Rajeev Pratap Death: उत्तरकाशी के जोशियाड़ा बैराज से पत्रकार Rajeev Pratap का शव बरामद होने के बाद पूरे उत्तराखंड में हलचल मच गई थी। अब इस मामले की पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आ चुकी है, जिसमें उनकी मौत का कारण पेट और सीने में लगी अंदरूनी चोटें बताया गया है। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि शरीर पर किसी भी तरह के बाहरी हमले या चोट के निशान नहीं मिले हैं। हालांकि, परिजनों और साथी पत्रकारों ने अब भी उनकी मौत को एक साधारण हादसा मानने से इंकार किया है।
Rajeev Pratap Death: पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच
30 सितंबर को उत्तराखंड डीजीपी दीपम सेठ ने बताया कि इस मामले की गहराई से जांच करने के लिए विशेष जांच दल (SIT) बनाई गई है। टीम का नेतृत्व उत्तरकाशी के डिप्टी एसपी कर रहे हैं। एसपी सरिता डोभाल ने कहा कि राजीव के पेट और सीने में जो चोटें पाई गईं, वे हादसे की संभावना की ओर इशारा करती हैं। लेकिन परिवार द्वारा लगाए गए अपहरण और धमकियों के आरोपों की भी छानबीन की जा रही है।
राजीव 18 सितंबर की रात से लापता थे। रात करीब 11:20 बजे उन्हें बस स्टॉप के पास अपनी अल्टो कार में बैठा देखा गया था। अगले दिन उनकी कार भागीरथी नदी के पास क्षतिग्रस्त हालत में मिली। परिवार की मौजूदगी में तलाशी के दौरान कार के अंदर से केवल एक चप्पल बरामद हुई। इसके बाद उनके परिजनों ने आशंका जताई कि यह एक साधारण एक्सीडेंट नहीं बल्कि योजनाबद्ध साज़िश है।

परिवार और पत्नी के गंभीर आरोप
Rajeev Pratap की पत्नी मुस्कान का कहना है कि लापता होने की रात उनकी आखिरी बातचीत 11 बजे हुई थी। उस दौरान राजीव ने उन्हें बताया था कि अस्पताल और स्कूलों की रिपोर्टिंग के बाद उन्हें लगातार धमकियां मिल रही हैं। कई लोग फोन कर रहे थे कि अगर वीडियो नहीं हटाया गया तो गंभीर नतीजे भुगतने होंगे। मुस्कान का आरोप है कि उनके पति को अगवा किया गया और फिर उनकी जान ली गई।
धमकियों की वजह बनी पत्रकारिता
Rajeev Pratap उत्तरकाशी के जाने-माने युवा पत्रकार थे। उन्होंने 2020-21 में आईआईएमसी से हिंदी पत्रकारिता की पढ़ाई की थी और इसके बाद दिल्ली उत्तराखंड लाइव नाम से अपना यूट्यूब चैनल शुरू किया। इस चैनल के जरिए वे स्थानीय मुद्दों को उठाते थे। 16 सितंबर को उन्होंने “उत्तरकाशी के हॉस्पिटल की यह बदहाली क्यों?” नाम से एक वीडियो अपलोड किया था। इसी के बाद उन्हें धमकियों का सामना करना पड़ा।
पत्रकारों में गुस्सा और चिंता
उनकी मौत के बाद पत्रकारों में गहरा गुस्सा है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या सच दिखाने की कीमत इतनी भारी हो सकती है। क्या प्रशासन इस मामले को निष्पक्षता से देख रहा है या फिर इसे केवल एक हादसा बताकर फाइल बंद कर दी जाएगी।
आगे की राह
डीजीपी ने कहा है कि SIT अब तक मिले सभी सबूतों की जांच करेगी और जल्द ही रिपोर्ट पेश करेगी। हालांकि, राजीव के परिजन और पत्रकार समुदाय अभी भी यही चाहते हैं कि मामले की पारदर्शी जांच हो और सच सामने आए।
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