यह वीडियो उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले से सामने आया है, जहां रॉबर्ट्सगंज कोतवाली क्षेत्र के लोढ़ी टोल प्लाजा पर एक महिला वकील और टोल कर्मचारियों के बीच विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। लाल साड़ी में दिख रही महिला पेशे से वकील हैं और उनका नाम आरती पांडे बताया गया है। बहस पहले कहासुनी तक सीमित थी, लेकिन कुछ ही देर में मारपीट में बदल गई। इसके बाद की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गए।

UP Toll Plaza Clash का यह मामला न सिर्फ कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है, बल्कि टोल प्लाजा पर कर्मचारियों के व्यवहार और आम लोगों के साथ होने वाले विवादों को भी एक बार फिर चर्चा में ले आया है।पूरा मामला समझने के लिए घटनाक्रम पर नजर डालते हैं।
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, महिला वकील आरती पांडे 1 फरवरी को अपने तीन परिजनों के साथ अपने रिश्तेदार के घर जा रही थीं। करीब दोपहर 3:30 बजे उनकी कार लोढ़ी टोल प्लाजा पर पहुंची। उस समय टोल प्लाजा पर भारी भीड़ थी और वाहनों की लंबी कतार लगी हुई थी।
इसी दौरान आरती पांडे के एक परिजन नवीन सिंह कार से उतरकर टोल प्लाजा पर मौजूद एक कर्मचारी से भीड़ की वजह पूछने चले गए। आरोप है कि इसी बात पर टोल कर्मचारी और नवीन सिंह के बीच गाली-गलौज शुरू हो गई। बात इतनी बढ़ गई कि दोनों पक्षों के बीच हाथापाई शुरू हो गई।
वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि शुरुआत में वकील आरती पांडे बीच-बचाव करने की कोशिश करती हैं। लेकिन हालात बेकाबू होते चले गए। इसके बाद वह टोल बूथ के दरवाजे पर लात मारती हुई नजर आती हैं। यह पूरा दृश्य किसी ने मोबाइल कैमरे में रिकॉर्ड कर लिया, जो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
मीडिया से बातचीत में आरती पांडे ने अपनी तरफ से पूरी घटना का विवरण दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि टोल बूथ के अंदर बैठा एक कर्मचारी, जिसने पीले रंग की शर्ट पहनी हुई थी, अंदर से लगातार मां-बहन की भद्दी गालियां दे रहा था। उनके मुताबिक, कर्मचारी धमकी दे रहा था कि “चुपचाप गाड़ी में बैठ जाओ, नहीं तो जान से मार देंगे।”

आरती पांडे का कहना है कि जब उन्होंने गाली-गलौज का विरोध किया और सवाल उठाया कि इस तरह की भाषा क्यों इस्तेमाल की जा रही है, तो जवाब में उन्हें कहा गया कि “तुम हमको कानून पढ़ाओगे?” इसके बाद कथित तौर पर कहा गया कि यहां के एसपी, मंत्री और बड़े अधिकारी “हमारी जेब में हैं” और जो करना है कर लो।
आरोप है कि कुछ देर बाद और टोलकर्मी मौके पर आ गए और सभी ने मिलकर धक्का-मुक्की की, जिससे वह जमीन पर गिर गईं। इस घटना के बाद माहौल और तनावपूर्ण हो गया।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। वकील आरती पांडे की तहरीर पर रॉबर्ट्सगंज कोतवाली में मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों को मौके से गिरफ्तार कर लिया है।
इस पूरे मामले पर सोनभद्र के सीओ सिटी ने बयान जारी किया। उन्होंने बताया कि आरती पांडे अपने परिजनों के साथ चौपन की तरफ जा रही थीं, तभी लोढ़ी टोल प्लाजा के कर्मचारियों से विवाद हुआ। आरोप है कि कर्मचारियों ने मारपीट की। शिकायत के आधार पर समुचित धाराओं में केस दर्ज कर लिया गया है और दो आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं। पुलिस के अनुसार फिलहाल मौके पर कानून-व्यवस्था की स्थिति सामान्य है और आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।
UP Toll Plaza Clash के इस मामले के सामने आने के बाद प्रदेश भर के वकीलों में नाराजगी देखी जा रही है। सोशल मीडिया पर कई पोस्ट और वीडियो सामने आए हैं, जिनमें वकीलों द्वारा टोल प्लाजा के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की बात कही जा रही है। कुछ पोस्ट में यहां तक कहा जा रहा है कि “यूपी में टोल मांगोगे तो ठोक देंगे” जैसी मुहिम चलाई जाएगी।
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक कुमार श्रीवास्तव ने इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि प्रदेश भर में टोल प्लाजा को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं। उन्होंने लोढ़ी टोल प्लाजा को अवैध बताते हुए उसे तत्काल हटाने की मांग की है।

अशोक कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि यह टोल प्लाजा वन विभाग की रेंज में आता है, जहां इस तरह का टोल नहीं लगाया जा सकता। आरोप है कि तत्कालीन शासन-प्रशासन के कुछ लोगों ने गलत तरीके से अनुमति दी, जिसके आधार पर टोल का निर्माण हुआ और अब वसूली की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि टोल वसूली काफी समय पहले पूरी हो जानी चाहिए थी, इसके बावजूद वसूली जारी है।
बार एसोसिएशन अध्यक्ष ने यह भी कहा कि टोल प्लाजा पर कर्मचारियों के व्यवहार को लेकर पूरे प्रदेश और देश भर से शिकायतें आती रही हैं। उनका आरोप है कि ज्यादा कमाई वाले टोल प्लाजा पर अक्सर दबंग किस्म के लोगों को तैनात किया जाता है, जिससे आम जनता के साथ विवाद की स्थिति बनती है।
इस घटना के बाद आगे की रणनीति तय करने के लिए वकीलों की एक आम सभा बुलाने की बात कही गई है, जिसमें यह फैसला लिया जाएगा कि आगे किस तरह का आंदोलन या कानूनी कदम उठाया जाएगा।
गौरतलब है कि UP Toll Plaza Clash का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले जनवरी महीने में लखनऊ-सुल्तानपुर हाईवे पर स्थित 12 टोल प्लाजा पर हाई कोर्ट के एक अधिवक्ता रत्नेश शुक्ला के साथ भी टोल कर्मचारियों द्वारा मारपीट की गई थी। उस घटना के बाद गुस्साए वकीलों ने टोल प्लाजा के सभी बूम बैरियर तोड़ दिए थे और कुछ समय के लिए वाहनों का आवागमन पूरी तरह निशुल्क कर दिया गया था।
इन लगातार सामने आ रही घटनाओं ने उत्तर प्रदेश में टोल प्लाजा के संचालन, वहां की सुरक्षा व्यवस्था और कर्मचारियों के व्यवहार पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ टोल प्लाजा पर अनुशासन और सुरक्षा जरूरी है, वहीं दूसरी तरफ कानून हाथ में लेने की घटनाएं स्थिति को और बिगाड़ सकती हैं।
यह मामला अब केवल एक महिला वकील और टोल कर्मचारियों के बीच हुए विवाद तक सीमित नहीं रहा है। यह एक बड़े मुद्दे के तौर पर उभर रहा है, जिसमें कानून-व्यवस्था, नागरिक अधिकार, टोल प्लाजा की वैधता और प्रशासन की भूमिका जैसे सवाल शामिल हैं। आप इस पूरे मामले को कैसे देखते हैं? क्या टोल प्लाजा पर इस तरह की घटनाओं के लिए सख्त नियम और निगरानी की जरूरत है? अपनी राय जरूर साझा करें।





