हर साल बजट के दिन देश का आम नागरिक सबसे पहले एक ही सवाल पूछता है—इनकम टैक्स में क्या बदला? क्या इस बार भी सरकार ने कोई राहत दी? क्या सैलरी पाने वालों को कुछ अतिरिक्त छूट मिली? क्या कॉर्पोरेट टैक्स में बदलाव हुआ? Income Tax Budget 2026 को लेकर भी यही सवाल सबसे ज्यादा चर्चा में रहे।
इस बजट में इनकम टैक्स स्लैब में कोई बड़ा धमाकेदार बदलाव नहीं हुआ, लेकिन इसके बावजूद टैक्स सिस्टम को लेकर कई ऐसे फैसले लिए गए हैं, जिनका असर लंबे समय तक दिखेगा। खास बात यह है कि सरकार ने New Income Tax Act 2025 को पेश किया है, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा। यह कानून 1961 के पुराने इनकम टैक्स एक्ट की जगह लेगा, जिसमें अब तक 4000 से ज्यादा संशोधन हो चुके थे।

इस लेख में हम विस्तार से समझेंगे कि Income Tax Budget 2026 में आम नौकरीपेशा व्यक्ति को क्या मिला, क्या नहीं मिला, कॉर्पोरेट टैक्स पर सरकार की सोच क्या है, स्टार्टअप्स और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को लेकर क्या संकेत दिए गए हैं और फ्रीबीज बनाम विकास की बहस इस बजट में कैसे उभरकर सामने आई है। यह पूरा विश्लेषण टैक्स एक्सपर्ट और इनकम टैक्स ट्रिब्यूनल के सदस्य अश्विनी तनेजा की बातचीत पर आधारित है।
New Income Tax Act 2025 क्या है और क्यों लाया गया
सबसे बड़ा और बुनियादी बदलाव Income Tax Act 2025 के रूप में सामने आया है। अभी तक भारत में इनकम टैक्स 1961 के कानून के तहत चलता था, जिसमें हजारों बार संशोधन किए जा चुके थे। नतीजा यह हुआ कि कानून इतना जटिल हो गया था कि आम आदमी के लिए उसे समझना लगभग नामुमकिन था। सरकार ने अब इस पूरे ढांचे को सरल बनाने की कोशिश की है। नई व्यवस्था के तहत:
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Assessment Year और Previous Year की जटिल अवधारणा को खत्म कर दिया गया है
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अब सिर्फ एक ही टर्म होगी—Tax Year
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पहला Tax Year होगा 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2027
इसके अलावा कानून की भाषा को भी बदला गया है। पहले इनकम टैक्स कानून ब्रिटिश इंग्लिश और पैसिव वॉइस में लिखा हुआ था। अब उसे ज्यादा सरल, एक्टिव वॉइस और सीधे शब्दों में लिखा गया है, ताकि पढ़ना थोड़ा आसान हो सके। हालांकि यह कहना अभी भी मुश्किल है कि बिना CA या टैक्स एक्सपर्ट की मदद के कोई व्यक्ति पूरा कानून समझ पाएगा, लेकिन सरकार की मंशा साफ है कि टैक्स सिस्टम को ज्यादा यूजर-फ्रेंडली बनाया जाए।
Income Tax Budget 2026 में Salaried Class को क्या मिला
अब आते हैं उस सवाल पर, जिसका इंतजार हर नौकरीपेशा व्यक्ति को था—क्या इस बार कोई नई छूट या रिबेट मिली? पिछले साल सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए सेक्शन 87A के तहत ₹60,000 की रिबेट दी थी, जिससे:
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₹12 लाख तक की इनकम पर कोई टैक्स नहीं लगता था
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सैलरीड एम्प्लॉई के लिए ₹75,000 की स्टैंडर्ड डिडक्शन जोड़ने के बाद यह सीमा ₹12.75 लाख तक पहुंच गई थी
यह एक बड़ा कदम था और इसकी काफी तारीफ भी हुई थी। इसलिए इस बार उम्मीद थी कि या तो यह सीमा और बढ़ेगी या फिर सैलरीड क्लास को कोई अतिरिक्त राहत दी जाएगी। लेकिन Income Tax Budget 2026 में ऐसा नहीं हुआ। सरकार ने न तो टैक्स फ्री लिमिट बढ़ाई और न ही स्टैंडर्ड डिडक्शन में कोई इजाफा किया। वजह यह मानी जा रही है कि सरकार इस वक्त नए टैक्स कानून को लागू करने में ज्यादा फोकस कर रही है।

