UGC new rules Supreme Court stay अब सिर्फ एक कानूनी खबर नहीं रह गई है, बल्कि यह शिक्षा, समाज और राजनीति के चौराहे पर खड़ा ऐसा मुद्दा बन चुका है, जिसने केंद्र सरकार से लेकर विपक्ष तक की रणनीति उजागर कर दी है। कुछ दिन पहले तक केंद्र सरकार के उच्च पदस्थ सूत्र साफ कह रहे थे कि यूजीसी के नए नियमों पर पीछे हटने का कोई सवाल ही नहीं है और अगर विरोध है तो वह सामाजिक बदलाव का हिस्सा है। यहां तक कहा गया था कि केवल सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद ही दोबारा विचार होगा। अब सुप्रीम कोर्ट ने न सिर्फ दखल दिया है बल्कि साफ तौर पर नए नियमों पर रोक भी लगा दी है। UGC new rules Supreme Court stay के बाद गेंद पूरी तरह केंद्र सरकार के पाले में है और यही से असली सवाल शुरू होते हैं।

UGC new rules Supreme Court stay: कोर्ट ने क्या कहा और क्यों लगाई रोक
UGC new rules Supreme Court stay उस वक्त लगा जब देश की सर्वोच्च अदालत Supreme Court of India में इन नियमों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉय मौल्या बागची की बेंच ने नए नियमों की भाषा और मंशा पर गंभीर सवाल खड़े किए। कोर्ट का मानना था कि आजादी के 75 साल बाद भी समाज पूरी तरह जातिगत सोच से मुक्त नहीं हो पाया है और ऐसे में यह देखना जरूरी है कि क्या ये नए नियम हमें आगे ले जा रहे हैं या पीछे। कोर्ट ने साफ कहा कि रेगुलेशन में इस्तेमाल किए गए कुछ शब्द ऐसे हैं, जिनका दुरुपयोग शरारती तत्व समाज को बांटने के लिए कर सकते हैं। जस्टिस बागची ने यहां तक चेतावनी दी कि भारत को उस स्थिति में नहीं जाना चाहिए, जहां अमेरिका की तरह अलग-अलग समुदायों के लिए अलग स्कूल जैसी सोच पनपे। कोर्ट ने यह भी कहा कि पुराने यानी 2012 के नियम ज्यादा बैलेंस्ड थे और तब तक वही लागू रहेंगे। साथ ही एक हाई लेवल कमेटी बनाने का सुझाव भी दिया गया, जिसमें समाज के प्रतिष्ठित लोग इस पूरे मसले की समीक्षा कर सकें। UGC new rules Supreme Court stay के साथ ही सरकार और यूजीसी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है और अगली सुनवाई 19 मार्च को तय हुई है।
सरकार के लिए राहत या नई मुश्किल? UGC new rules Supreme Court stay का राजनीतिक असर
UGC new rules Supreme Court stay के बाद देखने में यह जरूर लग रहा है कि सरकार को थोड़ी राहत मिली है, लेकिन असल में यह राहत उतनी सीधी नहीं है। बीजेपी के भीतर कई ऐसे नेता थे जो अपने समाज और पार्टी लाइन के बीच फंसे हुए थे। खासकर सामान्य वर्ग से आने वाले नेता खुलकर बोल नहीं पा रहे थे। अब कोर्ट की रोक के बाद उन्हें बोलने का मौका भी मिल गया और राहत की सांस भी। केंद्रीय मंत्री Giriraj Singh का बयान इसी का उदाहरण है, जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद प्रधानमंत्री Narendra Modi, गृह मंत्री Amit Shah और शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan को धन्यवाद तक कह दिया। हालांकि असल चुनौती अभी बाकी है, क्योंकि सरकार को एक तरफ OBC और वंचित वर्गों को साथ रखना है तो दूसरी तरफ अपने पारंपरिक सामान्य वर्ग के वोट बैंक को नाराज भी नहीं करना है। UGC new rules Supreme Court stay ने सरकार को सांस लेने का वक्त तो दिया है, लेकिन आगे की राह अब और ज्यादा संतुलन मांगती है।

विपक्ष की राजनीति और क्षेत्रीय समीकरण
UGC new rules Supreme Court stay ने विपक्ष को भी मौका दे दिया है। समाजवादी पार्टी प्रमुख Akhilesh Yadav इस पूरे मामले को पीडीए यानी पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक राजनीति के फ्रेम में देख रहे हैं और कोर्ट में हो रही बहस को ही अंतिम सच मानने की बात कर रहे हैं। वहीं बसपा सुप्रीमो Mayawati ने बेहद संतुलित रुख अपनाया है। उन्होंने नए नियमों का खुला विरोध तो नहीं किया, लेकिन सुप्रीम कोर्ट की रोक को तुरंत उचित ठहराते हुए अपर कास्ट के लिए भी नेचुरल जस्टिस की मांग कर दी। उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में इस मुद्दे पर सबसे ज्यादा उबाल दिखा, जबकि नियम पूरे देश के लिए थे। राजनीतिक जानकार इसे आने वाले विधानसभा चुनाव और बीजेपी की आंतरिक राजनीति से भी जोड़कर देख रहे हैं। इसी कड़ी में Brij Bhushan Sharan Singh का नाम भी सामने आता है, जो शुरू से ही इन नियमों के खिलाफ मुखर थे और अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद खुलकर संतोष जता रहे हैं। UGC new rules Supreme Court stay ने साफ कर दिया है कि यह सिर्फ शिक्षा नीति का नहीं बल्कि सत्ता संतुलन का भी सवाल है।
आगे क्या करेगी मोदी सरकार
सबसे बड़ा सवाल यही है कि UGC new rules Supreme Court stay के बाद केंद्र सरकार का अगला कदम क्या होगा। क्या सरकार सुप्रीम कोर्ट की रोक को स्वीकार करते हुए 2012 के नियमों को पूरी तरह बहाल करेगी, जिनमें झूठी शिकायत करने वालों पर कार्रवाई का प्रावधान था, या फिर वह कोर्ट में अपने फैसले को मजबूती से डिफेंड करने की कोशिश करेगी। एक विकल्प यह भी है कि सरकार कोर्ट के सुझाव के मुताबिक एक नई हाई लेवल कमेटी बनाए और नया मसौदा लाए, ताकि सामाजिक संतुलन और संवैधानिक मूल्यों के बीच रास्ता निकाला जा सके। फिलहाल 19 मार्च तक यह मुद्दा ठंडे बस्ते में है, लेकिन राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में इस पर मंथन तेज है। UGC new rules Supreme Court stay ने यह साफ कर दिया है कि शिक्षा से जुड़े फैसले सिर्फ प्रशासनिक नहीं होते, उनका असर समाज के ताने-बाने और राजनीति की दिशा पर भी पड़ता है।






