Ritesh Pandey: भोजपुरी सिनेमा और म्यूजिक की दुनिया से अब राजनीति तक का सफर तय कर चुके Ritesh Pandey इन दिनों बिहार चुनाव 2025 की वजह से सुर्खियों में हैं। जन स्वराज पार्टी ने उन्हें करगहर विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया है, जो रोहतास जिले में आती है। यह वही इलाका है जहां Ritesh Pandey का पैतृक गांव है। लेकिन राजनीति में आने से पहले उनका सफर बिल्कुल आम नहीं था, बल्कि मेहनत और संघर्ष से भरा रहा है।
कौन हैं Ritesh Pandey, जिनका गाना ‘हेलो कौन’ 100 करोड़ बार देखा गया और अब राजनीति में आजमा रहे किस्मत
साल 2019 में जब TikTok का जमाना था, तब Ritesh Pandey का गाना “हेलो कौन? हम बोल रहे हैं” हर घर में गूंजता था। यह गाना रिकॉर्ड बन गया और YouTube पर पहला भोजपुरी सॉन्ग बना जिसने 1 बिलियन से ज्यादा व्यूज पार किए। इसके बाद रितेश का नाम भोजपुरी म्यूजिक इंडस्ट्री में तेजी से चमका। “पियावा से पहिले हमार रहलू”, “लौंडिया लंदन से लाएंगे”, “जा चंदा” जैसे गानों ने उन्हें सुपरहिट बना दिया।

रितेश का जन्म मई 1991 में रोहतास जिले में हुआ था। उनके पिता कमला पांडे बनारस के एक स्कूल में टीचर थे। 12वीं में बायोलॉजी विषय से 72% नंबर लाने के बाद उन्हें कोटा जाकर मेडिकल की तैयारी करनी थी, लेकिन दिल संगीत में था। उन्होंने बनारस की महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में म्यूजिक कोर्स में दाखिला लिया। परिवार खुश नहीं था, पर रितेश ने ठान लिया था कि म्यूजिक ही उनका रास्ता है।
पहला एल्बम चला नहीं। दुकानदार कैसेट रखने से मना करते थे, इसलिए उन्होंने दो साल एक स्टूडियो में काम किया और रिकॉर्डिंग सीखी। कभी टेलीनोर कंपनी की पर्चियां बांटीं, कभी शादी पार्टियों में डीजे फ्लोर लगाया, तब जाकर 2015 में उनका एल्बम “करवा तेल” हिट हुआ। इसके बाद रितेश ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
क्या भोजपुरी स्टार Ritesh Pandey तोड़ पाएंगे कांग्रेस का गढ़ और जातीय समीकरणों का चक्रव्यूह?
2016 में उन्होंने फिल्म “बलमा बिहारवाला 2” से एक्टिंग की शुरुआत की। “तोहरा में बसेला जान”, “रानी वेट्स राजा”, “लंका में डंका” जैसी फिल्मों से वो भोजपुरी सिनेमा का जाना-माना चेहरा बन गए। हालांकि कुछ गानों की लाइनों पर विवाद भी उठा और एक्ट्रेस अक्षरा सिंह के साथ नाम जुड़ने पर मीडिया की सुर्खियों में भी रहे।
अब जब राजनीति में उतरे हैं, तो सवाल यह है कि क्या संगीत और सिनेमा से मिली लोकप्रियता वोट में बदल पाएगी। करगहर सीट का जातीय समीकरण जटिल है — कुर्मी, रविदास, वैश्य, राजपूत और पासवान वोटर यहां प्रभाव रखते हैं। कांग्रेस की पकड़ इस इलाके में पुरानी रही है, इसलिए जन स्वराज पार्टी के लिए चुनौती बड़ी है।
भले ही रितेश का फैनबेस उत्तर प्रदेश में ज्यादा मजबूत रहा हो, लेकिन बिहार के दक्षिणी हिस्से में जन स्वराज की पकड़ और रितेश की पहचान मिलकर चुनावी तस्वीर को दिलचस्प बना सकते हैं।






