केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सबसे बड़ा सवाल यह था कि देश का अगला शिक्षा मंत्री कौन होगा। अब इस सवाल का जवाब सामने आ गया है। Prahlad Joshi Education Minister के तहत केंद्र सरकार ने प्रहलाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया है।
बताया गया है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। इसके बाद कैबिनेट में फेरबदल के तहत प्रहलाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है। वे पहले से केंद्र सरकार में दो महत्वपूर्ण मंत्रालय संभाल रहे हैं और अब तीसरे मंत्रालय का कार्यभार भी उनके पास होगा।
ये भी पढ़े: धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री पद से दिया इस्तीफा, युवाओं के नाम लिखी चिट्ठी में बताई वजह

प्रहलाद जोशी के पास पहले से कौन-कौन से मंत्रालय हैं?
प्रहलाद जोशी वर्तमान में केंद्र सरकार में दो मंत्रालयों की जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
उनके पास पहले से:
- उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय
- नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय
की जिम्मेदारी है। अब इन्हीं मंत्रालयों के साथ उन्हें शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है। इस तरह वे फिलहाल केंद्र सरकार में तीन महत्वपूर्ण मंत्रालयों से जुड़े दायित्व निभाएंगे।
राष्ट्रपति ने स्वीकार किया धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा
धर्मेंद्र प्रधान द्वारा अपना इस्तीफा सौंपे जाने के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उसे स्वीकार कर लिया है। इस्तीफा स्वीकार होने के साथ ही शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त कार्यभार प्रहलाद जोशी को सौंपने का फैसला लागू हो गया। अब मंत्रालय के प्रशासनिक और नीतिगत कार्यों की जिम्मेदारी अतिरिक्त प्रभार के रूप में प्रहलाद जोशी संभालेंगे।
धर्मेंद्र प्रधान के लिए किया था भावनात्मक पोस्ट
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की घोषणा के बाद प्रहलाद जोशी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर उनके लिए एक संदेश भी साझा किया था। अपने संदेश में उन्होंने धर्मेंद्र प्रधान के लंबे राजनीतिक जीवन और शिक्षा क्षेत्र में उनके योगदान की सराहना की। उन्होंने लिखा कि धर्मेंद्र प्रधान का सार्वजनिक जीवन राष्ट्र निर्माण के प्रति समर्पित रहा है और नई शिक्षा नीति (NEP 2020) को लागू करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा मंत्री पद छोड़ने का अर्थ यह नहीं है कि धर्मेंद्र प्रधान राष्ट्र निर्माण में योगदान देना बंद कर देंगे और भविष्य में भी उनका अनुभव देश के काम आएगा। दिलचस्प बात यह रही कि कुछ ही घंटों बाद शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार स्वयं प्रहलाद जोशी को सौंप दिया गया।

कौन हैं प्रहलाद जोशी?
प्रहलाद जोशी भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं। उनका राजनीतिक जीवन तीन दशकों से अधिक लंबा माना जाता है। वे शुरुआती दौर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े रहे। बाद में भारतीय जनता पार्टी में सक्रिय राजनीति की शुरुआत की।
वे कर्नाटक के धारवाड़ लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते रहे हैं और वर्ष 2004 से लगातार कई बार लोकसभा चुनाव जीत चुके हैं। संसदीय कार्यों और संगठनात्मक जिम्मेदारियों के कारण उन्हें भाजपा के अनुभवी नेताओं में माना जाता है।
संसदीय मामलों का भी रहा अनुभव
प्रहलाद जोशी पहले संसदीय कार्य मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। संसदीय कार्य मंत्री की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है क्योंकि इस पद पर बैठे व्यक्ति को सरकार और विपक्ष के बीच समन्वय स्थापित करते हुए संसद की कार्यवाही सुचारु रूप से चलाने की जिम्मेदारी निभानी होती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विभिन्न मंत्रालयों और संसदीय अनुभव के कारण उन्हें अतिरिक्त जिम्मेदारियां संभालने का अनुभव है।
आगे क्या होगा?
शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार मिलने के बाद अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि मंत्रालय की नीतियों और लंबित मामलों पर आगे क्या निर्णय लिए जाते हैं। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि भविष्य में शिक्षा मंत्रालय के लिए पूर्णकालिक मंत्री नियुक्त किया जाएगा या प्रहलाद जोशी ही लंबे समय तक अतिरिक्त प्रभार संभालेंगे। देशभर में शिक्षा व्यवस्था और छात्र आंदोलनों को लेकर चल रही चर्चा के बीच यह नियुक्ति केंद्र सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय मानी जा रही है।





