Odisha Tehsildar Vigilance Raid: 70–80 हजार सैलरी में करोड़ों की संपत्ति का सवाल
तकरीबन 70 से 80 हजार रुपये प्रतिमाह सैलरी पाने वाला कोई तहसीलदार आखिर कितनी बचत कर सकता है। क्या इतनी आमदनी में 75 से 80 लाख रुपये कैश घर में रखना, 100 ग्राम सोना खरीदना और कई मकान, फ्लैट व जमीनें बनाना मुमकिन है। यही सवाल अब उड़ीसा की राजधानी Bhubaneswar में सामने आए एक Vigilance Raid के बाद उठ रहा है।
यह मामला बारंग तहसील में तैनात अपर तहसीलदार Jitendra Kumar Panda से जुड़ा है, जिनके खिलाफ Odisha Tehsildar Vigilance Raid की कार्रवाई की गई है। यह छापेमारी ज्ञात आय से अधिक संपत्ति यानी disproportionate assets case के आरोपों को लेकर की गई।

चार ठिकानों पर एक साथ विजिलेंस की छापेमारी
विजिलेंस टीम ने एक साथ चार अलग-अलग ठिकानों पर छापा मारा। जांच के दौरान जो सामने आया, उसने अधिकारियों को भी चौंका दिया। नोटों की गड्डियां, महंगे गहने, कई इमारतें और जमीनें जांच में मिलीं।
विजिलेंस सूत्रों के मुताबिक करीब 75 से 80 लाख रुपये कैश बरामद हुआ है। यह नकदी भुवनेश्वर के बड़ागड़ा इलाके की ब्रिट कॉलोनी में स्थित एक बंद मकान से मिली। यह मकान तहसीलदार की सास के नाम पर रजिस्टर्ड है। बताया जा रहा है कि उनकी सास बीमार रहती हैं और इसी वजह से इस घर को सुरक्षित तिजोरी की तरह इस्तेमाल किया जा रहा था।
मकान, फ्लैट, जमीन और वाहन भी मिले
Odisha Tehsildar Vigilance Raid के दौरान पांडा और उनके परिवार से जुड़ी कई अचल संपत्तियों का भी खुलासा हुआ। जांच में भुवनेश्वर के बड़ागड़ा इलाके में दो तीन मंजिला इमारतें, खरधा के सनापल्ला में एक दो मंजिला मकान और भुवनेश्वर के उत्तरा इलाके में एक 2BHK फ्लैट मिला है।
इसके अलावा चार महंगी जमीनें भी सामने आई हैं। इनमें तीन जमीनें भुवनेश्वर के पॉश इलाकों में और एक खुरदा शहर में बताई जा रही हैं। विजिलेंस अधिकारियों को 100 ग्राम सोने के गहने भी मिले हैं, जिनकी कीमत करीब 14 लाख रुपये आंकी जा रही है।

जांच में दो कार और चार दोपहिया वाहनों के मालिकाना हक की जानकारी भी सामने आई है। इसके साथ ही भुवनेश्वर में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया का एक बैंक लॉकर अभी खोला जाना बाकी है। बैंक खातों, पोस्टल डिपॉजिट और दूसरे निवेशों की भी जांच चल रही है, जिससे और संपत्ति सामने आने की आशंका है।
विजिलेंस का बयान, गिनती अभी जारी
विजिलेंस सेल के एसपी ने बताया कि फिलहाल जांच जारी है और जब्त की गई नकदी की गिनती अभी पूरी नहीं हुई है। शुरुआती अनुमान के मुताबिक रकम 75 से 80 लाख रुपये के आसपास हो सकती है, लेकिन अंतिम आंकड़ा गिनती पूरी होने के बाद ही साफ होगा।
Odisha Tehsildar Vigilance Raid के तहत आरोपी की आय के स्रोत, निवेश और वित्तीय लेनदेन की गहराई से जांच की जा रही है। जब्त की गई नकदी को कानूनी प्रक्रिया के तहत कब्जे में लिया जा रहा है।
2000 रुपये सैलरी से तहसीलदार बनने तक का सफर
रिपोर्ट्स के मुताबिक जितेंद्र कुमार पांडा ने 10 नवंबर 1995 को कटक में एनिमल हसबेंडरी और वेटनरी सर्विसेज के डायरेक्टर ऑफिस में सीनियर लैबोरेटरी असिस्टेंट के तौर पर सरकारी नौकरी शुरू की थी। उस वक्त उन्हें रिहैबिलिटेशन स्कीम के तहत सिर्फ 2000 रुपये मासिक सैलरी मिलती थी। बाद में वे तहसीलदार बने और अब एक बार फिर उनकी संपत्ति को लेकर जांच के घेरे में हैं।
इस कार्रवाई के बाद सरकारी सिस्टम में भ्रष्टाचार को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अब सबकी नजर इस जांच पर है कि Odisha Tehsildar Vigilance Raid में आगे क्या खुलासे होते हैं






