मध्य पूर्व में ईरान-इजराइल तनाव की खबरों के बीच एक और महत्वपूर्ण क्षेत्रीय संघर्ष काफी हद तक सुर्खियों से बाहर रह गया है। पिछले 24 घंटों में अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव तेज़ हुआ है और दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई की खबरें सामने आई हैं। यह पूरा घटनाक्रम अब Afghanistan Pakistan conflict update के रूप में अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों की नजर में आने लगा है।
रिपोर्ट्स के अनुसार अफगानिस्तान ने पाकिस्तान के कुछ महत्वपूर्ण सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया है, जबकि पाकिस्तान पहले अफगानिस्तान के अंदर हवाई हमले कर चुका था।

Pakistan की एयर स्ट्राइक से शुरू हुआ तनाव
जानकारी के मुताबिक पाकिस्तान की वायुसेना ने अफगानिस्तान के कई स्थानों पर हमले किए। इन हमलों में काबुल और कंधार के आसपास कुछ सैन्य और लॉजिस्टिक ठिकानों को निशाना बनाया गया।
रिपोर्ट्स में कहा गया है कि काबुल के पास स्थित सैन्य सुविधाओं और गोला-बारूद डिपो को निशाना बनाया गया। इसके अलावा कंधार एयरपोर्ट के पास ईंधन डिपो पर भी हमला किया गया। इन हमलों में कुछ नागरिकों के मारे जाने की भी खबरें सामने आईं, जिसकी पुष्टि संयुक्त राष्ट्र की ओर से की गई बताई जाती है।
इन हमलों के बाद अफगानिस्तान की ओर से जवाबी कार्रवाई की गई।
Afghanistan की जवाबी कार्रवाई
अफगानिस्तान के रक्षा मंत्री Mullah Yaqoob ने पहले ही चेतावनी दी थी कि अगर पाकिस्तान काबुल या कंधार को निशाना बनाता है तो अफगानिस्तान भी जवाब देगा।
इसके बाद पाकिस्तान के कुछ सैन्य ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइल जैसे हमलों की खबरें सामने आईं। रिपोर्ट्स में कहा गया कि पाकिस्तान के रावलपिंडी क्षेत्र के पास सैन्य परिसर को निशाना बनाया गया।
रावलपिंडी पाकिस्तान सेना का महत्वपूर्ण मुख्यालय क्षेत्र माना जाता है क्योंकि यहां Pakistan Army का जनरल हेडक्वार्टर भी स्थित है।

पाकिस्तान में अन्य सुरक्षा घटनाएं
इस दौरान पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा क्षेत्र में भी हिंसक घटनाएं हुईं। लकी मरवत इलाके में एक आईईडी धमाके में पुलिस वाहन को निशाना बनाया गया जिसमें कई लोगों की मौत की खबर सामने आई।
इसके अलावा बलूचिस्तान से जुड़ी कुछ रिपोर्ट्स में यह भी बताया गया कि बलूच उग्रवादी समूहों ने गैस पाइपलाइन को नुकसान पहुंचाया। इससे पाकिस्तान की ऊर्जा आपूर्ति पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
China क्यों चाहता है समझौता
इस पूरे घटनाक्रम में चीन की भूमिका भी चर्चा में है। China दोनों देशों के बीच तनाव कम कराने की कोशिश कर रहा है क्योंकि उसके आर्थिक और रणनीतिक हित दोनों देशों से जुड़े हुए हैं।
चीन का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट China–Pakistan Economic Corridor (CPEC) पाकिस्तान से होकर गुजरता है। अगर पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच संघर्ष बढ़ता है तो इस परियोजना पर भी असर पड़ सकता है।
इसी वजह से चीन कूटनीतिक स्तर पर दोनों देशों के बीच बातचीत कराने की कोशिश कर रहा है।
पाकिस्तान की कूटनीतिक कोशिशें
इसी बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif और सेना प्रमुख Asim Munir की सऊदी अरब यात्रा की खबरें भी सामने आई हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार पाकिस्तान ऊर्जा संकट और आर्थिक दबाव के कारण Saudi Arabia से तेल और वित्तीय सहायता हासिल करने की कोशिश कर रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा संकट पहले से ही दबाव में है और क्षेत्रीय तनाव इस स्थिति को और मुश्किल बना सकता है।
आगे क्या हो सकता है
विशेषज्ञों के अनुसार अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच यह तनाव जल्दी खत्म होने वाला नहीं दिख रहा। दोनों देशों के बीच सीमा विवाद, आतंकी गतिविधियों के आरोप और राजनीतिक अविश्वास लंबे समय से मौजूद हैं।
अगर यह संघर्ष और बढ़ता है तो इसका असर पूरे दक्षिण एशिया की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता पर पड़ सकता है। फिलहाल दुनिया का ध्यान भले ही मध्य पूर्व के युद्धों पर केंद्रित हो, लेकिन Afghanistan Pakistan conflict update आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय राजनीति का बड़ा मुद्दा बन सकता है।





