K Annamalai ने BJP छोड़ने का किया ऐलान:
तमिलनाडु भाजपा के पूर्व अध्यक्ष और दक्षिण भारत में पार्टी के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे K Annamalai ने शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी से अपने अलग होने की औपचारिक घोषणा कर दी। इसके साथ ही उन्होंने एक नए राजनीतिक आंदोलन की शुरुआत का भी ऐलान किया, जिसे भविष्य में राजनीतिक दल का रूप दिया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका लक्ष्य 2031 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में भाग लेना है।
करीब दो घंटे के ऑनलाइन संबोधन में K Annamalai ने अपने राजनीतिक सफर, भाजपा में शामिल होने के कारणों, पार्टी छोड़ने के फैसले और भविष्य की राजनीतिक रणनीति पर विस्तार से चर्चा की। पूर्व IPS अधिकारी ने कहा कि यह फैसला अचानक नहीं लिया गया बल्कि कई महीनों से चल रही आंतरिक प्रक्रिया का परिणाम है। उन्होंने बताया कि पार्टी नेतृत्व को उनके निर्णय की जानकारी पहले ही दे दी गई थी।

‘कॉमन मैन पॉलिटिक्स’ पर रहेगा नए आंदोलन का फोकस
अपने संबोधन के दौरान K Annamalai ने बार-बार “कॉमन मैन पॉलिटिक्स” यानी आम आदमी की राजनीति की बात की। उन्होंने कहा कि भारतीय राजनीति को व्यक्तित्व आधारित राजनीति से आगे बढ़ना होगा और आम लोगों को केंद्र में रखना होगा।
उन्होंने कहा कि भविष्य में बनने वाली उनकी पार्टी में राजनीतिक पदों पर समय सीमा तय की जाएगी। उनका मानना है कि राजनीति कुछ चुनिंदा लोगों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि स्थायी नेता, स्थायी विधायक, स्थायी सांसद और स्थायी मंत्री जैसी राजनीतिक संस्कृति को बदलने की आवश्यकता है।
K Annamalai के अनुसार, नई राजनीतिक व्यवस्था में अधिक से अधिक युवाओं, पेशेवरों और आम नागरिकों को अवसर दिया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि उनकी पहल राजनीति को जनता के और करीब लाने का प्रयास करेगी।
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Rajinikanth के प्रस्ताव और BJP छोड़ने की वजह का खुलासा
अपने संबोधन में K Annamalai ने एक महत्वपूर्ण खुलासा भी किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2020 में भाजपा में शामिल होने से ठीक एक दिन पहले अभिनेता Rajinikanth ने उन्हें फोन कर अपने प्रस्तावित राजनीतिक अभियान से जुड़ने का निमंत्रण दिया था।
हालांकि, उन्होंने उस समय यह प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया क्योंकि वह पहले ही भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बी. एल. संतोष से पार्टी में शामिल होने का वादा कर चुके थे। उन्होंने कहा कि वह अपने वादे से पीछे नहीं हटना चाहते थे।
इसके बावजूद K Annamalai ने Rajinikanth के प्रति सम्मान व्यक्त किया और कहा कि इस घटना का उल्लेख केवल वर्षों से चल रही अटकलों को समाप्त करने के लिए किया गया है।
भाजपा छोड़ने के बावजूद उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा की और कहा कि उनके प्रति उनका सम्मान बरकरार रहेगा। हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि तमिलनाडु से जुड़े कई मुद्दों पर उनकी पार्टी नेतृत्व से लंबे समय से मतभेद थे।
उन्होंने दावा किया कि पिछले 18 महीनों से वह इन मुद्दों पर अपनी राय पार्टी के भीतर धैर्यपूर्वक रखते रहे। उन्होंने मेकेदातु बांध परियोजना, मीथेन और हाइड्रोकार्बन परियोजनाओं तथा भाषा नीति जैसे मुद्दों का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा तमिलनाडु के हितों को प्राथमिकता दी।

2031 चुनाव पर नजर, तमिलनाडु में बड़े बदलाव का दावा
K Annamalai ने अपने भाषण में तमिल पहचान और भारतीय राष्ट्रवाद के बीच संतुलन की बात दोहराई। उन्होंने कहा कि वह एक गौरवान्वित भारतीय हैं और साथ ही पारंपरिक तमिल पहचान पर गर्व करते हैं। उनके अनुसार, दोनों पहचानें एक-दूसरे के विरोध में नहीं बल्कि पूरक हैं।
उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति ए. पी. जे. अब्दुल कलाम का कई बार उल्लेख किया और राजनीति में तकनीकी विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और पेशेवरों की भागीदारी बढ़ाने की वकालत की। उन्होंने दुनिया भर में काम कर रहे तमिल पेशेवरों से राज्य के विकास में योगदान देने की अपील भी की।
K Annamalai ने स्वीकार किया कि नई राजनीतिक यात्रा आसान नहीं होगी। उन्होंने कहा कि उनके साथ जुड़े अधिकांश लोग मध्यम वर्गीय पृष्ठभूमि से आते हैं और उनके पास न तो किसी बड़े राजनीतिक परिवार का समर्थन है और न ही किसी बड़े कारोबारी समूह का। इसके बावजूद उन्होंने विश्वास जताया कि जनता के सहयोग से बड़ा बदलाव संभव है।
उन्होंने अपने समर्थकों से धैर्य बनाए रखने की अपील की और अन्य दलों से तत्काल जुड़ने या छोड़ने की जल्दबाजी न करने को कहा। उनका कहना था कि आंदोलन को धीरे-धीरे मजबूत किया जाएगा और सही समय आने पर इसे पूर्ण राजनीतिक दल का रूप दिया जाएगा। (SOURCE)
अपने संबोधन के अंत में K Annamalai ने कहा कि उनका अंतिम लक्ष्य तमिलनाडु को भारत के सबसे अग्रणी राज्यों में शामिल करना है। उनके इस ऐलान के साथ ही महीनों से चल रही अटकलों पर विराम लग गया है और अब राज्य की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत होती दिखाई दे रही है।





