Kolkata, March 6:
Defence Minister Rajnath Singh ने West Asia Conflict के बीच Middle East में बढ़ते तनाव और वैश्विक व्यापार पर इसके प्रभाव को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि Middle East में चल रही परिस्थितियाँ “Highly Unusual” हैं और इस क्षेत्र में पैदा हुई अस्थिरता का असर केवल ऊर्जा क्षेत्र ही नहीं बल्कि वैश्विक Supply Chain और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ रहा है।
Rajnath Singh ने यह टिप्पणी Sagar Sankalp Maritime Conclave के दौरान Kolkata में संबोधन करते हुए की। उन्होंने कहा कि West Asia Conflict के कारण समुद्री व्यापार मार्गों और ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है, जिसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

Middle East में अस्थिरता से प्रभावित हो रही Global Supply Chain
अपने संबोधन में Rajnath Singh ने कहा कि Middle East क्षेत्र विश्व की ऊर्जा सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने विशेष रूप से Strait of Hormuz और Persian Gulf region का उल्लेख करते हुए कहा कि यह इलाका वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का एक प्रमुख केंद्र है।
उन्होंने कहा कि यदि इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का संघर्ष या अस्थिरता उत्पन्न होती है, तो उसका सीधा प्रभाव तेल और गैस की आपूर्ति पर पड़ता है।
Rajnath Singh ने कहा:
“Middle East में जो कुछ हो रहा है, वह बेहद असामान्य स्थिति है। अभी यह कहना मुश्किल है कि आगे स्थिति किस दिशा में जाएगी, लेकिन यह स्पष्ट है कि इस क्षेत्र में किसी भी तरह की अशांति वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार को प्रभावित करती है।”
उन्होंने यह भी कहा कि West Asia Conflict का प्रभाव केवल ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि कई अन्य क्षेत्रों में भी Supply Chain Disruptions देखने को मिल रहे हैं।
वैश्विक व्यापार और अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा असर
Rajnath Singh के अनुसार Middle East क्षेत्र में तनाव बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय व्यापार के कई महत्वपूर्ण मार्ग प्रभावित हो सकते हैं।
Strait of Hormuz जैसे समुद्री मार्गों से दुनिया के बड़े हिस्से में तेल और गैस की आपूर्ति होती है। यदि इन मार्गों में बाधा आती है, तो इसका प्रभाव तेल की कीमतों, शिपिंग लागत और वैश्विक व्यापार की गति पर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि West Asia Conflict के कारण शिपिंग लागत बढ़ सकती है और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी चुनौतियाँ भी सामने आ सकती हैं। इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार की लागत में वृद्धि होने की संभावना रहती है।
भारत जैसे देशों के लिए यह स्थिति विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि देश की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा होता है।
“Abnormality is becoming the new normal”
Rajnath Singh ने अपने संबोधन में वैश्विक स्तर पर बढ़ती रणनीतिक प्रतिस्पर्धा को भी चिंता का विषय बताया।
उन्होंने कहा कि आज दुनिया के कई देश विभिन्न क्षेत्रों में टकराव की स्थिति में हैं। यह टकराव केवल जमीन या समुद्र तक सीमित नहीं है बल्कि अब यह Air, Sea और Space तक फैल चुका है।
उन्होंने कहा:
“आज राष्ट्र जमीन, हवा, पानी और यहाँ तक कि अंतरिक्ष में भी टकरा रहे हैं। यह एक असामान्य स्थिति है और चिंता की बात यह है कि यह असामान्यता धीरे-धीरे सामान्य बनती जा रही है।”
Rajnath Singh ने कहा कि West Asia Conflict जैसी घटनाएँ वैश्विक भू-राजनीतिक समीकरणों में तेजी से बदलाव ला रही हैं और इससे अंतरराष्ट्रीय स्थिरता पर भी प्रभाव पड़ रहा है।
Maritime Sector में India की भूमिका
Rajnath Singh ने कहा कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में समुद्र एक बार फिर विश्व शक्ति संतुलन का केंद्र बनते जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि एक बड़े Maritime Nation के रूप में India की जिम्मेदारी है कि वह समुद्री क्षेत्र में नेतृत्व प्रदान करे और अपनी क्षमता तथा दृष्टि के साथ वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाए।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में समुद्री सुरक्षा, व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति को सुनिश्चित करना अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया है।
Rajnath Singh ने कहा कि West Asia Conflict जैसे संकट इस बात को स्पष्ट करते हैं कि समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा और स्थिरता कितनी आवश्यक है।

Supply Chain Disruptions से निपटने के लिए Self-Reliance जरूरी
Defence Minister Rajnath Singh ने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में Supply Chain Disruptions से बचने का सबसे प्रभावी तरीका Self-Reliance यानी आत्मनिर्भरता है।
उन्होंने कहा कि Defence Sector में आधुनिक और उच्च तकनीकों का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है और ऐसे समय में भारत को अपनी रक्षा उत्पादन क्षमता को मजबूत करना होगा।
उन्होंने कहा कि सरकार ने शुरुआत से ही यह मानकर काम किया है कि अनिश्चित वैश्विक परिस्थितियों में आत्मनिर्भरता ही सबसे बड़ा समाधान है।
Rajnath Singh ने Defence Public Sector Undertakings (DPSUs) को आत्मनिर्भर भारत के प्रमुख स्तंभों में से एक बताया। (source)
Shipbuilding Sector के लिए India का लक्ष्य
Rajnath Singh ने Maritime Sector से जुड़े उद्योगों और निजी कंपनियों को एक बड़ा लक्ष्य भी दिया।
उन्होंने कहा कि भारत को 2030 तक दुनिया के Top 10 Shipbuilding Nations में जगह बनानी चाहिए और 2047 तक Top 5 Nations में शामिल होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यह लक्ष्य केवल सरकार का नहीं बल्कि पूरे उद्योग, कार्यबल और नीति तंत्र की साझा जिम्मेदारी है।
उनके अनुसार यदि भारत समुद्री क्षेत्र में अपनी क्षमता को मजबूत करता है, तो इससे न केवल आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा बल्कि वैश्विक Supply Chain में भी भारत की भूमिका मजबूत होगी।
US-Israel और Iran के बीच बढ़ा तनाव
वर्तमान West Asia Conflict उस समय और गहरा हो गया जब United States और Israel ने Iran पर संयुक्त हमले किए। इन हमलों में Iran के Supreme Leader Ayatollah Ali Khamenei सहित कई प्रमुख व्यक्तियों की मौत हुई। इसके बाद Tehran ने जवाबी कार्रवाई करते हुए अमेरिकी सैन्य ठिकानों और इजरायली लक्ष्यों पर हमले किए।
इस टकराव के बाद पूरे Middle East क्षेत्र में तनाव तेजी से बढ़ गया है और इसका असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति तथा व्यापार पर पड़ने लगा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि West Asia Conflict लंबे समय तक जारी रहता है तो इससे अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार, शिपिंग और व्यापारिक गतिविधियों पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।




