बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के बेटे और जनशक्ति जनता दल के नेता Tej Pratap Yadav के खिलाफ हत्या की कोशिश (Attempt to Murder) सहित भारतीय न्याय संहिता (BNS) की 13 धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।
यह कार्रवाई 25 जुलाई को बिहार में पेपर लीक के खिलाफ हुए प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा के मामले में की गई है। पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान सरकारी आदेशों का उल्लंघन हुआ और हिंसा में कई पुलिसकर्मी घायल हुए।
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क्या है पूरा मामला?
25 जुलाई को पेपर लीक के विरोध में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी पटना के गांधी मैदान क्षेत्र में एकत्र हुए थे। आरोप है कि उस समय बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के चलते इलाके में प्रदर्शन और नारेबाजी की अनुमति नहीं थी।
एफआईआर के अनुसार, सीजेपी और आयशा के बैनर तले करीब 1,000 प्रदर्शनकारी गांधी मैदान के गेट नंबर-10 के पास जुटे और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करने लगे।
पुलिस का कहना है कि इसी दौरान तेज प्रताप यादव भी प्रदर्शनकारियों के बीच पहुंचे, जिसके बाद भीड़ और उग्र हो गई। इसके बाद हुई हिंसा में गांधी मैदान थाना प्रभारी अखिलेश मिश्रा समेत कई पुलिसकर्मी घायल हो गए।
तेज प्रताप यादव की गिरफ्तारी
घटना के बाद पुलिस ने 25 जुलाई की शाम पटना के एक शॉपिंग मॉल से तेज प्रताप यादव को गिरफ्तार किया। अगले दिन उन्हें अदालत में पेश किया गया, जहां से कोर्ट ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। फिलहाल वे पटना के बेयूर सेंट्रल जेल में बंद हैं।
किन-किन धाराओं में दर्ज हुआ मामला?
पुलिस ने तेज प्रताप यादव के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है। इनमें प्रमुख धाराएं शामिल हैं—
- धारा 109 – हत्या की कोशिश (Attempt to Murder)
- धारा 132 – सरकारी कर्मचारी पर हमला
- धारा 293 – सार्वजनिक स्थान पर अश्लील हरकत या गाली-गलौज
- धारा 49 – अपराध के लिए उकसाना
- धारा 299 – धार्मिक भावनाएं आहत करना
- धारा 61(2) – अपराध की योजना बनाना
- धारा 251 – दंगा या हिंसक भीड़ का हिस्सा होना
- धारा 297 – ड्यूटी कर रहे सरकारी कर्मचारी को चोट पहुंचाना
- धारा 223 – सरकारी आदेश की अवहेलना
- धारा 197(2) – गैरकानूनी भीड़ का हिस्सा होना
- धारा 191(3) – दंगे के दौरान घातक हथियार रखने का आरोप
- धारा 190 – गैरकानूनी भीड़ का साझा उद्देश्य
- धारा 196 – अलग-अलग समूहों के बीच दुश्मनी फैलाना
इसके अलावा सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से संबंधित कानून, 1984 की धारा 3 और 4 भी एफआईआर में जोड़ी गई हैं।
हत्या की कोशिश की धारा क्यों महत्वपूर्ण?
एफआईआर में सबसे गंभीर आरोप धारा 109 (हत्या की कोशिश) का है।
यदि जांच और अदालत की प्रक्रिया के बाद इस आरोप में दोष सिद्ध होता है, तो आरोपी को 10 साल तक की सजा और जुर्माना हो सकता है। वहीं, यदि घटना में किसी को गंभीर चोट पहुंचने के आधार पर अदालत अपराध को अधिक गंभीर मानती है, तो कानून के तहत आजीवन कारावास का भी प्रावधान हो सकता है।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि एफआईआर दर्ज होना या आरोप लगना किसी व्यक्ति के दोषी होने का प्रमाण नहीं होता। अंतिम निर्णय अदालत में सुनवाई और साक्ष्यों के आधार पर होगा।
पुलिस का क्या कहना है?
एफआईआर के अनुसार, प्रदर्शन प्रतिबंधित क्षेत्र में किया गया था और भीड़ के उग्र होने के बाद कानून-व्यवस्था बिगड़ गई। पुलिस का दावा है कि हिंसा के दौरान कई पुलिसकर्मी घायल हुए और सरकारी कामकाज में बाधा पहुंचाई गई।
बचाव पक्ष का पक्ष
तेज प्रताप यादव के वकील ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि गिरफ्तारी और लगाए गए आरोपों को अदालत में चुनौती दी जाएगी तथा जल्द ही जमानत याचिका दाखिल की जाएगी।
तेजस्वी यादव की प्रतिक्रिया
इस मामले पर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यदि उनके भाई और प्रदर्शन में शामिल छात्रों को 24 घंटे के भीतर रिहा नहीं किया गया, तो बिहार में बड़ा आंदोलन किया जाएगा। अब इस पूरे मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई, पुलिस जांच और अदालत की सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।




