New Year Eve Strike: न्यू ईयर सेलिब्रेशन शुरू होने से ठीक पहले एक बड़ी खबर सामने आई है। 31 दिसंबर यानी साल के आखिरी दिन फूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स सेवाओं पर असर पड़ सकता है। वजह है गिग वर्कर्स की हड़ताल, जिसमें फूड डिलीवरी, क्विक कॉमर्स और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स से जुड़े डिलीवरी बॉय शामिल हैं। इसका सीधा असर उन लोगों पर पड़ सकता है जो पार्टी की तैयारियों के लिए आखिरी वक्त में Swiggy, Zomato, Blinkit और Zepto जैसे ऐप्स पर निर्भर रहते हैं।
गिग वर्कर्स का कहना है कि वे कोई मशीन नहीं बल्कि इंसान हैं, जो हर मौसम में 10 मिनट की डिलीवरी के दबाव में काम करते हैं। सोशल मीडिया पर पहले भी कई डिलीवरी वर्कर्स अपनी कमाई और काम के घंटों को लेकर सवाल उठा चुके हैं। एक डिलीवरी बॉय ने बताया था कि 15 घंटे लगातार काम करने के बाद 28 डिलीवरी करने पर उसकी कमाई सिर्फ 763 रुपये हुई। आमतौर पर 15 से 16 घंटे काम करने के बाद भी 500 से 700 रुपये की कमाई होती है, जिसमें पेट्रोल का खर्च अलग से निकालना पड़ता है।
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वर्कर्स का कहना है कि कमाई कम होने के साथ-साथ 10 मिनट में डिलीवरी का प्रेशर उनकी सेफ्टी के लिए भी खतरा बन रहा है। इन्हीं समस्याओं को लेकर गिग वर्कर्स ने हड़ताल का ऐलान किया है। इस आंदोलन को तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन और इंडियन फेडरेशन ऑफ ऐप बेस्ड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स लीड कर रहे हैं। यूनियन नेताओं के मुताबिक, देशभर में एक लाख से ज्यादा डिलीवरी वर्कर्स न्यू ईयर ईव पर या तो ऐप से लॉगआउट कर सकते हैं या फिर काम में कटौती करेंगे।
रिपोर्ट के अनुसार इस हड़ताल का पहला फेज 25 दिसंबर को शुरू हुआ था। क्रिसमस के दिन 400 से ज्यादा गिग वर्कर्स ने इसका समर्थन किया, जिससे 50 से 60 प्रतिशत ऑर्डर्स डिले हुए। यूनियन का दावा है कि 25 दिसंबर तो सिर्फ ट्रेलर था, असली असर 31 दिसंबर को दिख सकता है।
यूनियन की तरफ से प्लेटफॉर्म कंपनियों के सामने पांच मुख्य मांगें रखी गई हैं। पहली मांग है कि पुराने बेहतर पे-आउट सिस्टम को दोबारा लागू किया जाए, जो पहले त्योहारों और रेगुलर दिनों में मिलता था। दूसरी मांग है कि 10 मिनट डिलीवरी सिस्टम को तुरंत हटाया जाए। तीसरी मांग आईडी ब्लॉक करने में पारदर्शिता और बिना कारण आईडी ब्लॉक न करने की है। चौथी मांग एल्गोरिदम के जरिए इंसेंटिव कंट्रोल करने को लेकर है। पांचवीं और अहम मांग है गिग वर्कर्स के लिए ग्रिवेंस मैकेनिज्म और सोशल सिक्योरिटी।
यूनियन नेताओं का कहना है कि वे कंपनियों से सीधे बातचीत के लिए तैयार हैं और चाहते हैं कि सरकार भी इस मुद्दे पर गिग वर्कर्स का साथ दे। नीति आयोग के अनुमान के मुताबिक 2029-30 तक भारत की गिग इकॉनमी में करीब 2 करोड़ 35 लाख वर्कर्स शामिल हो सकते हैं। ऐसे में कम वेतन, जॉब सिक्योरिटी की कमी और तेज डिलीवरी का दबाव एक बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। इन्हीं कारणों से 31 दिसंबर को गिग वर्कर्स ने हड़ताल का रास्ता चुना है।






