देश में इन दिनों Cockroach Party Protest को लेकर सियासी और कानूनी हलकों में जबरदस्त चर्चा है। 20 तारीख को कॉकरोच जनता पार्टी की ओर से बुलाए गए संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हिंसक झड़प हो गई थी, जिसके बाद मामला सीधे सुप्रीम कोर्ट तक जा पहुंचा। लेकिन अदालत के रुख ने सबको चौंका दिया।
संसद मार्च के दौरान क्या हुआ था?

20 तारीख को हुए इस संसद मार्च में पुलिस की ओर से लाठीचार्ज किया गया और टियर गैस का इस्तेमाल हुआ। इस दौरान की कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुईं, जिनमें प्रदर्शनकारियों स्टूडेंट्स की पिटाई होते हुए दिखाई दी। कुछ वीडियो में किसी का सिर फटा हुआ नजर आया तो किसी के पांव में गंभीर चोट लगी। इतना ही नहीं, मौके पर मौजूद मीडियाकर्मी भी इस दौरान मारपीट का शिकार हुए।
इसके अलावा एक तस्वीर भी सामने आई जिसमें कुछ प्रदर्शनकारी पुलिस पर पत्थर फेंकते नजर आए, और कई पुलिसकर्मियों को घेरकर पीटे जाने की भी खबरें आईं। यानी यह टकराव दोनों तरफ से हुआ, लेकिन स्टूडेंट्स पर हुई कथित पुलिस बर्बरता के वीडियो ज्यादा सुर्खियों में रहे। इन्हीं घटनाओं के बाद Cockroach Party Protest से जुड़ी पुलिस कार्रवाई को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई, जिसमें मांग की गई कि मामले में तत्काल हस्तक्षेप किया जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने वीडियो देखने से क्यों किया इनकार?
22 जुलाई को इस याचिका पर सुनवाई हुई। याचिका का मुख्य मुद्दा यही था कि दिल्ली पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों पर किए गए लाठीचार्ज पर सुप्रीम कोर्ट दखल दे। लेकिन भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने इस मामले पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि हमें वीडियो देखने में कोई दिलचस्पी नहीं है, हमारे पास उन्हें देखने का वक्त नहीं है।
इंडिया टुडे से जुड़ी पत्रकार अनीषा माथुरी की रिपोर्ट के मुताबिक, याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट में दो-तीन बार वे वीडियो दिखाने की कोशिश की, जिनमें पुलिस लाठी चलाती हुई दिख रही थी। लेकिन CJI ने हर बार साफ इनकार करते हुए कहा कि उनके पास समय नहीं है, और वकील से यह भी कहा कि वे कोर्ट का और अपना, दोनों का समय बर्बाद न करें। जब वकील ने अपनी बात आगे बढ़ाने की कोशिश की, तो CJI ने बीच में ही उन्हें रोकते हुए कहा “थैंक यू वेरी मच”, और इसी के साथ सुनवाई खत्म हो गई।
गौरतलब है कि इससे एक दिन पहले दिल्ली हाईकोर्ट में भी यही मामला तत्काल सुनवाई के लिए पहुंचा था, जहां अदालत ने साफ कह दिया था कि इस मामले में कोर्ट को न घसीटा जाए। यानी दोनों ही अदालतों ने Cockroach Party Protest से जुड़े इस विवाद में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया जरूर दी। एसोसिएशन ने कहा कि स्टूडेंट्स पर हुए लाठीचार्ज की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच होनी चाहिए, और इस घटना की कड़ी निंदा भी की।

कॉकरोच जनता पार्टी की शुरुआत कैसे हुई?
Cockroach Party Protest को समझने के लिए इसकी पृष्ठभूमि जानना जरूरी है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का कनेक्शन खुद न्यायपालिका से जुड़ा हुआ है। दरअसल 15 मई को CJI सूर्यकांत एक केस की सुनवाई कर रहे थे, जिस दौरान उन्होंने बेरोजगार युवाओं की तुलना कॉकरोच से कर दी थी। उनका कहना था कि जिन युवाओं को नौकरी और रोजगार नहीं मिलता, वे कॉकरोच की तरह इधर-उधर भटकते हैं, कुछ मीडिया में चले जाते हैं तो कुछ आरटीआई एक्टिविस्ट बन जाते हैं।
इस बयान के बाद ही “कॉकरोच जनता पार्टी” की शुरुआत हुई, जो शुरुआत में एक व्यंग्यात्मक (सेटायरिकल) पेज के तौर पर सामने आई थी, न कि किसी राजनीतिक पार्टी के रूप में। हालांकि आज भी यह आधिकारिक तौर पर कोई राजनीतिक पार्टी नहीं है, लेकिन बीते ढाई महीनों में इसकी लोकप्रियता में जबरदस्त उछाल आया है। शुरुआत में कुछ ही फॉलोअर्स से आगे बढ़ते हुए यह पेज देखते ही देखते बीजेपी जैसी सबसे बड़ी फॉलोइंग वाली पार्टी को भी पीछे छोड़ चुका है, और अब इसके सब्सक्राइबर्स की संख्या करीब 22-23 मिलियन के आसपास पहुंच चुकी है।
CJI सूर्यकांत ने अपने बयान के अगले दिन ही मीडिया से बात करते हुए सफाई दी थी कि उनके शब्दों को गलत तरीके से पेश किया गया, और उन्होंने यह टिप्पणी देश के बेरोजगार युवाओं के लिए नहीं बल्कि कुछ वकीलों के लिए की थी। इसके अलावा कुछ पूर्व जस्टिस भी सामने आए और उन्होंने भी यही कहा कि CJI के बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है।
जनता की प्रतिक्रिया और आगे क्या?
दिलचस्प बात यह है कि CJI की इस टिप्पणी को Cockroach Party Protest से जुड़े लोगोंने नकारात्मक रूप में नहीं, बल्कि गर्व के साथ अपनाया। जंतर-मंतर पर मौजूद इस पार्टी से जुड़े समर्थक अब खुद को गर्व से “कॉकरोच” कहलाना पसंद करते हैं, और इसे एक पहचान (टैग) की तरह अपना लिया है।
फिलहाल स्थिति यह है कि स्टूडेंट्स पर हुई कथित पुलिस बर्बरता से जुड़ी याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार कर दिया है, और दिल्ली हाईकोर्ट पहले ही हाथ खड़े कर चुका है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या Cockroach Party Protest से जुड़े इस मामले में आगे कोई अन्य कानूनी रास्ता अपनाया जाता है, या सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की मांग पर कोई स्वतंत्र जांच बिठाई जाती है।





