February 11, 2026 5:24 AM

Shankaracharya Avimukteshwaranand Prayagraj Row: माफी की शर्त पर संगम स्नान को तैयार, प्रशासन बैकफुट पर !!

Shankaracharya Avimukteshwaranand Prayagraj row में बड़ा मोड़ माफी और प्रोटोकॉल की शर्त पर संगम स्नान को तैयार 1 फरवरी को माघी पूर्णिमा पर प्रयागराज लौटने के संकेत.......

EDITED BY: Vishal Yadav

UPDATED: Friday, January 30, 2026

Shankaracharya Avimukteshwaranand Prayagraj Row: माफी की शर्त पर संगम स्नान को तैयार, प्रशासन बैकफुट पर !!

माघ मेले के दौरान प्रयागराज में पैदा हुआ Shankaracharya Avimukteshwaranand Prayagraj row अब एक अहम मोड़ पर पहुंच गया है। 11 दिनों तक चले धरने और उसके बाद प्रयागराज छोड़कर वाराणसी जाने के फैसले के बाद प्रशासन अब बैकफुट पर नजर आ रहा है। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने साफ कर दिया है कि माघी पूर्णिमा यानी 1 फरवरी को संगम स्नान तभी होगा, जब उनकी दो शर्तें पूरी की जाएंगी। पहली शर्त, घटना के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की लिखित माफी। दूसरी शर्त, चारों शंकराचार्यों के लिए तय प्रोटोकॉल का पूर्ण पालन। इन शर्तों के बाद अब संकेत मिल रहे हैं कि प्रयागराज प्रशासन माफी मांगने को तैयार हो गया है, जिससे यह विवाद फिलहाल शांत होता दिख रहा है।

ये भी पढ़े: UGC New Regulations 2026 Explained: जातिगत भेदभाव रोकने के नए नियम, विरोध और पूरी सच्चाई !!

Shankaracharya Avimukteshwaranand Prayagraj Row: माफी की शर्त पर संगम स्नान को तैयार, प्रशासन बैकफुट पर !!

Shankaracharya Avimukteshwaranand Prayagraj row की शुरुआत कैसे हुई

इस पूरे विवाद की जड़ 18 जनवरी, मौनी अमावस्या के दिन की घटना है। उस दिन अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पालकी में बैठकर संगम स्नान के लिए जा रहे थे। पुलिस और मेला प्रशासन ने सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन का हवाला देते हुए पालकी रोक दी और पैदल जाने को कहा। इसी बात को लेकर शंकराचार्य के शिष्यों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जिसकी तस्वीरें और वीडियो भी सामने आए। शंकराचार्य ने इसे न सिर्फ अपना बल्कि संन्यासियों, ब्रह्मचारियों, वृद्धों और महिलाओं का अपमान बताया। इसी विरोध में वह अपने शिविर के बाहर धरने पर बैठ गए। यह धरना पूरे 11 दिन तक चला और माघ मेले के सबसे बड़े धार्मिक आयोजन के बीच प्रशासन के लिए यह एक बड़ी चुनौती बन गया। Shankaracharya Avimukteshwaranand Prayagraj row धीरे-धीरे सिर्फ एक प्रशासनिक मुद्दा नहीं रहा, बल्कि धार्मिक सम्मान और परंपरा से जुड़ा सवाल बन गया।

धरना, वाराणसी प्रस्थान और प्रशासन की कोशिशें

धरने के दौरान प्रशासन ने कई बार शंकराचार्य को मनाने की कोशिश की। 27 जनवरी को अधिकारियों के साथ एक गोपनीय बैठक भी हुई, जिसमें मेला प्रशासन ने खेद जताया, लेकिन लिखित और सार्वजनिक माफी देने से इनकार कर दिया। इसी कारण बात नहीं बनी। अगले दिन 28 जनवरी को शंकराचार्य प्रयागराज छोड़कर वाराणसी चले गए। इस कदम ने प्रशासन की चिंता और बढ़ा दी। दैनिक भास्कर सहित कई रिपोर्ट्स के मुताबिक अधिकारियों को उम्मीद थी कि शंकराचार्य माघ पूर्णिमा तक मेले में ही रहेंगे और तब तक मामला सुलझा लिया जाएगा। लेकिन उनके अचानक वाराणसी चले जाने से प्रशासन को लगा कि मामला हाथ से निकल सकता है। Shankaracharya Avimukteshwaranand Prayagraj row अब राज्य स्तर का विषय बन गया, जिसके बाद लखनऊ से बड़े अधिकारियों ने हस्तक्षेप किया।

