RBI Fast Cheque Clearing System: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देश भर में 4 अक्टूबर 2025 से एक नया फास्ट चेक क्लियरिंग सिस्टम लागू किया है। RBI का दावा था कि इस नई व्यवस्था से चेक उसी दिन क्लियर हो जाएंगे जिस दिन उन्हें बैंक में जमा किया जाएगा और पैसा तुरंत खाते में आ जाएगा। लेकिन इस सिस्टम के लागू होने के बाद से ही ग्राहकों की शिकायतें बढ़ गई हैं। सोशल मीडिया पर लोग बता रहे हैं कि चेक क्लियर होने में कई-कई दिनों की देरी हो रही है, जिससे त्योहारों के सीजन में लोगों की सैलरी और गाड़ियों की डिलीवरी जैसी जरूरी चीजें अटक गई हैं।
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कई यूज़र्स ने सोशल मीडिया पर अपनी परेशानी साझा की है। मंजुल नाम के एक यूज़र ने लिखा कि उन्होंने 3 अक्टूबर को किसी को चेक दिया, उनके अकाउंट से 8 अक्टूबर को पैसे कट गए, लेकिन बाद में उन्हें मैसेज आया कि चेक अस्वीकृत हो गया है। जब वह बैंक पहुंचे तो मैनेजर ने कहा कि नए सिस्टम के कारण कई चेक रिजेक्ट हो रहे हैं और वे खुद नहीं बता सकते कि असल में क्या हुआ है। इसी तरह, डॉ. मुकुल अग्रवाल नाम के एक अन्य यूज़र ने बताया कि बैंकों में तकनीकी दिक्कतों, स्टाफ की ट्रेनिंग में कमी और चेक की खराब स्कैनिंग जैसी समस्याओं के कारण चेक क्लियर होने में 48 घंटे से भी ज्यादा का समय लग रहा है।
आखिर यह नया सिस्टम है क्या और यह काम कैसे करता है? RBI द्वारा लागू की गई यह नई व्यवस्था ‘कंटीन्यूअस क्लियरिंग मोड’ पर आधारित है। इसके तहत, सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे के बीच जमा हुए चेकों को बैंक तुरंत स्कैन करके उनकी इमेज और डेटा क्लियरिंग हाउस को भेज देगा। इस प्रक्रिया को दो चरणों में लागू किया जा रहा है। पहले चरण में, जो 4 अक्टूबर 2025 से 2 जनवरी 2026 तक चलेगा, बैंकों को शाम 7 बजे तक यह बताना होगा कि चेक क्लियर हो सकता है या नहीं। अगर बैंक समय पर जवाब नहीं देता, तो चेक को ऑटो-अप्रूव मान लिया जाएगा। इसके बाद 3 जनवरी 2026 से शुरू होने वाले दूसरे चरण में बैंकों को यह फैसला लेने के लिए सिर्फ 3 घंटे का समय मिलेगा।
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इससे पहले देश में ‘बैचिंग सिस्टम’ चलता था। इसमें बैंक दिन भर जमा हुए चेकों को इकट्ठा करके शाम को एक साथ बैच में क्लियरिंग के लिए भेजते थे। इस प्रक्रिया में चेक क्लियर होने में आमतौर पर एक से दो दिन और आउटस्टेशन चेकों में तीन से चार दिन भी लग जाते थे। RBI ने इसी देरी को खत्म करने के लिए नया सिस्टम लागू किया है।
तो फिर नए सिस्टम में दिक्कत कहाँ आ रही है? एक रिपोर्ट के मुताबिक, ज्यादातर बैंकों को चेक की खराब इमेज क्वालिटी और स्कैनिंग में आ रही दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इमेज धुंधली होने या डेटा मिसमैच होने के कारण चेक रिजेक्ट हो रहे हैं। इसके अलावा, बैंक का स्टाफ अभी भी नए सिस्टम से पूरी तरह परिचित नहीं है और उन्हें उचित ट्रेनिंग नहीं दी गई है। सिस्टम इंटीग्रेशन में भी कुछ खामियां बताई जा रही हैं, जिससे बैंक का सिस्टम और क्लियरिंग हाउस का सिस्टम ठीक से जुड़ नहीं पा रहा है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि ये शुरुआती समस्याएं हैं जो किसी भी नई टेक्नोलॉजी को अपनाने पर आती हैं, लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि RBI को इसे सीधे देशभर में लागू करने से पहले किसी छोटे शहर में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर टेस्ट करना चाहिए था।






