Tejaswi Yadav: बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले Tejaswi Yadav ने अपनी नई राजनीतिक रणनीति तैयार कर ली है। उनका फोकस है कुशवाहा और भूमिहार वोट बैंक पर, जिनके दम पर वे एनडीए के मजबूत गठबंधन को तोड़ने और सत्ता की बाज़ी पलटने की कोशिश कर रहे हैं।

नीतीश कुमार के लवकुश वोटर यानी कुर्मी और कोयरी जाति के वोटर अब तक एनडीए के साथ रहे हैं। लेकिन Tejaswi Yadav अब इस गठजोड़ को तोड़कर कम से कम कुशवाहा वोटरों को अपने पाले में लाना चाहते हैं। इसके लिए उन्होंने संतोष कुशवाहा जैसे पुराने नेता को आरजेडी में शामिल किया और कई अन्य कुशवाहा नेताओं को टिकट देने की योजना बनाई है।
Tejaswi Yadav ने पिछले लोकसभा चुनाव के अनुभव से सबक लिया है। पिछली बार 70 सीटों में से 19 जीतने के बावजूद मामूली वोट अंतर की वजह से मुख्यमंत्री बनने का मौका छूट गया था। इस बार उन्होंने तीन-तीन सर्वे कराकर उम्मीदवारों का चयन किया है।

उनकी रणनीति सिर्फ कुशवाहा वोटर तक सीमित नहीं है। Tejaswi Yadav अति पिछड़ों (EBC) और भूमिहार वोटरों को भी जोड़ना चाहते हैं। उन्होंने जगतानंद सिंह को हटाकर मंगनी लाल मंडल को आरजेडी का प्रदेश अध्यक्ष और रणविजय साहू को प्रधान महासचिव बनाया। इसके अलावा वीआईपी पार्टी के साथ गठबंधन भी किया गया है।
पिछली बार आरजेडी ने अपर कास्ट (ब्राह्मण, राजपूत, भूमिहार) के उम्मीदवारों का चयन कांग्रेस पर छोड़ दिया था, लेकिन इस बार Tejaswi Yadav खुद इसे नियंत्रित कर रहे हैं। लगभग एक दर्जन भूमिहार उम्मीदवार इस बार मैदान में होंगे।
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, Tejaswi Yadav का यह प्लान अगर सफल हुआ तो बिहार में एनडीए का खेल पलट सकता है, और सत्ता में उनकी वापसी संभव हो सकती है। कुशवाहा और भूमिहार वोट बैंक का समर्थन उनकी सबसे बड़ी ताकत बन सकता है।






