूप से कांग्रेस अध्यक्ष बनने से इनकार कर दिया और कहा कि यह उनके और उनके परिवार के लिए बेहद कठिन समय है। लेकिन आने वाले वर्षों में राजनीतिक परिस्थितियां लगातार बदलती गईं और अंततः सोनिया गांधी को सक्रिय राजनीति में कदम रखना पड़ा। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस के नेतृत्व से लेकर केंद्र में सरकार बनाने तक भारतीय राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

ये भी पढ़े: Agniveer Scheme में हो सकता है बड़ा बदलाव! क्या अब 25% नहीं, आधे से ज्यादा अग्निवीर बनेंगे परमानेंट?

राजीव गांधी की हत्या के बाद कैसे बदली Sonia Gandhi की राजनीति? जानिए कांग्रेस की कमान संभालने से लेकर यूपीए सरकार बनाने तक का पूरा सफर


राजीव गांधी की हत्या के बाद कांग्रेस की चुनौती और सोनिया गांधी की एंट्री

1991 के लोकसभा चुनाव राजीव गांधी की हत्या के बाद हुए। कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, लेकिन नेतृत्व का सवाल बरकरार था। उस समय वरिष्ठ नेताओं के बीच विभिन्न नामों पर चर्चा हुई और अंततः P. V. Narasimha Rao को प्रधानमंत्री चुना गया।

इस दौरान Sonia Gandhi ने खुद को सक्रिय राजनीति से दूर रखा। उन्होंने Rajiv Gandhi Foundation और अन्य सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से अपने पति के सपनों को आगे बढ़ाने का प्रयास किया। हालांकि कांग्रेस संगठन के भीतर लगातार यह मांग उठती रही कि पार्टी को दोबारा मजबूत करने के लिए गांधी परिवार का नेतृत्व जरूरी है।

1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंस और उसके बाद देशभर में हुए सांप्रदायिक तनाव ने कांग्रेस की राजनीति को भी प्रभावित किया। इसके बाद पार्टी के भीतर मतभेद बढ़ने लगे। 1995 तक कई वरिष्ठ नेता नेतृत्व से असंतुष्ट दिखाई देने लगे और कांग्रेस लगातार चुनावी झटके झेल रही थी।

इसी दौरान सोनिया गांधी ने पहली बार सार्वजनिक रूप से राजीव गांधी हत्या मामले की जांच में हो रही देरी पर नाराजगी जताई। इसे उनकी सक्रिय राजनीतिक भूमिका की शुरुआत माना गया।

कांग्रेस अध्यक्ष बनने से लेकर विदेशी मूल के विवाद तक

मार्च 1997 में Sonia Gandhi ने कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता ग्रहण की। इसके बाद पार्टी कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ा और 1998 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के लिए व्यापक चुनाव प्रचार किया।

इसी वर्ष उन्हें कांग्रेस अध्यक्ष चुन लिया गया। हालांकि उनके नेतृत्व की शुरुआत आसान नहीं रही। भारतीय जनता पार्टी समेत कई विपक्षी नेताओं ने उनके विदेशी मूल को बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाया। चुनावी सभाओं और राजनीतिक बयानों में उनकी नागरिकता, उच्चारण और विदेशी पृष्ठभूमि को लेकर सवाल उठाए गए।

राजीव गांधी की हत्या के बाद कैसे बदली Sonia Gandhi की राजनीति? जानिए कांग्रेस की कमान संभालने से लेकर यूपीए सरकार बनाने तक का पूरा सफर

1999 में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं Sharad Pawar, P. A. Sangma और Tariq Anwar ने भी विदेशी मूल का मुद्दा उठाया। इसके बाद सोनिया गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया।

लेकिन कांग्रेस कार्यकर्ताओं और प्रदेश इकाइयों के भारी समर्थन के बाद उन्होंने अपना इस्तीफा वापस लिया। बाद में इन नेताओं ने अलग होकर Nationalist Congress Party> (एनसीपी) का गठन किया।

1999 के चुनाव में सोनिया गांधी ने अमेठी और बेल्लारी दोनों सीटों से चुनाव लड़ा और दोनों जगह जीत दर्ज की। बाद में उन्होंने अमेठी सीट अपने पास रखी और लोकसभा में विपक्ष की नेता बनीं।

