February 11, 2026 5:34 AM

UGC New Regulations 2026 Explained: जातिगत भेदभाव रोकने के नए नियम, विरोध और पूरी सच्चाई !!

जवाहरलाल नेहरू का एक मशहूर कथन है कि आपको कोई बात पसंद हो या न हो, तथ्य वही रहते हैं। यही बात UGC New Regulations 2026 पर भी लागू होती है। यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन यानी University Grants Commission** ने हाल ही में उच्च शिक्षा संस्थानों में जातिगत

EDITED BY: Vishal Yadav

UPDATED: Thursday, January 29, 2026

UGC New Regulations 2026 Explained: जातिगत भेदभाव रोकने के नए नियम, विरोध और पूरी सच्चाई !!

जवाहरलाल नेहरू का एक मशहूर कथन है कि आपको कोई बात पसंद हो या न हो, तथ्य वही रहते हैं। यही बात UGC New Regulations 2026 पर भी लागू होती है। यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन यानी University Grants Commission** ने हाल ही में उच्च शिक्षा संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकने के लिए 14 पन्नों का एक नया रेगुलेशन जारी किया। इसके बाद देश भर में बहस शुरू हो गई। एक पक्ष मानता है कि यह नियम कैंपस में बराबरी और न्याय को मजबूत करेंगे, जबकि दूसरा पक्ष इसे सवर्णों के खिलाफ और संदेह पैदा करने वाला बता रहा है। ऐसे में जरूरी है कि राय बनाने से पहले UGC New Regulations 2026 को तथ्यों के साथ समझा जाए।

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UGC New Regulations 2026 Explained: जातिगत भेदभाव रोकने के नए नियम, विरोध और पूरी सच्चाई !!

UGC New Regulations 2026 की पृष्ठभूमि और जरूरत

UGC New Regulations 2026 अचानक नहीं आए हैं। इसके पीछे एक लंबा सामाजिक और कानूनी संदर्भ है। 17 जनवरी 2016 को हैदराबाद यूनिवर्सिटी के पीएचडी छात्र Rohith Vemula की मौत और 22 जनवरी 2019 को मुंबई के टोपीवाला मेडिकल कॉलेज की छात्रा Payal Tadvi की आत्महत्या ने देश को झकझोर दिया। दोनों मामलों में परिजनों ने जातिगत भेदभाव को बड़ी वजह बताया। इसके बाद 2019 में सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई, जिसमें कॉलेज और यूनिवर्सिटी कैंपस में जातिगत भेदभाव रोकने के लिए ठोस व्यवस्था की मांग की गई। सुप्रीम कोर्ट ने UGC से 2012 के नियमों के तहत दर्ज सभी शिकायतों का डेटा मांगा। रिपोर्ट में सामने आया कि 2019 से 2024 के बीच जातिगत भेदभाव की शिकायतों में करीब 118 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। इसके बाद कोर्ट ने नए और सख्त गाइडलाइंस लाने का निर्देश दिया। इसी प्रक्रिया का नतीजा हैं UGC New Regulations 2026, जिनका मकसद उच्च शिक्षा संस्थानों में धर्म, जाति, लिंग, जन्म स्थान और विकलांगता के आधार पर होने वाले भेदभाव को रोकना है।

नए नियमों में क्या है: Equity, Discrimination और पूरा मैकेनिज्म

UGC New Regulations 2026 में कुछ शब्द बार-बार आते हैं, जिन्हें समझना जरूरी है। पहला है caste based discrimination यानी जाति आधारित भेदभाव। इन नियमों में इसे अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के सदस्यों के खिलाफ केवल उनकी जाति के आधार पर किए गए भेदभाव के रूप में परिभाषित किया गया है। भेदभाव का मतलब सिर्फ गाली देना या अपमान नहीं, बल्कि पढ़ाई में पीछे करना, अलग-थलग करना, बिना वजह सुविधा रोकना या देना भी है। अगर किसी के साथ ऐसा व्यवहार होता है जिससे उसे बराबरी का अधिकार न मिले या उसकी गरिमा को ठेस पहुंचे, तो वह भेदभाव माना जाएगा।
यहां equity का कॉन्सेप्ट भी समझाया गया है। Equality और equity अलग हैं। Equality का मतलब सबको एक जैसा देना, जबकि equity का मतलब जरूरत के हिसाब से सहायता देना ताकि सबको बराबरी का अवसर मिल सके। UGC New Regulations 2026 इसी equity के सिद्धांत पर आधारित हैं।\

UGC New Regulations 2026 Explained: जातिगत भेदभाव रोकने के नए नियम, विरोध और पूरी सच्चाई !!


