Sir Creek Dispute: भारत और पाकिस्तान के बीच दशकों से चला आ रहा Sir Creek Dispute एक बार फिर चर्चा में है। हाल ही में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुजरात के भुज में बयान देते हुए पाकिस्तान को दो टूक चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तान ने सर क्रीक के पास किसी भी तरह की आक्रामक कार्रवाई की तो भारत का जवाब इतना निर्णायक होगा कि “इतिहास और भूगोल दोनों बदल जाएंगे।”
राजनाथ सिंह ने यह भी कहा कि पाकिस्तान को याद रखना चाहिए — “कराची तक जाने वाला रास्ता सर क्रीक से होकर गुजरता है।”
यह बयान ऐसे समय आया है जब पाकिस्तान अपनी सीमा से सटे इलाकों में सैन्य गतिविधियाँ बढ़ा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान ने सर क्रीक के आसपास नए सैन्य ठिकाने, एयर स्ट्रिप्स और छोटे गढ़ों का निर्माण शुरू कर दिया है। इस इलाके में आम नागरिकों की आवाजाही भी रोक दी गई है और प्रवेश के लिए सेना की अनुमति जरूरी कर दी गई है।
भारत ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि वायुसेना इस क्षेत्र में पूरी तरह चौकस है और किसी भी असामान्य गतिविधि का तुरंत जवाब दिया जाएगा।
क्या है Sir Creek का विवाद?
Sir Creek 96 किलोमीटर लंबा दलदली जलमार्ग है जो गुजरात के कच्छ जिले और पाकिस्तान के सिंध प्रांत के बीच स्थित है। यह अरब सागर में जाकर मिलता है। दोनों देशों के बीच विवाद इस बात को लेकर है कि सीमा इस क्रीक के बीचोंबीच (थालवेग लाइन) से गुजरेगी या इसके पूर्वी किनारे से।
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भारत का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार सीमा उस स्थान से गुजरनी चाहिए जहाँ पानी सबसे गहरा और नेविगेशन योग्य हो, यानी क्रीक के मध्य भाग से। वहीं पाकिस्तान दावा करता है कि पूरी क्रीक उसकी सीमा के अंदर आती है।
यह विवाद ब्रिटिश काल से चला आ रहा है। 1914 में बॉम्बे गवर्नमेंट के एक प्रस्ताव में विरोधाभासी बातें लिखी गई थीं, जिसने भ्रम पैदा किया। 1965 के भारत-पाक युद्ध के दौरान यह इलाका रणनीतिक दृष्टि से बेहद अहम साबित हुआ, क्योंकि यहां से पाकिस्तान के समुद्री ठिकानों पर नजर रखी जा सकती है।
क्यों है भारत के लिए महत्वपूर्ण?
सर क्रीक का क्षेत्र तेल और प्राकृतिक गैस की संभावनाओं से भरपूर है। साथ ही यह एशिया के सबसे बड़े मछली पकड़ने वाले क्षेत्रों में से एक है। लेकिन इसका सबसे बड़ा महत्व राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है — क्योंकि इसी रास्ते से पाकिस्तान कई बार भारत में घुसपैठ की कोशिशें कर चुका है।
भारत की सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, अगर पाकिस्तान इस इलाके में अपने सैन्य ढांचे को मजबूत करता है तो यह पूरे वेस्टर्न फ्रंट (पश्चिमी मोर्चे) के लिए खतरा बन सकता है।
राजनाथ सिंह का बयान इसीलिए भारत की दृढ़ नीति को दर्शाता है — कि अब किसी भी कीमत पर राष्ट्रीय सीमाओं की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जाएगा।






