June 5, 2026 11:24 PM

Delhi Hotel Fire: इलाज की उम्मीद लेकर आए विदेशी नागरिकों की मौत, परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़

Delhi Hotel Fire , होटल में लगी भीषण आग ने कई परिवारों की जिंदगी बदल दी। इलाज के लिए भारत आए विदेशी नागरिक भी हादसे का शिकार हो गए।

EDITED BY: Rudra Pratap Singh

UPDATED: Friday, June 5, 2026

Delhi Hotel Fire: इलाज की उम्मीद लेकर आए विदेशी नागरिकों की मौत, परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़

Delhi Hotel Fire : दक्षिण दिल्ली के हौज रानी क्षेत्र स्थित फ्लोरिश स्टेज़ बीएंडबी होटल में बुधवार को लगी भीषण आग ने 21 लोगों की जान ले ली। इस दर्दनाक हादसे में मरने वालों में 12 विदेशी नागरिक भी शामिल थे, जो या तो भारत में चिकित्सा उपचार के लिए आए थे या अपने परिजनों के इलाज के दौरान उनके साथ रह रहे थे।

हादसे के बाद दिल्ली के एम्स ट्रॉमा सेंटर की मोर्चरी के बाहर कई परिवार अपने प्रियजनों के शवों का इंतजार करते दिखाई दिए। हर चेहरे पर दर्द, बेबसी और सदमे की कहानी साफ नजर आ रही थी।

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MARIA FROM LIBERIA: lost her aunt

इराकी परिवार की उम्मीदें एक पल में बिखर गईं

40 वर्षीय हबीब आबिद अपने बहनोई अली आमेर मोसा के शव का इंतजार करते हुए फूट-फूटकर रो पड़े। हबीब हाल ही में अपने 18 वर्षीय बेटे हैदर के साथ इराक से दिल्ली आए थे। हैदर ब्रेन ट्यूमर से पीड़ित है और उसके इलाज के लिए परिवार ने साकेत स्थित अस्पताल में अपॉइंटमेंट लिया था।

हबीब ने बताया कि बेटे को अस्पताल में भर्ती कराने के बाद उन्होंने होटल की पांचवीं मंजिल पर कमरा लिया था। बुधवार सुबह अचानक होटल में चीख-पुकार सुनाई दी। जब तक उन्हें आग लगने का एहसास हुआ, तब तक लपटें तेजी से फैल चुकी थीं।

हबीब के अनुसार, बाहर मौजूद कुछ लोगों ने कमरे की खिड़की तोड़कर सीढ़ी लगाई, जिसकी मदद से वह बाहर निकलने में सफल रहे। लेकिन उनके बहनोई अली धुएं से भरे कमरे से निकलकर सीढ़ियों की ओर भागे और फिर वापस नहीं लौट सके।

इस दौरान उनका बेटा अस्पताल में सर्जरी से गुजर रहा था। एक ओर बेटे की जिंदगी बचाने की जंग चल रही थी, वहीं दूसरी ओर परिवार ने अपने एक सदस्य को हमेशा के लिए खो दिया।

Delhi Hotel Fire: इलाज की उम्मीद लेकर आए विदेशी नागरिकों की मौत, परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़

दो साल बाद मिलने की खुशी मातम में बदली

एम्स मोर्चरी के बाहर एक और मार्मिक दृश्य देखने को मिला। लाइबेरिया की रहने वाली मारिया अपनी मौसी जंजेरोलैंड की तलाश में पहुंचीं। मारिया पिछले दो वर्षों से भारत में पढ़ाई कर रही हैं और उन्होंने बताया कि वह लंबे समय बाद अपने देश के किसी करीबी रिश्तेदार से मिलने वाली थीं।

मारिया के अनुसार, करीब एक सप्ताह पहले उनकी मौसी अपने पति के इलाज के लिए दिल्ली आई थीं। उन्होंने फोन कर अपने आने की जानकारी दी थी, जिससे वह बेहद खुश थीं। दो साल बाद परिवार के किसी सदस्य से मिलने की उम्मीद ने उन्हें उत्साहित कर दिया था।

लेकिन यह खुशी ज्यादा समय तक नहीं टिक सकी। होटल में लगी आग में उनकी मौसी की मौत हो गई। मोर्चरी के बाहर खड़ी मारिया हाथ में अपनी मौसी की पहचान संबंधी तस्वीर लिए अधिकारियों से उनके शव के बारे में जानकारी मांगती रहीं।

उन्होंने बताया कि उनकी मौसी के पति अस्पताल में भर्ती हैं और उन्हें अभी तक यह भी नहीं पता कि उनकी पत्नी अब इस दुनिया में नहीं रहीं।

हादसे ने उठाए सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

यह हादसा केवल एक आगजनी की घटना नहीं है, बल्कि उन लोगों की त्रासदी भी है जो बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं और नई उम्मीदों के साथ भारत आए थे। विदेशी नागरिकों की बड़ी संख्या में मौत ने होटलों की सुरक्षा व्यवस्था, अग्निशमन मानकों और आपातकालीन निकासी प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जांच एजेंसियां आग लगने के कारणों और सुरक्षा मानकों में संभावित चूक की जांच कर रही हैं। वहीं पीड़ित परिवारों के लिए यह घटना ऐसी क्षति बन गई है जिसकी भरपाई संभव नहीं है।

इलाज, उम्मीद और बेहतर भविष्य की तलाश में दिल्ली पहुंचे कई परिवारों के सपने इस हादसे में हमेशा के लिए खत्म हो गए। अब उनके पास केवल यादें, सवाल और अपनों को खोने का गहरा दर्द बचा है।(source)

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