March 14, 2026 1:18 AM

CAPF Promotion Policy Controversy: सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी क्यों नाराज़ हैं CAPF अधिकारी?

CAPF promotion policy controversy देश की पैरामिलिट्री फोर्सेस और केंद्र सरकार आमने-सामने। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी प्रमोशन पॉलिसी पर विवाद। क्या नया बिल बदलेगा CAPF अधिकारियों का भविष्य?

EDITED BY: Vishal Yadav

UPDATED: Saturday, March 14, 2026

CAPF Promotion Policy Controversy: सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी क्यों नाराज़ हैं CAPF अधिकारी?

देश की सुरक्षा में तैनात Central Armed Police Forces (CAPF) इन दिनों एक बड़े प्रशासनिक और कानूनी विवाद के केंद्र में हैं। जम्मू-कश्मीर से लेकर छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाकों तक आतंकवाद और उग्रवाद से लड़ने वाली इन फोर्सेस के अधिकारी अब अपने ही करियर और प्रमोशन सिस्टम को लेकर आवाज उठा रहे हैं। इस पूरे मामले को लेकर CAPF promotion policy controversy देश में एक अहम मुद्दा बनती जा रही है।

CAPF अधिकारियों का आरोप है कि केंद्र सरकार एक ऐसा बिल लाने की तैयारी कर रही है जिससे सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद उनके प्रमोशन और नेतृत्व के अवसर प्रभावित हो सकते हैं। यही कारण है कि यह मुद्दा अब अदालत से लेकर संसद तक चर्चा का विषय बन गया है।

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CAPF Promotion Policy Controversy: सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी क्यों नाराज़ हैं CAPF अधिकारी?

CAPF promotion policy controversy: क्या है पूरा विवाद?

भारत की CAPF में कई महत्वपूर्ण सुरक्षा बल शामिल हैं, जैसे

  • Central Reserve Police Force (CRPF)

  • Border Security Force (BSF)

  • Indo-Tibetan Border Police (ITBP)

  • Central Industrial Security Force (CISF)

  • Sashastra Seema Bal (SSB)

  • National Security Guard (NSG)

ये सभी बल Ministry of Home Affairs के अधीन काम करते हैं और देश की आंतरिक सुरक्षा में बेहद अहम भूमिका निभाते हैं।

विवाद की जड़ प्रमोशन और नेतृत्व की व्यवस्था से जुड़ी है। CAPF अधिकारियों का कहना है कि इन फोर्सेस में लंबे समय से वरिष्ठ पदों पर IPS अधिकारियों की डेपुटेशन की परंपरा रही है। इसके कारण CAPF कैडर से भर्ती हुए अधिकारी उच्च पदों तक नहीं पहुंच पाते।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला और सरकार का रुख

CAPF अधिकारियों ने इसी मुद्दे को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाया था। उनका तर्क था कि उनकी सेवा शर्तों और प्रमोशन पॉलिसी को स्पष्ट और व्यवस्थित तरीके से तय किया जाना चाहिए।

इस मामले में Supreme Court of India ने CAPF अधिकारियों के पक्ष में फैसला दिया और सरकार से प्रमोशन नियमों को व्यवस्थित करने के लिए कहा। लेकिन अधिकारियों का आरोप है कि सरकार ने इस फैसले को लागू करने में देरी की और बाद में इसके खिलाफ रिव्यू पिटीशन भी दाखिल की, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया।

अब खबर है कि सरकार संसद में Central Armed Police Forces General Administration Bill लाने की तैयारी कर रही है। CAPF अधिकारियों का कहना है कि यह बिल उनके प्रमोशन के अवसरों को और सीमित कर सकता है।

 

CAPF Promotion Policy Controversy: सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी क्यों नाराज़ हैं CAPF अधिकारी?

प्रमोशन सिस्टम क्यों बना बड़ा मुद्दा

CAPF अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था में उनके प्रमोशन में बेहद ज्यादा देरी होती है। उदाहरण के तौर पर एक अधिकारी जो Assistant Commandant के रूप में भर्ती होता है, उसे अगले पद पर प्रमोशन पाने में 10 से 15 साल तक लग सकते हैं।

इसके विपरीत, Indian Police Service (IPS) अधिकारी अपेक्षाकृत जल्दी वरिष्ठ पदों तक पहुंच जाते हैं। यही असमानता CAPF promotion policy controversy का मुख्य कारण बन गई है।

कई अधिकारियों का कहना है कि अगर वर्षों तक प्रमोशन नहीं मिलेगा तो इससे जवानों और अधिकारियों का मनोबल प्रभावित होगा।

CAPF की भूमिका और बढ़ती चिंता

CAPF देश की सुरक्षा में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उदाहरण के तौर पर:

  • CRPF नक्सल प्रभावित इलाकों में ऑपरेशन चलाती है

  • BSF भारत-पाकिस्तान सीमा की सुरक्षा करती है

  • ITBP भारत-चीन सीमा पर तैनात रहती है

  • CISF देश के एयरपोर्ट और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा संभालती है

इन फोर्सेस के जवान अक्सर कठिन परिस्थितियों में ड्यूटी करते हैं और कई बार ऑपरेशन के दौरान शहीद भी हो जाते हैं। इसलिए अधिकारियों का कहना है कि उनके करियर और प्रमोशन सिस्टम को लेकर स्पष्ट नीति होना बेहद जरूरी है।

संसद में भी उठा मामला

इस मुद्दे को विपक्षी नेताओं ने भी संसद में उठाया है। Ram Gopal Yadav ने संसद में कहा कि CAPF अधिकारी देश की सीमाओं, एयरपोर्ट्स और उद्योगों की सुरक्षा करते हैं लेकिन उनकी सेवा शर्तें अभी भी स्पष्ट नहीं हैं।

उन्होंने कहा कि कई अधिकारियों को 10–15 साल तक प्रमोशन नहीं मिल पाता, जो उनके मनोबल को प्रभावित करता है।

आगे क्या हो सकता है?

फिलहाल सरकार और CAPF अधिकारियों के बीच इस मुद्दे पर कोई औपचारिक समाधान सामने नहीं आया है। अगर सरकार प्रस्तावित बिल संसद में पेश करती है तो यह विवाद और गहरा सकता है।

CAPF promotion policy controversy अब केवल एक प्रशासनिक मुद्दा नहीं रह गया है बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा और फोर्सेस के मनोबल से भी जुड़ा मामला बन चुका है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागू करती है या नया कानून लाकर व्यवस्था में बदलाव करती है।

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