2004 में सत्ता परिवर्तन और प्रधानमंत्री पद ठुकराने का फैसला

2004 का लोकसभा चुनाव भारतीय राजनीति के सबसे अहम चुनावों में गिना जाता है। उस समय अधिकांश राजनीतिक विश्लेषकों को उम्मीद थी कि Atal Bihari Vajpayee के नेतृत्व वाला गठबंधन फिर सत्ता में लौटेगा। लेकिन चुनाव परिणामों में कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन को बहुमत मिला।

चुनाव के बाद Sonia Gandhi को कांग्रेस संसदीय दल का नेता चुना गया। व्यापक राजनीतिक चर्चाओं के बीच माना जा रहा था कि वे देश की अगली प्रधानमंत्री बनेंगी।

हालांकि इस दौरान उनके विदेशी मूल को लेकर विरोध तेज हो गया। विपक्ष की कई नेताओं ने उनके प्रधानमंत्री बनने का सार्वजनिक विरोध किया।

इसी बीच सोनिया गांधी ने एक अप्रत्याशित फैसला लेते हुए प्रधानमंत्री बनने से इनकार कर दिया और अर्थशास्त्री तथा पूर्व वित्त मंत्री Manmohan Singh का नाम आगे बढ़ाया। इसके बाद मनमोहन सिंह देश के प्रधानमंत्री बने, जबकि सोनिया गांधी संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) की अध्यक्ष बनीं।

यह फैसला भारतीय राजनीति के सबसे चर्चित निर्णयों में गिना जाता है और इसने सोनिया गांधी की राजनीतिक शैली को एक अलग पहचान दी।

यूपीए सरकार, बड़े कानून और कांग्रेस का उतार-चढ़ाव

यूपीए सरकार के दौरान Sonia Gandhi की अध्यक्षता में गठित National Advisory Council> (एनएसी) ने कई महत्वपूर्ण सामाजिक कल्याण कानूनों के मसौदे तैयार करने में भूमिका निभाई। इनमें Right to Information Act, **Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Act>, खाद्य सुरक्षा कानून और शिक्षा के अधिकार जैसे प्रमुख कानून शामिल रहे।

2009 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने अपने प्रदर्शन में उल्लेखनीय सुधार किया और यूपीए दूसरी बार सत्ता में लौटा। इससे पार्टी में सोनिया गांधी की स्थिति और मजबूत हुई।

हालांकि दूसरे कार्यकाल में भ्रष्टाचार के आरोप, जन आंदोलनों और राजनीतिक चुनौतियों ने सरकार की लोकप्रियता को प्रभावित किया। 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को अपने इतिहास की सबसे बड़ी हार का सामना करना पड़ा और पार्टी केवल 44 सीटों पर सिमट गई। दूसरी ओर Narendra Modi के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी ने पूर्ण बहुमत हासिल किया।

इसके बाद स्वास्थ्य कारणों से सोनिया गांधी ने धीरे-धीरे सक्रिय राजनीति से दूरी बनानी शुरू कर दी। बाद में कांग्रेस अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी Rahul Gandhi को सौंपी गई। वर्तमान में सोनिया गांधी संसद के उच्च सदन की सदस्य हैं और सक्रिय चुनावी राजनीति में पहले की तुलना में कम दिखाई देती हैं।

भारतीय राजनीति में Sonia Gandhi का सफर असाधारण माना जाता है। एक ऐसी महिला, जिसने कभी राजनीति में आने की इच्छा नहीं जताई थी, बाद में देश की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी का नेतृत्व किया, दो बार केंद्र में सरकार बनाने में निर्णायक भूमिका निभाई और दो दशकों से अधिक समय तक भारतीय राजनीति के केंद्र में बनी रहीं।

राजीव गांधी की हत्या के बाद कैसे बदली Sonia Gandhi की राजनीति? जानिए कांग्रेस की कमान संभालने से लेकर यूपीए सरकार बनाने तक का पूरा सफर

Share :

Leave a Reply

Related Post

खबरें और भी..

×