Prashant Kishor: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर अब माहौल पूरी तरह गरम है. जन सुराज पार्टी ने हाल ही में अपने 51 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी की है, लेकिन इस लिस्ट में एक नाम नहीं है जिसकी चर्चा सबसे ज्यादा हो रही है — और वो नाम है प्रशांत किशोर का. सवाल उठ रहा है कि आखिर खुद प्रशांत किशोर ही क्यों नहीं लड़ रहे हैं चुनाव, जबकि वो इस पार्टी के संस्थापक हैं और पिछले कुछ सालों से पूरे बिहार में सक्रिय रूप से जनता के बीच कैंपेन चला रहे हैं.
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PK का मास्टरस्ट्रोक? शिक्षा मंत्री के खिलाफ किन्नर उम्मीदवार, नीतीश के करीबी रहे RCP सिंह की बेटी को भी टिकट
राजनीति के जानकारों का कहना है कि यह सवाल वाजिब है, क्योंकि जब कोई बड़ी पार्टी उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी करती है तो उसके शीर्ष नेता का नाम सबसे पहले होता है. जैसे बीजेपी अपनी लिस्ट जारी करती है तो उसमें नरेंद्र मोदी का नाम होता है, कांग्रेस करती है तो राहुल गांधी का. ऐसे में जन सुराज की लिस्ट में प्रशांत किशोर का नाम न होना कई अटकलों को जन्म दे रहा है.
अगर इस लिस्ट पर नजर डालें तो जन सुराज ने समाज के अलग-अलग वर्गों से उम्मीदवारों को टिकट दिया है. आंकड़ों के मुताबिक 21% उम्मीदवार OBC वर्ग से हैं, 15% मुस्लिम, 13.7% SC समुदाय से और करीब 15% जनरल कैटेगरी से आते हैं. पार्टी ने नॉन-यादव OBC यानी EBC समुदाय पर भी खास फोकस किया है. इस लिस्ट में कुछ नाम काफी चर्चित हैं, जैसे पूर्व केंद्रीय मंत्री और नितीश कुमार के करीबी रह चुके R.C.P. सिंह की बेटी, जो इस बार जन सुराज से मैदान में हैं. इसके अलावा करपुरी ठाकुर की पोती को भी टिकट मिला है, जो बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री रहे हैं.
दरभंगा से रिटायर्ड IPS आर.के. मिश्रा को टिकट दिया गया है और छपरा से रिटायर्ड कर्नल जयप्रकाश सिंह को. वहीं पटना की कुमरार सीट से मशहूर गणितज्ञ केसी सिन्हा को चुनाव मैदान में उतारा गया है. कहा जा रहा है कि इस सीट पर कायस्थ मतदाता निर्णायक भूमिका निभाएंगे. इसी तरह गोपालगंज की भोरे सीट से पूर्ति किन्नर को उम्मीदवार बनाया गया है, जो बिहार की शिक्षा मंत्री सुनील कुमार के खिलाफ चुनाव लड़ेंगी.

डॉक्टर-गणितज्ञ मैदान में, पर PK खुद बाहर, क्या प्रशांत किशोर का यह ‘राजनीतिक प्रयोग’ सफल होगा?
डॉ. ए.के. दास जैसे उम्मीदवार, जो अपने इलाके में लोगों के इलाज के लिए जाने जाते हैं, उन्हें भी टिकट मिला है. प्रशांत किशोर का यह कदम एक तरह का राजनीतिक प्रयोग माना जा रहा है जिसमें उन्होंने परंपरागत नेताओं की बजाय समाज के अलग-अलग तबकों से आने वाले चेहरों को मौका दिया है.
हालांकि पार्टी के भीतर असंतोष की भी खबरें हैं. कई कार्यकर्ताओं और जिला अध्यक्षों ने टिकट बंटवारे पर नाराजगी जताई है, उनका कहना है कि गलत फीडबैक के आधार पर टिकट दिए गए हैं.
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि प्रशांत किशोर खुद मैदान में क्यों नहीं उतर रहे. जानकारों का मानना है कि अगर वे राघोपुर से, यानी तेजस्वी यादव के गढ़ से चुनाव लड़ते तो यह मुकाबला बिहार की सबसे हॉट सीट बन जाती. तेजस्वी यादव के खिलाफ उतरना उनके लिए एक बड़ा रिस्क भी होता क्योंकि वह क्षेत्र RJD का पारंपरिक गढ़ माना जाता है. लेकिन राजनीति में कुछ भी नामुमकिन नहीं है, और अगर कभी प्रशांत किशोर उस सीट से उतरते हैं तो मुकाबला देखने लायक होगा.
फिलहाल जन सुराज की पहली लिस्ट ने बिहार की राजनीति में हलचल मचा दी है. पार्टी ने यह साफ कर दिया है कि वह सामाजिक संतुलन और नए चेहरों के सहारे राजनीति में नई शुरुआत करना चाहती है. अब देखना यह है कि जनता इस प्रयोग को कितना स्वीकार करती है.






