ट्रंप का नया टेरिफ ऐलान और यूरोप में हलचल
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump जो अक्सर दूसरे देशों पर टेरिफ लगाने की धमकी देते रहे हैं अब खुद उसी रणनीति के जवाब में घिरते नजर आ रहे हैं। ग्रीनलैंड को अमेरिका में शामिल करने की जिद और यूरोपीय देशों पर दबाव बनाने की नीति के तहत ट्रंप ने 17 जनवरी को बड़ा ऐलान किया।
ट्रंप ने कहा कि
-
1 फरवरी से यूरोपीय देशों से आने वाले सामान पर 10% टेरिफ लगेगा
-
1 जून से यही टेरिफ बढ़ाकर 25% कर दिया जाएगा
इस Trump Tariff ऐलान के बाद यूरोपीय संघ में तुरंत हलचल शुरू हो गई।
ये भी पढ़े: BMC Election Results 2026: BJP बनी सबसे बड़ी पार्टी, फिर भी क्यों नाखुश है पार्टी?

ब्रसेल्स में इमरजेंसी मीटिंग, ट्रंप पर ब्लैकमेल का आरोप
18 जनवरी को बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स में European Union की इमरजेंसी बैठक बुलाई गई। इस बैठक में जर्मनी, फ्रांस समेत कई देशों ने ट्रंप की टेरिफ धमकी को खुला ब्लैकमेल बताया।
फ्रांस की तरफ से कहा गया कि अब यूरोप को ऐसे कदम उठाने चाहिए जो पहले कभी नहीं उठाए गए। Financial Times की रिपोर्ट के मुताबिक यूरोपीय संघ अमेरिका पर 93 अरब यूरो यानी करीब 107.7 अरब डॉलर तक के जवाबी टेरिफ लगाने पर विचार कर रहा है।
यह वही टेरिफ पैकेज है जिसे जुलाई 2025 में अमेरिका-यूरोप के बीच हुए अस्थायी व्यापार समझौते के बाद टाल दिया गया था।
Anti Coercion Instrument: यूरोप का ‘ट्रेड बाजूका’
इस पूरे विवाद में यूरोप का सबसे बड़ा हथियार बन सकता है Anti Coercion Instrument। फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron ने इसे यूरोप का ट्रेड बाजूका बताया।
इस कानून के तहत:
-
अमेरिकी कंपनियों की यूरोपीय बाजार में एंट्री सीमित की जा सकती है
-
सरकारी टेंडर और टेक्नोलॉजी सेक्टर में रोक लग सकती है
-
अमेरिका पर सीधा आर्थिक दबाव डाला जा सकता है
मैक्रों ने साफ कहा कि अब इस इंस्ट्रूमेंट को पहली बार इस्तेमाल करने का वक्त आ गया है।

ग्रीनलैंड विवाद ने बढ़ाया तनाव
Trump Tariff विवाद सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं है। ग्रीनलैंड को अमेरिका में शामिल करने की ट्रंप की मुहिम ने हालात और बिगाड़ दिए हैं। इस मुद्दे पर यूरोप के आठ देशों ने संयुक्त बयान जारी कर डेनमार्क और ग्रीनलैंड के साथ एकजुटता दिखाई।
इन देशों में:
-
फ्रांस
-
जर्मनी
-
स्वीडन
-
नीदरलैंड्स
-
फिनलैंड
-
नॉर्वे
-
ब्रिटेन
-
डेनमार्क
शामिल हैं। इन देशों ने आर्कटिक क्षेत्र में अपनी सैन्य तैनाती भी बढ़ा दी है।
जवाबी टेरिफ कब से लागू हो सकते हैं?
Reuters के मुताबिक:
-
यूरोपीय संघ का जवाबी टेरिफ 6 फरवरी से लागू हो सकता है
-
22 जनवरी को EU का शिखर सम्मेलन बुलाने पर विचार चल रहा है
-
हालांकि कुछ राजनयिकों का कहना है कि पहले कूटनीति को मौका दिया जाएगा
EU का रुख साफ है कि अगर अमेरिका 1 फरवरी को टेरिफ लागू करता है तो यूरोप भी पीछे नहीं हटेगा।
अमेरिका-यूरोप व्यापार रिश्तों पर बड़ा खतरा
अमेरिका और यूरोप दुनिया के सबसे बड़े ट्रेड पार्टनर्स में से हैं। हर साल दोनों के बीच हजारों अरब डॉलर का व्यापार होता है। अमेरिका यूरोप को:
-
ऊर्जा
-
टेक्नोलॉजी
-
डिफेंस सिस्टम
सप्लाई करता है। वहीं यूरोप अमेरिका को:
-
मशीनरी
-
ऑटो पार्ट्स
-
केमिकल्स
-
फार्मास्यूटिकल्स
निर्यात करता है। ऐसे में Trump Tariff और EU retaliatory tariffs से ग्लोबल ट्रेड वॉर का खतरा बढ़ता दिख रहा है।
आगे क्या होगा?
अब सबकी नजर अमेरिका-EU बातचीत पर टिकी है। यूरोपीय नेताओं ने संकेत दिया है कि अगर ट्रंप अपनी धमकियों पर कायम रहे तो जवाबी कार्रवाई तेज होगी। आने वाले हफ्ते तय करेंगे कि यह टकराव बातचीत में बदलेगा या खुली ट्रेड वॉर में।






