E20 Petrol Survey: 66% Vehicle Owners ने बताया Mileage Drop, 31% चाहते हैं E0/E10 Fuel Option
भारत में E20 पेट्रोल के अनिवार्य उपयोग के बाद एक नए LocalCircles Survey ने करोड़ों पेट्रोल वाहन मालिकों की चिंताओं को उजागर किया है। 316 जिलों के 22,567 वाहन मालिकों पर किए गए इस सर्वे में 2023 से पहले बने वाहनों के अधिकांश मालिकों ने माइलेज कम होने और मेंटेनेंस खर्च बढ़ने की शिकायत की।
66% लोगों ने बताया 10% से ज्यादा माइलेज कम हुआ
E20 Petrol Survey Shock:सर्वे के मुताबिक, 2023 से पहले बने पेट्रोल वाहनों के 66% मालिकों ने कहा कि E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने के बाद उनके वाहन का माइलेज 10% से अधिक घट गया है।
इसके अलावा 45% लोगों ने बताया कि उनके वाहनों में घिसावट (Wear & Tear) और मरम्मत की जरूरत पहले की तुलना में काफी बढ़ गई है।

सरकार के E20 Rollout पर क्या बोले लोग?
सर्वे में शामिल 53% लोगों ने सड़क परिवहन और पेट्रोलियम मंत्रालय द्वारा E20 पेट्रोल लागू करने के तरीके को “Disastrous” या “Ineffective” बताया।
- 42% ने इसे “Disastrous” कहा।
- केवल 13% लोगों ने इसे सकारात्मक बताया।
31% लोग चाहते हैं E0 या E10 Petrol
E20 Petrol Survey Shock:सर्वे का एक बड़ा निष्कर्ष यह भी रहा कि पुराने वाहन मालिक पूरी तरह E20 का विरोध नहीं कर रहे हैं।
करीब 31% उत्तरदाताओं ने कहा कि यदि उन्हें विकल्प मिले तो वे अतिरिक्त कीमत देकर भी E0 या E10 पेट्रोल खरीदना पसंद करेंगे, क्योंकि उनके वाहन इन्हीं ईंधन मिश्रणों के लिए डिजाइन किए गए थे।
सरकार का क्या कहना है?
केंद्र सरकार लगातार कह रही है कि E20 Ethanol Blending Programme से कई फायदे होंगे—
- कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होगी।
- कार्बन उत्सर्जन घटेगा।
- किसानों की आय बढ़ेगी।
- भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी।
सरकार ने 1 अप्रैल 2026 से देशभर में बिकने वाले E20 पेट्रोल के लिए Research Octane Number (RON) 95 अनिवार्य कर दिया है।
साथ ही, Bureau of Indian Standards (BIS) ने E22 से E30 तक के फ्यूल स्टैंडर्ड भी अधिसूचित कर दिए हैं, हालांकि फिलहाल सरकार का मुख्य फोकस E20 पर ही बना हुआ है।
पुराने वाहन मालिकों की सबसे बड़ी चिंता
सर्वे में बताया गया कि अप्रैल 2023 से पहले बने अधिकांश पेट्रोल वाहन E10 Fuel के हिसाब से डिजाइन किए गए थे।
जबकि अप्रैल 2025 के बाद बने नए वाहन ही पूरी तरह E20 Compatible माने जाते हैं।
ऐसे में करोड़ों पुराने वाहन मालिकों को माइलेज कम होने और ईंधन प्रणाली (Fuel System) के कुछ हिस्सों को बदलने जैसी अतिरिक्त लागत का सामना करना पड़ सकता है।

सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंचा मामला
जुलाई 2026 में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि E20 कार्यक्रम के दीर्घकालिक प्रभावों की स्पष्ट तस्वीर 2027 तक सामने आएगी। सरकार ने अदालत में इस योजना का बचाव करते हुए कहा कि इससे देश को ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरणीय लाभ मिलेंगे।
LocalCircles के इस सर्वे में 22,567 पेट्रोल वाहन मालिकों ने हिस्सा लिया।
- कुल 316 जिलों से प्रतिक्रियाएं मिलीं।
- 69% पुरुष और 31% महिलाएं शामिल थीं।
- 46% उत्तरदाता Tier-1, 32% Tier-2 और 22% Tier-3, Tier-4, Tier-5 तथा ग्रामीण क्षेत्रों से थे।
- सभी प्रतिभागी LocalCircles प्लेटफॉर्म के सत्यापित (Verified) यूजर्स थे।(source)