माफी और प्रोटोकॉल की शर्त पर बनी सहमति

शंकराचार्य के मीडिया प्रभारी शैलेंद्र योगी के अनुसार, लखनऊ के दो वरिष्ठ अधिकारियों ने उनसे संपर्क किया और भरोसा दिलाया कि माघी पूर्णिमा पर उन्हें पूरे सम्मान और प्रोटोकॉल के साथ संगम स्नान कराया जाएगा। इतना ही नहीं, अब प्रशासन लिखित माफी देने पर भी सहमत होता दिख रहा है। यही वह बिंदु है जहां Shankaracharya Avimukteshwaranand Prayagraj row में बड़ा मोड़ आया है। शंकराचार्य पहले भी स्पष्ट कर चुके हैं कि वह किसी व्यक्तिगत सुविधा या विशेष प्रबंध के बदले समझौता नहीं करेंगे। उन्होंने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि अगर वह बिना माफी के प्रशासन का प्रस्ताव स्वीकार कर लेते, तो यह उन तमाम साधु-संतों और श्रद्धालुओं के अपमान की कीमत पर होता, जिन्हें मौनी अमावस्या के दिन रोका गया। इसी कारण उन्होंने प्रयागराज छोड़ना बेहतर समझा। अब जब प्रशासन माफी और चारों शंकराचार्यों के प्रोटोकॉल पर राजी हो रहा है, तो संकेत हैं कि 1 फरवरी को वह प्रयागराज लौटेंगे और संगम स्नान करेंगे।

Shankaracharya Avimukteshwaranand Prayagraj Row: माफी की शर्त पर संगम स्नान को तैयार, प्रशासन बैकफुट पर !!

धार्मिक सम्मान बनाम प्रशासनिक व्यवस्था की बहस

Shankaracharya Avimukteshwaranand Prayagraj row ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि बड़े धार्मिक आयोजनों में प्रशासनिक व्यवस्था और धार्मिक परंपराओं के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। माघ मेला और कुंभ जैसे आयोजनों में करोड़ों श्रद्धालु पहुंचते हैं, जहां भीड़ प्रबंधन एक बड़ी चुनौती होती है। लेकिन दूसरी ओर, संतों और शंकराचार्यों का धार्मिक महत्व और परंपरागत सम्मान भी उतना ही अहम है। शंकराचार्य का कहना है कि उनका विरोध किसी व्यक्तिगत अपमान का नहीं, बल्कि पूरे संत समाज के सम्मान का मुद्दा है। वहीं प्रशासन का तर्क है कि सुरक्षा और व्यवस्था सर्वोपरि है। इस टकराव ने Shankaracharya Avimukteshwaranand Prayagraj row को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया। अब जब प्रशासन माफी के लिए तैयार हो रहा है, तो इसे एक तरह से संत समाज की नैतिक जीत के रूप में देखा जा रहा है।

आगे क्या होगा

अगर सब कुछ तय योजना के मुताबिक हुआ, तो 1 फरवरी माघी पूर्णिमा के दिन शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती प्रयागराज पहुंचेंगे और संगम में स्नान करेंगे। प्रशासन की ओर से पूरे प्रोटोकॉल और सम्मान की तैयारी की जा रही है। हालांकि यह भी साफ है कि इस घटना के बाद मेला प्रशासन की कार्यप्रणाली और SOP पर सवाल उठेंगे और भविष्य में ऐसे आयोजनों में संतों के प्रोटोकॉल को लेकर ज्यादा स्पष्ट दिशा-निर्देश बनाए जा सकते हैं। फिलहाल Shankaracharya Avimukteshwaranand Prayagraj row एक ऐसे मुकाम पर है, जहां टकराव के बाद संवाद और समाधान की तस्वीर उभरती दिख रही है।

Shankaracharya Avimukteshwaranand Prayagraj Row: माफी की शर्त पर संगम स्नान को तैयार, प्रशासन बैकफुट पर !!

Share :

Leave a Reply

Related Post

×