देशभर के करोड़ों वाहन चालकों के लिए आने वाले समय में ड्राइविंग से जुड़े नियम बदल सकते हैं। Driving Licence Rules में संशोधन के लिए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने कई अहम प्रस्ताव तैयार किए हैं। इन प्रस्तावों में ड्राइविंग लाइसेंस की वैधता बढ़ाने, प्रदूषण जांच (PUC) की समयसीमा बदलने, दूसरे राज्य में वाहन रखने के नियम आसान बनाने और बार-बार ट्रैफिक नियम तोड़ने वाले चालकों के लिए लाइसेंस नवीनीकरण को सख्त करने जैसे बदलाव शामिल हैं।
हालांकि ये अभी केवल प्रस्ताव हैं और इन्हें लागू करने के लिए मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) में संशोधन आवश्यक होगा। अंतिम फैसला सरकार की मंजूरी और अधिसूचना के बाद ही प्रभावी होगा।

50 साल की उम्र तक नहीं कराना पड़ सकता है Driving Licence रिन्यू
वर्तमान नियमों के अनुसार निजी वाहन चालकों का ड्राइविंग लाइसेंस जारी होने के 20 वर्ष बाद या 40 वर्ष की आयु पूरी होने तक, जो पहले हो, वैध रहता है। इसके बाद लाइसेंस का नवीनीकरण कराना होता है।
प्रस्ताव के अनुसार अब इस आयु सीमा को 40 वर्ष से बढ़ाकर 50 वर्ष किया जा सकता है। यदि यह बदलाव लागू होता है तो करोड़ों लोगों को पहले की तुलना में अधिक समय तक लाइसेंस रिन्यू कराने की जरूरत नहीं पड़ेगी। हालांकि रिपोर्टों के अनुसार राज्य सरकारों की आय पर इसका असर पड़ सकता है। इसलिए संभावना जताई जा रही है कि नवीनीकरण शुल्क की व्यवस्था किसी न किसी रूप में जारी रखी जा सकती है।
PUC सर्टिफिकेट की वैधता में भी हो सकता है बड़ा बदलाव
प्रस्तावित Driving Licence Rules के साथ-साथ प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) के नियमों में भी बदलाव का सुझाव दिया गया है। यदि प्रस्ताव लागू होता है तो अप्रैल 2020 के बाद बनी BS-VI निजी गाड़ियों के लिए शुरुआती छह वर्षों तक PUC सर्टिफिकेट की वैधता तीन वर्ष तक हो सकती है। यानी इन वाहनों के मालिकों को हर साल PUC बनवाने की आवश्यकता नहीं होगी।
हालांकि छह से दस वर्ष पुरानी BS-VI गाड़ियों के लिए हर वर्ष PUC अनिवार्य रहेगा, जबकि दस वर्ष से अधिक पुरानी BS-VI गाड़ियों के लिए हर छह महीने में PUC करवाना पड़ सकता है। वहीं BS-IV वाहनों के लिए PUC की वैधता घटाकर छह महीने किए जाने का प्रस्ताव है। जबकि BS-I से BS-III श्रेणी की पुरानी गाड़ियों के लिए यह अवधि और कम की जा सकती है। इन बदलावों का उद्देश्य पुराने वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर अधिक प्रभावी निगरानी रखना बताया जा रहा है।
दूसरे राज्य में वाहन रखने वालों को मिलेगी राहत
प्रस्तावों में एक महत्वपूर्ण बदलाव उन लोगों के लिए भी है, जिनकी नौकरी या व्यवसाय के कारण बार-बार दूसरे राज्यों में रहना पड़ता है।
फिलहाल Motor Vehicles Act की धारा 47 के अनुसार यदि किसी राज्य में पंजीकृत वाहन लगातार एक वर्ष से अधिक समय तक दूसरे राज्य में रहता है तो वाहन मालिक को वहां नया रजिस्ट्रेशन कराना पड़ता है। अब मंत्रालय इस अवधि को बढ़ाकर तीन वर्ष करने पर विचार कर रहा है।
यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो ट्रांसफर वाली नौकरियों, लंबी अवधि के प्रोजेक्ट्स और कॉन्ट्रैक्ट असाइनमेंट पर काम करने वाले लोगों को काफी राहत मिल सकती है। इससे वाहन का दोबारा रजिस्ट्रेशन कराने की जटिल और खर्चीली प्रक्रिया से बचा जा सकेगा।

ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों के लिए सख्त हो सकता है लाइसेंस नवीनीकरण
प्रस्तावित Driving Licence Rules का सबसे महत्वपूर्ण बदलाव बार-बार ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वाले चालकों से जुड़ा है।
मंत्रालय ऐसे चालकों के लिए ड्राइविंग लाइसेंस नवीनीकरण के समय दोबारा ड्राइविंग टेस्ट अनिवार्य करने पर विचार कर रहा है। वर्तमान व्यवस्था में सामान्य परिस्थितियों में लाइसेंस का नवीनीकरण बिना दोबारा ड्राइविंग टेस्ट के हो जाता है, बशर्ते लाइसेंस निर्धारित समय के भीतर नवीनीकृत कराया जाए।
लेकिन यदि किसी चालक का ट्रैफिक उल्लंघनों का रिकॉर्ड लगातार खराब पाया जाता है, तो भविष्य में उसे फिर से ड्राइविंग टेस्ट देना पड़ सकता है। सरकार का मानना है कि इससे सड़क सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा और बार-बार नियम तोड़ने वालों को जिम्मेदारी से वाहन चलाने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकेगा।
अभी लागू नहीं हुए हैं ये नियम
ध्यान देने वाली बात यह है कि फिलहाल ये सभी बदलाव केवल प्रस्ताव के रूप में सामने आए हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार हाल ही में इन संशोधनों को मंत्रियों के एक अनौपचारिक समूह के सामने रखा गया है। यदि सरकार इन्हें मंजूरी देती है तो मोटर वाहन अधिनियम में आवश्यक संशोधन किए जाएंगे। इसके बाद ही नए नियम पूरे देश में लागू होंगे।
ऐसे में फिलहाल वाहन चालकों के लिए मौजूदा नियम ही प्रभावी रहेंगे। हालांकि यदि ये प्रस्ताव कानून का रूप लेते हैं, तो ड्राइविंग लाइसेंस, PUC, वाहन रजिस्ट्रेशन और ट्रैफिक नियमों से जुड़ी कई प्रक्रियाएं पहले की तुलना में काफी बदल सकती हैं।





