February 11, 2026 5:25 AM

Zoho Mail Integration: केंद्र सरकार के 12 लाख कर्मचारी अब Zoho पर शिफ्ट, जानिए क्यों बदला गया NIC सिस्टम !!

Zoho Mail Integration: केंद्र सरकार ने अपने 12 लाख कर्मचारियों के ईमेल सिस्टम में बड़ा बदलाव कर दिया है। अब सरकारी अफसरों के ईमेल्स पहले की तरह NIC सर्वर पर नहीं, बल्कि Zoho Mail पर होस्ट किए जाएंगे। इस फैसले के बाद अब पीएमओ समेत तमाम मंत्रालयों

EDITED BY: Vishal Yadav

UPDATED: Tuesday, October 14, 2025

Zoho Mail Integration: केंद्र सरकार के 12 लाख कर्मचारी अब Zoho पर शिफ्ट, जानिए क्यों बदला गया NIC सिस्टम !!

Zoho Mail Integration: केंद्र सरकार ने अपने 12 लाख कर्मचारियों के ईमेल सिस्टम में बड़ा बदलाव कर दिया है। अब सरकारी अफसरों के ईमेल्स पहले की तरह NIC सर्वर पर नहीं, बल्कि Zoho Mail पर होस्ट किए जाएंगे। इस फैसले के बाद अब पीएमओ समेत तमाम मंत्रालयों और विभागों के कर्मचारी Zoho प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रहे हैं।

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क्या Zoho बनेगा भारत का अपना ‘गूगल-माइक्रोसॉफ्ट’?

Zoho, जिसे अक्सर “Z जोहो” कहा जाता है, एक भारतीय टेक कंपनी है जो ऑफिस और बिजनेस से जुड़े कई सॉफ्टवेयर टूल्स बनाती है। ईमेल सर्विस, डॉक्युमेंट्स, स्प्रेडशीट्स, प्रेजेंटेशन और क्लाउड स्टोरेज जैसी सुविधाएं अब सरकारी कर्मचारियों के लिए जोहो के जरिए उपलब्ध होंगी। इससे पहले ये सारी सुविधाएं राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र यानी NIC के जरिए मिलती थीं।

NIC (National Informatics Centre) की शुरुआत 1976 में हुई थी और यह इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत काम करता है। अब तक सरकारी ईमेल आईडी जैसे @nic.in या @gov.in इसी सिस्टम से संचालित होते थे। लेकिन अब इन ईमेल आईडी में कोई बदलाव नहीं होगा, बस उनका होस्टिंग सर्वर Zoho होगा।

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क्या ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर से सरकारी डेटा को था खतरा?

सरकार और जोहो के बीच यह कॉन्ट्रैक्ट 7 साल के लिए साइन हुआ है। इसके तहत Zoho पूरी ईमेल सर्विस, सिक्योरिटी और मेंटेनेंस संभालेगा। Zoho की तरफ से कहा गया है कि इस बदलाव से डेटा सुरक्षा पर कोई असर नहीं पड़ेगा। कंपनी ने बताया कि उसने NIC और CERT-In जैसी सरकारी सुरक्षा एजेंसियों से ऑडिट रिपोर्ट ली है और सॉफ्टवेयर क्वालिटी सिस्टम्स (SQS) से सुरक्षा प्रमाणन भी कराया है।

एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि पहले से ही Zoho का विकल्प मौजूद था, लेकिन एक्टिव नहीं किया गया था। अब इसे इसलिए चालू किया गया ताकि सरकारी कर्मचारी Word, Spreadsheet और Presentation जैसे कामों के लिए किसी ओपन सोर्स एप्लिकेशन का इस्तेमाल न करें, जिससे डेटा सुरक्षा को खतरा हो सकता था। इस फैसले से सरकार का मकसद अपने डेटा को पूरी तरह सुरक्षित रखना और स्वदेशी टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देना है।

Zoho ने माना- प्रोडक्ट्स में अभी नहीं है एन्ड-टू-एन्ड इंक्रिप्शन, फाउंडर ने कहा- जल्द जोड़ा जाएगा यह फीचर

जोहो  के मालिक श्रीधर वेंबू ने एक बयान में कहा कि कंपनी अपने यूजर्स का डेटा एक्सेस नहीं करती और इसी भरोसे पर उनकी सर्विस चलती है। हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि उनके प्रोडक्ट्स में अभी एन्ड-टू-एन्ड इंक्रिप्शन नहीं है, लेकिन जल्द यह फीचर जोड़ा जाएगा।

जोहो के पास 45 से ज्यादा एप्लिकेशन्स हैं जो बिजनेस और गवर्नमेंट वर्क को आसान बनाते हैं। इनमें CRM, Books, Desk, Projects और People जैसे टूल्स शामिल हैं। इससे सरकारी कामकाज अब और ज्यादा स्मार्ट और ऑर्गेनाइज्ड तरीके से हो सकेगा।

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