MP Sagar Garba Controversy: नवरात्रि के दौरान मध्य प्रदेश के सागर जिले में आयोजित एक गरबा कार्यक्रम में बड़ा विवाद खड़ा हो गया। आरोप है कि कश्मीर से पढ़ाई करने आए एक मुस्लिम छात्र आफताब हुसैन को पंडाल में एंट्री करने और एक लड़की के साथ बैठने पर भीड़ ने घेर लिया और उसकी पिटाई कर दी। मामला सामने आने के बाद पुलिस की कार्रवाई और छात्र संगठन की प्रतिक्रिया ने इस घटना को और सुर्खियों में ला दिया है।
घटना कैसे हुई?
27 सितंबर को सागर की डॉ. हर सिंह गौर यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहे आफताब अपने दोस्तों के साथ गरबा पंडाल पहुंचे थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पंडाल में आयोजकों ने मुस्लिमों की एंट्री पर रोक लगा रखी थी। जब आफताब को लड़की के साथ बैठा देखा गया, तो आयोजकों ने उसकी आईडी चेक की। पहचान सामने आने पर हंगामा खड़ा हो गया और कुछ ही देर में बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद और हिंदू जागरण मंच के कार्यकर्ता मौके पर पहुंच गए।
इसके बाद आरोप है कि आफताब की पिटाई की गई और उसे पंडाल से बाहर निकाला गया। पुलिस को सूचना दी गई और आफताब को थाने ले जाया गया।
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पुलिस ने क्या कहा?
मोती नगर थाना प्रभारी जसवंत सिंह राजपूत ने बताया कि जम्मू-कश्मीर निवासी आफताब हुसैन को संगठन के लोगों ने थाने लाकर सौंपा। शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए उसके खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की गई है और समझाइश दी गई है कि आगे से इस तरह के कार्य न करें।
छात्र संगठन का आरोप
इस घटना पर जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। संगठन के राष्ट्रीय संयोजक नासिर खुयेरी ने एक्स पर लिखा कि आफताब को बुरी तरह पीटा गया लेकिन पुलिस ने उसे ही हिरासत में लिया और झूठे आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि आफताब अपने दोस्तों के बुलावे पर कार्यक्रम में गया था।
नासिर ने आगे लिखा – “नवरात्रि भक्ति और समावेशिता का पर्व है, इसे सांप्रदायिक नफरत फैलाने और कश्मीरी मुस्लिम छात्रों को निशाना बनाने का मंच बनाना त्यौहार की पवित्रता और भारत की एकता दोनों के लिए खतरा है।”
विवाद पर बढ़ती बहस
यह घटना अब सोशल मीडिया और छात्र संगठनों के बीच बहस का विषय बन गई है। एक पक्ष का कहना है कि पंडाल में नियमों का उल्लंघन हुआ, जबकि दूसरे पक्ष का आरोप है कि धार्मिक आधार पर छात्र को निशाना बनाया गया।
मध्य प्रदेश के सागर में गरबा पंडाल से शुरू हुआ यह विवाद अब सांप्रदायिक और राजनीतिक रंग ले चुका है। पुलिस कार्रवाई पर भी सवाल उठ रहे हैं कि पीड़ित को सुरक्षा देने के बजाय उसी पर कार्रवाई क्यों की गई। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या आरोपियों पर भी कोई ठोस कार्रवाई होती है।
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