July 26, 2026 2:34 AM

सोनम वांगचुक भूख हड़ताल खत्म करने पर बोले- ’26 दिन भूखा रहकर सौदा नहीं किया’

सोनम वांगचुक भूख हड़ताल समाप्त करने के बाद लगाए जा रहे समझौते के आरोपों पर पहली बार खुलकर बोले। उन्होंने कहा कि 26 दिन तक भूखा रहकर कोई सौदा नहीं किया जाता और उन्होंने केवल लिखित आश्वासन मिलने के बाद ही अपना अनशन समाप्त किया।

EDITED BY: Rudra Pratap Singh

UPDATED: Sunday, July 26, 2026

सोनम वांगचुक भूख हड़ताल खत्म करने पर बोले- '26 दिन भूखा रहकर सौदा नहीं किया'

26 दिन की भूख हड़ताल खत्म करने के बाद दी सफाई

सोनम वांगचुक भूख हड़ताल: सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक ने अपनी 26 दिन लंबी भूख हड़ताल समाप्त करने के बाद उन आरोपों पर पहली बार खुलकर प्रतिक्रिया दी है, जिनमें कहा जा रहा था कि उन्होंने केंद्र सरकार के साथ किसी तरह का समझौता किया है।

एक भावुक वीडियो संदेश में वांगचुक ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने कोई निजी सौदा नहीं किया, बल्कि सरकार से प्रमुख मांगों पर लिखित आश्वासन मिलने के बाद ही अपना अनशन समाप्त करने का फैसला लिया।


‘अगर सौदा करना होता तो 26 दिन भूखा क्यों रहता?’

सोनम वांगचुक ने अपने आलोचकों से सवाल करते हुए कहा कि अगर उन्हें सरकार से कोई समझौता ही करना होता तो वह 26 दिनों तक भूख हड़ताल पर क्यों बैठे रहते।

उन्होंने कहा कि यदि किसी प्रकार की डील करनी होती तो वह दिल्ली की गर्मी में सड़क पर बैठकर अनशन करने के बजाय किसी एयर कंडीशंड कमरे में बैठकर भी ऐसा कर सकते थे।

वांगचुक ने कहा कि इतने लंबे अनशन के बाद भी उनकी नीयत पर सवाल उठाना उनके त्याग और संघर्ष का अपमान है।

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‘क्या अब मुझे चरित्र प्रमाण पत्र भी देना होगा?’

सोनम वांगचुक भूख हड़ताल वीडियो संदेश में सोनम वांगचुक ने कहा कि सुबह से लगातार लोग उन्हें फोन कर रहे हैं और सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों की जानकारी दे रहे हैं।

उन्होंने भावुक होते हुए पूछा कि क्या अब उन्हें यह साबित करने के लिए चरित्र प्रमाण पत्र भी देना पड़ेगा कि उनका अनशन पूरी ईमानदारी से किया गया था।

उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले उनका पूरा 22 मिनट का वीडियो जरूर देखें।

सोनम वांगचुक भूख हड़ताल


लिखित आश्वासन मिलने के बाद ही खत्म किया अनशन

सोनम वांगचुक भूख हड़ताल: सोनम वांगचुक ने बताया कि अनशन समाप्त करने का फैसला उन्होंने केवल तब लिया जब केंद्र सरकार ने उनकी प्रमुख मांगों पर लिखित आश्वासन दिया।

उनके मुताबिक आधी रात के करीब उन्हें जानकारी दी गई कि केंद्रीय मंत्रियों ने यह भरोसा लिखित रूप में देने पर सहमति जताई है।

उन्होंने कहा कि उस समय उन्हें आशंका थी कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई हो सकती है। इसलिए उन्होंने स्थिति को शांत करने और छात्रों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए अपना अनशन समाप्त किया।

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‘छात्रों की सुरक्षा मेरे लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता थी’

वांगचुक ने कहा कि उनका सबसे बड़ा उद्देश्य आंदोलन में शामिल छात्रों और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था।

उन्होंने सरकार से यह लिखित आश्वासन भी मांगा था कि आंदोलन में शामिल किसी भी शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारी के खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं किया जाएगा।

उनका कहना है कि आंदोलन किसी एक व्यक्ति का नहीं बल्कि शिक्षा सुधार और जवाबदेही की लड़ाई है।


अस्पताल में ‘कैदी जैसा व्यवहार’ करने का आरोप

सोनम वांगचुक भूख हड़ताल : सोनम वांगचुक ने यह भी आरोप लगाया कि जंतर-मंतर से हटाकर सफदरजंग अस्पताल ले जाने के बाद उनके साथ एक कैदी जैसा व्यवहार किया गया।

उन्होंने दावा किया कि उन्हें स्वतंत्र रूप से आने-जाने की अनुमति नहीं थी, समर्थकों से मिलने नहीं दिया गया और उनका मोबाइल फोन तथा लैपटॉप भी इस्तेमाल नहीं करने दिया गया।

वांगचुक ने कहा कि वह अपना अनशन समर्थकों और सांसदों की मौजूदगी में समाप्त करना चाहते थे, लेकिन परिस्थितियों के कारण ऐसा संभव नहीं हो सका।


कांग्रेस सांसद के आरोपों के बाद दी सफाई

यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने आरोप लगाया कि सोनम वांगचुक ने सरकार के साथ निजी समझौता कर लिया है। उन्होंने उनकी तुलना समाजसेवी अन्ना हजारे से भी की थी।

इन आरोपों के बाद राजनीतिक बहस तेज हो गई। बीजेपी नेताओं ने वांगचुक का बचाव किया और कांग्रेस पर छात्र आंदोलन को बदनाम करने का आरोप लगाया।


सरकार ने किन मांगों पर दिया आश्वासन?

सोनम वांगचुक के अनुसार केंद्र सरकार ने उन्हें लिखित रूप में कई महत्वपूर्ण आश्वासन दिए हैं, जिनमें शामिल हैं—

  • शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं होगी।
  • संसद में परीक्षा सुधारों पर चर्चा कराई जाएगी।
  • कथित NEET विवाद से जुड़े आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने के प्रस्ताव पर सकारात्मक विचार किया जाएगा।

इन्हीं आश्वासनों के बाद उन्होंने अपना 26 दिन लंबा अनशन समाप्त किया।


‘आंदोलन खत्म नहीं हुआ, यह नई शुरुआत है’

अनशन समाप्त करने के बाद भी सोनम वांगचुक ने स्पष्ट किया कि शिक्षा सुधार और जवाबदेही की लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है।

उन्होंने कहा कि उनका भूख हड़ताल समाप्त करना आंदोलन का अंत नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है। आने वाले समय में भी छात्रों के अधिकार और शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए उनकी आवाज उठती रहेगी।(SOURCE)

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