July 22, 2026 8:09 PM

पैलेट गन या झूठ? CJP प्रदर्शनकारी के जख्मों ने खोली दिल्ली पुलिस के दावों की पोल!

Pellet Gun Protest विवाद ने तूल पकड़ा! दिल्ली पुलिस के इनकार के बावजूद लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज ने पुष्टि की कि घायल प्रदर्शनकारी के जख्म पैलेट गन से ही लगे हैं। जानिए पूरा सच।

EDITED BY: Vishal Yadav

UPDATED: Wednesday, July 22, 2026

Pellet Gun Protest

देश में इन दिनों Pellet Gun Protest से जुड़ा एक नया विवाद गरमाया हुआ है, जिसमें दिल्ली पुलिस के दावों और मेडिकल रिपोर्ट के बीच सीधा टकराव सामने आ रहा है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन के दौरान एक प्रदर्शनकारी के गंभीर रूप से घायल होने की घटना ने पूरे मामले को और उलझा दिया है।

पुलिस का दावा और वायरल वीडियो में क्या फर्क है?

दिल्ली पुलिस ने साफ तौर पर दावा किया है कि Pellet Gun Protest के दौरान पैलेट गन का इस्तेमाल नहीं किया गया। लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में एक प्रदर्शनकारी के शरीर पर वैसे ही जख्म नजर आए, जैसे आमतौर पर पैलेट गन के इस्तेमाल से होते हैं। द हिंदू से जुड़ी पत्रकार विजेता सिंह और अर्चना भुटानी की रिपोर्ट के मुताबिक, घायल व्यक्ति का इलाज लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में चल रहा है, और मेडिकल कॉलेज ने खुद पुष्टि की है कि पीड़ित को यह चोट पैलेट गन से ही लगी है।

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Pellet Gun Protest

रिपोर्ट में घायल व्यक्ति की पहचान शेख इरशाद मंसूरी के रूप में हुई है, जिनकी उम्र करीब 25 साल बताई जा रही है। इरशाद के एक दोस्त ने द हिंदू से बातचीत में बताया कि उन्हें कनॉट प्लेस के पालिका बाजार के पास एक रैपिड एक्शन फोर्स के जवान ने मारा था। इस वीडियो को शेयर करते हुए कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता सौरभ दास ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस ने शांति से प्रदर्शन कर रहे प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन का इस्तेमाल किया।

इसके जवाब में दिल्ली पुलिस ने इस दावे को पूरी तरह फर्जी और भ्रामक करार दिया। पुलिस ने अपने बयान में लोगों से अपील की कि बिना पुष्टि किए कोई भी जानकारी या अफवाह न फैलाएं, और किसी भी खबर को आगे भेजने से पहले उसके आधिकारिक स्रोत की जांच जरूर कर लें।

ग्राउंड रिपोर्ट और डॉक्टरों की राय क्या कहती है?

इस पूरे विवाद के बीच मीडिया टीम खुद घायल प्रदर्शनकारियों से मिलने अस्पताल पहुंची। टीम ने आरएमएल अस्पताल में डॉक्टरों को वह वायरल वीडियो दिखाया और उनसे सीधा सवाल पूछा कि यह चोट किस चीज से लगी है। डॉक्टरों ने स्पष्ट रूप से बताया कि यह पैलेट गन से लगी चोट है। इस पर मीडिया से बातचीत करने वालों ने दिल्ली पुलिस पर सवाल उठाते हुए कहा कि पुलिस को झूठ बोलने पर शर्म आनी चाहिए, क्योंकि इससे पहले भी पुलिस ने दावा किया था कि उन्होंने न तो लाठीचार्ज किया और न ही किसी तरह की हिंसा या फोर्स का इस्तेमाल किया, जबकि इंटरनेट पर पुलिस द्वारा लोगों को पीटने के तमाम वीडियो पहले से मौजूद थे, जिनमें कुछ लोगों का सिर तक फटा हुआ दिखा।

Pellet Gun Protest से जुड़ी एक आसान जानकारी भी जरूरी है। पैलेट गन एक ऐसी बंदूक होती है जो फायर करने के लिए लेड और स्टील जैसे छोटे-छोटे सब्सटेंस का इस्तेमाल करती है। इसके गोल छर्रे तेज रफ्तार से दागे जाते हैं, और इसे आमतौर पर गैर-घातक हथियार माना जाता है। लेकिन अगर बहुत नजदीक से किसी को हिट किया जाए तो इससे गंभीर चोट लग सकती है। इसका इस्तेमाल ज्यादातर दंगों में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है, लेकिन द हिंदू की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस बार इसका इस्तेमाल शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे लोगों पर हुआ।

Pellet Gun Protest

शॉक बैटन और कील लगे डंडों के नए आरोप

Pellet Gun Protest के इस विवाद के बीच 21 जुलाई को एक और वीडियो सामने आया, जिसमें एक महिला प्रदर्शनकारी पर शॉक बैटन के इस्तेमाल का दावा किया गया। शॉक बैटन एक डंडे जैसा उपकरण होता है, जो छूने पर बिजली का झटका देता है। दावा किया जा रहा है कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने इसका भी इस्तेमाल किया।

ग्राउंड पर मौजूद मीडिया टीम ने कुछ प्रदर्शनकारी स्टूडेंट्स से बातचीत की, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने कील लगे डंडों का भी इस्तेमाल किया है। सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो मौजूद हैं जिनमें पुलिसकर्मियों के हाथों में शॉक बैटन और कील लगे डंडे नजर आ रहे हैं। इसके अलावा एक और वीडियो में नॉर्थ ईस्ट दिल्ली के एडिशनल डीसीपी संदीप लांबा एक महिला को थप्पड़ मारते और धक्का देते हुए दिखाई दिए। एक शिकायतकर्ता का आरोप है कि यही अधिकारी इससे पहले भी एक अन्य महिला पर हमला कर चुके हैं और उनके बाल खींचे थे।

आगे क्या हैं प्रदर्शनकारियों की मांगें?

बता दें कि पेपर लीक के विरोध में शुरू हुआ CJP और स्टूडेंट्स का प्रदर्शन अभी भी जारी है, और Pellet Gun Protest जैसे आरोपों ने इस आंदोलन को और तेज कर दिया है। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें अब भी वही हैं—शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा दें, और प्रदर्शन के दौरान जान गंवाने वाले स्टूडेंट्स के परिजनों को एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए।

फिलहाल दिल्ली पुलिस और मेडिकल रिपोर्ट के बीच का यह विरोधाभास सुलझा नहीं है। एक तरफ पुलिस पैलेट गन के इस्तेमाल से साफ इनकार कर रही है, तो दूसरी तरफ अस्पताल के डॉक्टर और मेडिकल कॉलेज इसकी पुष्टि कर रहे हैं। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि आने वाले दिनों में इस मामले की स्वतंत्र जांच होती है या नहीं, और क्या पुलिस पर लगे इन गंभीर आरोपों पर कोई ठोस कार्रवाई सामने आती है।

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