महाराष्ट्र शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पेपर लीक मामले में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए और चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। करीब 6 लाख अभ्यर्थियों के भविष्य से जुड़े इस मामले में पुलिस का दावा है कि पूरा खेल किसी हाईटेक हैकिंग या बड़े सरकारी अधिकारी की मिलीभगत से नहीं, बल्कि प्रिंटिंग प्रेस के कुछ कर्मचारियों की मदद से अंजाम दिया गया।
जांच के अनुसार, Maharashtra TET Paper Leak का कथित मास्टरमाइंड बिहार निवासी Vijendra Gupta है, जिसने बेहद सुनियोजित तरीके से प्रिंटिंग प्रेस के कर्मचारियों का भरोसा जीता और फिर परीक्षा प्रश्नपत्र बाहर निकलवाने की साजिश रची। इस पूरे मामले के बाद महाराष्ट्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली में बड़े बदलावों के संकेत दिए हैं।

जूते में छिपाकर कैसे बाहर निकाला गया प्रश्नपत्र?
पुलिस जांच के अनुसार महाराष्ट्र TET परीक्षा 28 जून को आयोजित होनी थी। प्रश्नपत्रों की छपाई महाराष्ट्र से बाहर उत्तर प्रदेश के आगरा स्थित एक निजी सीक्रेट प्रिंटिंग प्रेस में कराई जा रही थी। सुरक्षा कारणों से इस प्रेस की जानकारी बेहद सीमित लोगों तक रखी गई थी।
जांच में सामने आया कि प्रिंटिंग प्रेस में कार्यरत बाबूलाल कुशवाहा नामक कर्मचारी, जो प्रश्नपत्रों की पैकिंग का काम करता था, प्रत्येक सेट की एक कॉपी अलग निकाल देता था। इसके बाद यह कॉपी दूसरे कर्मचारी नरेश कुमार उर्फ निक्की को दी जाती थी।
पुलिस के मुताबिक नरेश अपने जूते का इंसोल निकालकर प्रश्नपत्र को मोड़कर उसके अंदर छिपा देता था और फिर इंसोल वापस लगा देता था। बाहर निकलते समय सुरक्षा जांच में कर्मचारियों के कपड़ों की तलाशी तो ली जाती थी, लेकिन जूतों के भीतर छिपाए गए कागज पर किसी का ध्यान नहीं गया।
जांच एजेंसियों का कहना है कि प्रेस के जिन सीसीटीवी कैमरों से इस गतिविधि की निगरानी हो सकती थी, वे उस समय बंद थे। प्रेस से बाहर आने के बाद प्रश्नपत्र एक पूर्व कर्मचारी के माध्यम से कथित मास्टरमाइंड तक पहुंचाया जाता था।
₹8 हजार और शराब पार्टी के बदले तैयार हुए कर्मचारी
पुलिस के अनुसार Vijendra Gupta ने लंबे समय तक प्रिंटिंग प्रेस के कुछ कर्मचारियों से संपर्क बनाए रखा। जांच में दावा किया गया है कि वह कर्मचारियों को यूपीआई के जरिए पैसे भेजता था और उनकी शराब पार्टियों का खर्च उठाता था।
जब महाराष्ट्र TET का प्रश्नपत्र छपाई के लिए प्रेस पहुंचा, तब कथित तौर पर कर्मचारियों ने इसकी सूचना विजेंद्र गुप्ता तक पहुंचाई। पुलिस का आरोप है कि कर्मचारियों को इस काम के बदले लगभग ₹8 हजार और जमीन के छोटे टुकड़े का लालच दिया गया।
इसके बाद यही प्रश्नपत्र महाराष्ट्र में सक्रिय नेटवर्क तक पहुंचाया गया। जांच एजेंसियों का आरोप है कि एक प्रश्नपत्र लगभग ₹80 हजार तक में अभ्यर्थियों को बेचने की योजना बनाई गई थी। पुलिस के अनुसार इस नेटवर्क का लक्ष्य हजारों अभ्यर्थियों तक प्रश्नपत्र पहुंचाना था।

कैसे खुला पूरा मामला?
पुलिस के मुताबिक परीक्षा से दो दिन पहले उन्हें सूचना मिली कि कुछ लोग TET का असली प्रश्नपत्र बेच रहे हैं। शुरुआत में पुलिस को शक था कि यह सामान्य ठगी का मामला हो सकता है, लेकिन जब जांच की गई तो बरामद प्रश्नपत्र वास्तविक परीक्षा प्रश्नपत्र निकला।
इसके बाद कार्रवाई करते हुए पुलिस ने कई लोगों को गिरफ्तार किया और पूछताछ के आधार पर जांच आगरा स्थित प्रिंटिंग प्रेस तक पहुंच गई। अब तक इस मामले में बिहार, हरियाणा और उत्तर प्रदेश समेत विभिन्न राज्यों से कई आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
जांच के दौरान प्रिंटिंग प्रेस के कर्मचारियों को भी हिरासत में लिया गया। पुलिस ने इस पूरे मामले की जांच के लिए 20 सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है।
जांच एजेंसियों का दावा है कि Vijendra Gupta पहले भी विभिन्न राज्यों के पेपर लीक मामलों में आरोपी रह चुका है। पुलिस के अनुसार वह पहले भी हत्या और अन्य परीक्षा पेपर लीक मामलों में गिरफ्तार हो चुका है तथा कई राज्यों में सक्रिय नेटवर्क तैयार कर चुका था। फिलहाल वह फरार बताया जा रहा है और पुलिस उसकी तलाश कर रही है।
सरकार क्या बदलाव करने की तैयारी में है?
Maharashtra TET Paper Leak मामले के बाद महाराष्ट्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली में व्यापक बदलाव की तैयारी शुरू कर दी है। सरकार ने मुख्य सचिव Rajesh Agrawal की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समिति गठित की है। समिति परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित बनाने के उपायों पर काम कर रही है।
विचार किए जा रहे प्रमुख प्रस्तावों में शिक्षक पात्रता परीक्षा को पूरी तरह कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) में बदलना शामिल है। इसके अलावा प्रश्नपत्रों की पारंपरिक छपाई के बजाय परीक्षा के दिन डिजिटल माध्यम से सीधे परीक्षा केंद्रों तक सुरक्षित प्रश्नपत्र पहुंचाने की व्यवस्था पर भी विचार किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह व्यवस्था लागू होती है तो प्रिंटिंग प्रेस से जुड़े जोखिम काफी हद तक कम हो सकते हैं। हालांकि साइबर सुरक्षा और डिजिटल सिस्टम की मजबूती भी उतनी ही महत्वपूर्ण होगी।
फिलहाल पुलिस की जांच जारी है और फरार आरोपियों की तलाश की जा रही है। इस पूरे मामले ने एक बार फिर देश में प्रतियोगी परीक्षाओं की सुरक्षा व्यवस्था और पेपर लीक रोकने के उपायों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।





