उत्तर प्रदेश के वाराणसी से सामने आया Varanasi police bribery case एक बार फिर सवाल खड़ा करता है कि जिन पर कानून लागू कराने की जिम्मेदारी है, वही अगर कानून तोड़ने लगें तो आम आदमी कहां जाए। सिगरा थाना क्षेत्र में काशी विद्यापीठ चौकी के चौकी इंचार्ज और एक सिपाही को रिश्वत लेते हुए एंटी करप्शन टीम ने रंगे हाथ पकड़ लिया। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो और चश्मदीदों के बयान सामने आने के बाद मामला सिर्फ एक रिश्वतखोरी का नहीं, बल्कि पुलिस व्यवस्था और जवाबदेही पर गंभीर बहस का कारण बन गया है।

Varanasi police bribery case: कैसे हुआ पूरा घटनाक्रम
Varanasi police bribery case की शुरुआत एक घरेलू विवाद से जुड़ी शिकायत से होती है। चंदौली जिले के अलीनगर मुगलचक निवासी प्रहलाद गुप्ता और उनकी पत्नी ममता के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। पत्नी ने प्रहलाद के खिलाफ पहले से ही कई केस दर्ज करा रखे थे। इसी मामले की जांच सिगरा थाना क्षेत्र की काशी विद्यापीठ चौकी में तैनात चौकी इंचार्ज शिवाकर मिश्रा के पास पहुंची।
परिवार का आरोप है कि चौकी इंचार्ज ने केस में चार्जशीट लगाने और जेल भेजने की धमकी दी। इसके बदले एक “ऑफर” रखा गया—अगर चार्जशीट से बचना है तो पैसे देने होंगे। शुरुआती डिमांड ज्यादा बताई जा रही थी, लेकिन बाद में सौदेबाजी के बाद रकम तय हुई। प्रहलाद गुप्ता ने यह पूरा मामला एंटी करप्शन टीम को जाकर बताया और लिखित शिकायत दी। यहीं से Varanasi police bribery case ने गंभीर मोड़ ले लिया।
एंटी करप्शन टीम की ट्रैप कार्रवाई और रंगे हाथ गिरफ्तारी
28 जनवरी को एंटी करप्शन टीम प्रहलाद गुप्ता को साथ लेकर काशी विद्यापीठ चौकी पहुंची। प्रहलाद ने चौकी इंचार्ज शिवाकर मिश्रा से मुलाकात की। आरोप है कि दरोगा ने सीधे पैसे लेने के बजाय कहा कि रकम सिपाही को दे दी जाए। इसके बाद प्रहलाद ने सिपाही गौरव द्विवेदी को तय रकम दी।

जैसे ही सिपाही ने नोट लेकर अपनी जेब में रखे, एंटी करप्शन टीम ने उसे पकड़ लिया। टीम के सामने आते ही सिपाही ने घबराकर पैसे जेब से निकालकर फेंक दिए और भागने की कोशिश की, लेकिन मौके पर ही उसे दबोच लिया गया। जांच के दौरान कुछ रकम कूलर के पीछे से भी बरामद होने की बात सामने आई। पूछताछ में सिपाही ने बयान दिया कि उसने यह रकम चौकी इंचार्ज शिवाकर मिश्रा के कहने पर ली थी। इसी के साथ Varanasi police bribery case में दोनों पुलिसकर्मी सीधे तौर पर फंस गए।
दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर लालपुर पांडेयपुर थाना लाया गया, जहां एंटी करप्शन टीम के इंस्पेक्टर की तहरीर पर उनके खिलाफ केस दर्ज किया गया। बाद में गौरव बंसवाल ने दोनों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया। 29 जनवरी को दोनों की कोर्ट में पेशी तय की गई है, जिसके बाद पुलिस रिमांड और जेल भेजे जाने की प्रक्रिया होगी।
आरोपी पक्ष की सफाई और पुराने विवाद
Varanasi police bribery case में आरोपी चौकी इंचार्ज की पत्नी शिवानी मिश्रा ने सामने आकर पूरे मामले को साजिश बताया है। उन्होंने दावा किया कि एंटी करप्शन टीम कुछ दिनों से उनके पति पर दबाव बना रही थी और जानबूझकर झूठे केस में फंसाया गया है। उनका कहना है कि वीडियो में कहीं भी यह साबित नहीं होता कि उनके पति ने पैसे लिए हों और कूलर के पीछे से पैसे उठाने का दृश्य भी संदिग्ध है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पुलिस कमिश्नर से निष्पक्ष जांच की मांग की है।
हालांकि, इस केस में एक और अहम पहलू यह है कि शिवाकर मिश्रा का नाम पहले भी विवादों में आ चुका है। बीएचयू आईआईटी छात्रा गैंगरेप केस के समय वह चौकी इंचार्ज थे और आरोप लगा था कि केस को गलत दिशा में मोड़ने की कोशिश की गई। इसके अलावा, उन पर जमीन कब्जे से जुड़े मामले में पैसे लेने के आरोप भी लग चुके हैं। इन पुराने मामलों के चलते Varanasi police bribery case में जांच एजेंसियों की नजर और भी सख्त मानी जा रही है।
सिस्टम पर सवाल और आगे की कार्रवाई
Varanasi police bribery case सिर्फ दो पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है। यह मामला उस भरोसे को चोट पहुंचाता है, जो आम नागरिक पुलिस से करता है। जब शिकायत लेकर थाने पहुंचने वाला व्यक्ति ही रिश्वत के दबाव में आ जाए, तो न्याय की उम्मीद कहां से की जाए? एंटी करप्शन टीम की इस कार्रवाई को एक मजबूत संदेश के तौर पर देखा जा रहा है कि रिश्वतखोरी पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही है।
फिलहाल दोनों आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं और पुलिस का कहना है कि कॉल डिटेल्स, शिकायतकर्ता के बयान, बरामद रकम और वीडियो फुटेज के आधार पर केस को मजबूती से आगे बढ़ाया जाएगा। अगर आरोप साबित होते हैं, तो यह Varanasi police bribery case न सिर्फ सजा तक पहुंचेगा, बल्कि पुलिस विभाग के अंदर जवाबदेही और निगरानी को लेकर भी बड़े बदलाव की मांग को हवा देगा।