Salaried Employees vs Business Class: असमानता क्यों बनी हुई है
टैक्स एक्सपर्ट्स का मानना है कि Income Tax Budget 2026 में एक बड़ा मौका चूक गया। आज भी सैलरी पाने वालों पर टैक्स का बोझ बिजनेस करने वालों के मुकाबले ज्यादा है। एक सैलरीड व्यक्ति:
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ऑफिस आने-जाने के लिए कार इस्तेमाल करता है
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फ्यूल, रिपेयर और मेंटेनेंस पर खर्च करता है
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फोन, इंटरनेट, कपड़े और बाहर खाने जैसे खर्चे करता है
लेकिन वह इन खर्चों को टैक्स में क्लेम नहीं कर सकता। वहीं एक बिजनेस करने वाला व्यक्ति:
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कार को बिजनेस एसेट दिखाकर डेप्रिसिएशन ले सकता है
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फ्यूल, मेंटेनेंस और यहां तक कि इलेक्ट्रिक व्हीकल पर 40% तक डेप्रिसिएशन क्लेम कर सकता है
इसके अलावा सैलरीड क्लास का टैक्स TDS के रूप में पहले ही कट जाता है, जबकि बिजनेस क्लास को टैक्स पेमेंट में ज्यादा फ्लेक्सिबिलिटी मिलती है। इसी वजह से लंबे समय से यह मांग उठ रही है कि सैलरीड क्लास को या तो अतिरिक्त डिडक्शन दी जाए या HRA जैसे बेनिफिट्स को वापस लाया जाए, लेकिन इस बजट में ऐसा कुछ नहीं हुआ।
Corporate Tax Budget 2026: सरकार की दुविधा
इनकम टैक्स के बाद दूसरा बड़ा मुद्दा होता है Corporate Tax Budget 2026। यहां सरकार हमेशा एक दुविधा में रहती है। अगर कॉर्पोरेट को राहत देती है तो आरोप लगता है कि यह पूंजीपतियों की सरकार है, और अगर राहत नहीं देती तो निवेश और मैन्युफैक्चरिंग पर असर पड़ता है।
इस समय भारत कई बड़े Free Trade Agreements (FTA) कर रहा है, जिन्हें “मदर ऑफ ऑल डील्स” भी कहा जा रहा है। इसका मतलब यह है कि अब विदेशी मैन्युफैक्चरर्स भारत आ सकते हैं और भारतीय कंपनियां बाहर अपने प्रोडक्ट्स बेच सकती हैं। यह एक Golden Opportunity है, लेकिन साथ ही एक Double-Edged Sword भी है। अगर भारत में मैन्युफैक्चरिंग मजबूत नहीं हुई, तो विदेशी कंपनियां यहां बाजार कब्जा कर लेंगी। इसी वजह से टैक्स एक्सपर्ट्स का मानना है कि:
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Corporate Tax को और इंसेंटिव-ड्रिवन बनाया जाना चाहिए
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R&D सेंटर्स, मैन्युफैक्चरिंग और Data Centres को ज्यादा सपोर्ट मिलना चाहिए
इस बजट में Data Centres को टैक्स हॉलीडे देना एक पॉजिटिव कदम माना जा रहा है, लेकिन LLPs जैसी नॉन-कॉर्पोरेट एंटिटीज को अभी भी अपेक्षित सपोर्ट नहीं मिला।
Foreign Investment पर सरकार का फोकस क्यों है
सरकार का मानना है कि GDP का साइज बढ़ाने के लिए सिर्फ घरेलू संसाधन काफी नहीं हैं। दुनिया के बड़े देश, चाहे अमेरिका हो या चीन, सभी ने External Investment के जरिए ही अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत किया है। सरल शब्दों में कहें तो सरकार “पानी बांटने” की बजाय “गंगोत्री को बड़ा” करना चाहती है, ताकि टैक्स कलेक्शन और निवेश दोनों बढ़ें। इसी वजह से Foreign Investment को आकर्षित करने पर इतना जोर दिया जा रहा है।

Startups, Youth और Education पर नजर
Income Tax Budget 2026 में स्टार्टअप्स को लेकर कोई बड़ा टैक्स बम नहीं फोड़ा गया, लेकिन सरकार का दीर्घकालिक फोकस साफ है—Education और Skill Development। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर 2037 तक भारत का कोई भी युवा अशिक्षित न रहे, तो 2047 तक विकसित भारत का सपना अपने आप साकार हो सकता है। यूनिवर्सिटी टाउनशिप, स्किल-बेस्ड एजुकेशन और युवाओं को मेनस्ट्रीम इकोनॉमी से जोड़ना ही असली समाधान है।
Freebies बनाम Development: Economic Survey की चेतावनी
Economic Survey में साफ तौर पर कहा गया है कि फ्रीबीज का बढ़ता चलन राज्यों की अर्थव्यवस्था के लिए खतरा बनता जा रहा है। मुफ्त योजनाएं शॉर्ट टर्म में राहत देती हैं, लेकिन लॉन्ग टर्म में नागरिकों को सशक्त नहीं बनातीं। टैक्स एक्सपर्ट्स का मानना है कि:
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नागरिकों को फ्रीबीज से नहीं, स्किल और रोजगार से सशक्त किया जाना चाहिए
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लगातार फ्रीबीज से सरकारी खजाने पर दबाव बढ़ता है
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इसका सीधा असर शिक्षा, स्वास्थ्य और इंफ्रास्ट्रक्चर पर पड़ता है
Income Tax Budget 2026 का निष्कर्ष
Income Tax Budget 2026 कोई पॉपुलिस्ट बजट नहीं है। इसमें सैलरीड क्लास को सीधी राहत भले न मिली हो, लेकिन टैक्स सिस्टम को सरल और भविष्य के लिए तैयार करने की कोशिश जरूर दिखती है। New Income Tax Act 2025, लिटिगेशन कम करने के कदम, डिजिटल टैक्स एडमिनिस्ट्रेशन और फॉरेन इन्वेस्टमेंट पर फोकस—ये सब संकेत देते हैं कि सरकार लॉन्ग टर्म गेम खेल रही है। अब देखना यह होगा कि आने वाले सालों में सरकार सैलरीड क्लास, स्टार्टअप्स और मिडिल क्लास के लिए कितनी ठोस राहत लेकर आती है।






