Pregnancy Tourism in Ladakh: इंटरनेट पर एक टर्म तेजी से चर्चा में है — Pregnancy Tourism। इसका मतलब है, जब कोई गर्भवती महिला अपने देश से दूसरे देश में जाकर बच्चा जन्म देती है ताकि उस बच्चे को बेहतर नागरिकता या जीवन सुविधाएं मिल सकें। लेकिन हाल ही में इसी टर्म को लेकर भारत का लद्दाख क्षेत्र सुर्खियों में है। कारण? वहां के कुछ गांवों में विदेशी महिलाएं ‘Pure Aryan Genes’ पाने के लिए आती हैं।
कौन हैं लद्दाख के आर्यन पुरुष?
लद्दाख के द-हानु, दार्चिक और गारकोन जैसे गांवों में रहने वाले लोगों को ब्रोकपा या द्रोगपा समुदाय कहा जाता है। यह समुदाय खुद को सिकंदर महान (Alexander the Great) के सैनिकों का वंशज मानता है। ब्रोकपा पुरुषों की पहचान है — गोरा रंग, नीली आंखें और लंबा कद। इन्हीं शारीरिक विशेषताओं के कारण विदेशी महिलाओं में इनकी “डिमांड” बताई जाती है।
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विदेशी महिलाएं क्यों आती हैं लद्दाख?
रिपोर्ट्स के अनुसार, खासकर जर्मनी और यूरोप की कुछ महिलाएं इस समुदाय के पुरुषों से बच्चे पैदा करने के लिए लद्दाख आती हैं। उनका मानना है कि इससे उनके बच्चों में “Pure Aryan Bloodline” आ जाएगी।
‘The Aryan Saga’ नामक डॉक्यूमेंट्री (2006) में यह दिखाया गया कि कुछ महिलाएं ‘Pure Aryan Genes’ की चाह में ब्रोकपा गांवों तक पहुंचती हैं और स्थानीय पुरुषों को पैसे व गिफ्ट्स देती हैं।
Pregnancy Tourism in Ladakh: प्रोफेसर मंज़ूर अहमद की रिसर्च
कश्मीर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर मंज़ूर अहमद खान ने 2017 में एक अध्ययन किया — “Pregnancy Tourism in Aryan Villages of Ladakh”।
उन्होंने 180 विदेशी महिलाओं से बातचीत की। उनमें से एक जर्मन महिला ने स्वीकार किया कि वह “शुद्ध आर्यन बच्चा” चाहती थी। हालांकि, प्रोफेसर की रिपोर्ट में यह भी साफ लिखा गया कि इस “Pure Aryan Gene” की कोई वैज्ञानिक पुष्टि नहीं है।
डीएनए या जेनेटिक टेस्टिंग से ऐसा कुछ साबित नहीं हुआ। यानी यह पूरी अवधारणा लोककथाओं और भौतिक विशेषताओं पर आधारित है।

ब्रोकपा समुदाय की परंपराएं और रहन-सहन
ब्रोकपा पुरुष मरून रंग के गाउन और कमरबंद पहनते हैं, जबकि महिलाएं भेड़ की खाल से बने चोगे और भारी आभूषण पहनती हैं। उनके सिर पर “टेपी” नामक रंगीन टोपी होती है जिसे वे बुरी नजर से बचाव का प्रतीक मानते हैं।
कई भाई एक ही महिला से शादी करते थे ताकि जमीन का बंटवारा न हो। इससे यह भी साबित होता है कि समुदाय अपनी ‘शुद्ध नस्ल’ की परंपरा बनाए रखने में कितना सजग था।
क्या यह ‘टूरिज्म’ है या भ्रम?
कई विशेषज्ञ मानते हैं कि यह तथाकथित “Pregnancy Tourism” एक मार्केटिंग या मिथक भी हो सकता है, जिससे पर्यटन बढ़े और विदेशी रुचि कायम रहे।
प्रोफेसर मंज़ूर ने अधिकारियों से इस प्रथा की वैज्ञानिक जांच की सिफारिश की है ताकि सच और भ्रम के बीच की रेखा स्पष्ट हो सके।
नस्लीय शुद्धता का जर्मन संबंध
जर्मनी से आने वाली कई महिलाएं इस अवधारणा से जुड़ी बताई जाती हैं। माना जाता है कि यह सोच एडोल्फ हिटलर के समय की “Pure Aryan Race” वाली विचारधारा से जुड़ी है। हिटलर मानता था कि आर्यन नस्ल सर्वोच्च है, और शायद उसी मानसिकता की गूंज आज भी कुछ लोगों के मन में जीवित है।
लद्दाख का यह ‘Pregnancy Tourism’ विवादित जरूर है, पर इससे यह साफ होता है कि नस्लीय पहचान, सांस्कृतिक मिथक और पर्यटन किस तरह आपस में जुड़ सकते हैं। वैज्ञानिक आधार न होने के बावजूद, “Pure Aryan” की यह कहानी इंटरनेट पर खूब चर्चा बटोर रही है।