इन नियमों को लागू करने के लिए तीन स्तर का सिस्टम बनाया गया है। पहला है Equal Opportunity Centre, जो वंचित वर्गों से जुड़ी नीतियों पर नजर रखेगा और जरूरत पड़ने पर जिला प्रशासन और पुलिस के साथ काम करेगा। दूसरा है Equity Committee, जिसमें संस्थान प्रमुख के साथ OBC, SC, ST, महिला और दिव्यांग वर्ग के प्रतिनिधि अनिवार्य होंगे। तीसरा है Equity Squad, जो कैंपस में भेदभाव की घटनाओं पर लगातार नजर रखेगा। हर संस्थान में 24 घंटे की हेल्पलाइन और ऑनलाइन शिकायत व्यवस्था होगी। शिकायत मिलने पर 24 घंटे के भीतर समिति बैठक करेगी और 15 कार्यदिवस में रिपोर्ट देगी। दोषी पाए जाने पर सस्पेंशन से लेकर निष्कासन तक की कार्रवाई हो सकती है और गंभीर मामलों में SC/ST Act या IPC के तहत जेल और जुर्माने का प्रावधान भी है।

2012 बनाम 2026: असली फर्क क्या है

UGC New Regulations 2026 और 2012 के नियमों के बीच बड़ा फर्क है। 2012 के नियम advisory nature के थे यानी सुझावात्मक। उनमें यह साफ नहीं था कि नियम न मानने पर संस्थानों पर क्या कार्रवाई होगी। नए नियम mandatory हैं और UGC को अधिकार दिया गया है कि वह नियम तोड़ने वाले संस्थानों को ग्रांट से बाहर कर सके, डिग्री या ऑनलाइन प्रोग्राम रोक सके। 2012 में Equal Opportunity Cell का जिक्र था लेकिन उसकी संरचना और प्रक्रिया स्पष्ट नहीं थी। नए नियमों में शिकायत से लेकर अपील तक का पूरा टाइमलाइन तय किया गया है। सबसे अहम बदलाव यह है कि 2012 के नियमों में OBC का स्पष्ट जिक्र नहीं था, जबकि UGC New Regulations 2026 में OBC के खिलाफ भेदभाव को भी साफ तौर पर शामिल किया गया है।

विरोध क्यों हो रहा है और आगे क्या

UGC New Regulations 2026 के विरोध की सबसे बड़ी वजह आशंका है। आलोचकों का कहना है कि जाति आधारित भेदभाव की परिभाषा पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, जिससे नियमों का मिसयूज हो सकता है। जनरल कैटेगरी के छात्रों और शिक्षकों के लिए झूठी शिकायतों से बचाव का कोई साफ प्रावधान नहीं दिखता। कुछ नेताओं ने भी यही चिंता जताई है। वहीं सरकार का कहना है कि किसी के साथ अन्याय नहीं होगा और नियमों का दुरुपयोग नहीं होने दिया जाएगा।
आंकड़े बताते हैं कि समस्या वास्तविक है। सुप्रीम कोर्ट के रिकॉर्ड के मुताबिक 2004 से 2024 के बीच 115 छात्रों ने जातिगत भेदभाव के कारण जान दी। UGC की रिपोर्ट कहती है कि 2019-20 में जहां 173 शिकायतें थीं, वहीं 2023-24 में यह संख्या बढ़कर 378 हो गई। जब समस्या बढ़ रही है तो नियम सख्त होना स्वाभाविक है। सवाल सिर्फ संतुलन का है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने इन नियमों पर रोक लगाई है और अगली सुनवाई का इंतजार है। आगे या तो संशोधन होंगे या नया संतुलित ढांचा आएगा। लेकिन इतना साफ है कि UGC New Regulations 2026 ने देश को शिक्षा, समानता और सामाजिक न्याय पर एक जरूरी बहस दे दी है।

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