February 11, 2026 6:56 AM

Mayawati Rally in Lucknow Breaks Records, BJP के दबदबे के बीच BSPकी भीड़ ने दिखाई राजनीतिक ताकत !!

Mayawati Rally: मायावती की लखनऊ रैली ने तोड़े सारे रिकॉर्ड! जानिए कैसे 13 साल बाद BSP ने भीड़ से राजनीति में दिखाया दम, और क्यों BJP को भी हो रही है चिंता।

EDITED BY: Vishal Yadav

UPDATED: Thursday, October 9, 2025

Mayawati Rally in Lucknow Breaks Records, BJP के दबदबे के बीच BSPकी भीड़ ने दिखाई राजनीतिक ताकत !!

Mayawati Rally: लखनऊ में हाल ही में BSP सुप्रीमो मायावती की रैली ने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा। रवीश कुमार ने कहा कि भाषण से ज्यादा चर्चा इस रैली में आई भीड़ की हो रही है। मायावती ने खुद माना कि आज की भीड़ ने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए। यह सवाल उठता है कि 13 साल सत्ता से बाहर रहने के बावजूद BSP इतनी बड़ी और व्यवस्थित रैली कैसे कर पाई।

क्या Mayawati अब सपा को ही अपना एकमात्र दुश्मन मानती हैं? बीजेपी की तारीफ के क्या हैं मायने?

मायावती ने यह भी बताया कि यहां आए लोग मजदूरी या भाड़े पर नहीं लाए गए। सबने अपनी कमाई से खुद पैदल चलकर रैली में हिस्सा लिया। विपक्ष ने आरोप लगाए कि रोडवेज की गाड़ियां मदद के लिए दी गईं, लेकिन अगर ऐसा सच होता तो प्रधानमंत्री मोदी जैसी रैलियों में भी इतनी भीड़ नहीं होती। इस भीड़ से यह साफ हो गया कि BSP का जनाधार अभी भी कायम है।

भाषण में मायावती ने बीजेपी सरकार की तारीफ भी की, विशेषकर स्मारक और पार्कों के रखरखाव के लिए। उन्होंने कहा कि उनकी पिछली सरकार ने कांशीराम नगर नाम की व्यवस्था की थी, लेकिन सपा सरकार ने इसे बदलकर कासगंज कर दिया। इसके बावजूद मायावती ने बीजेपी पर सीधे हमला नहीं किया। उनके भाषण से यह भी पता चला कि सपा उनके मुख्य प्रतिद्वंदी हैं, जबकि बीजेपी के प्रति नरमी बरती गई।

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Mayawati Rally in Lucknow Breaks Records, BJP के दबदबे के बीच BSPकी भीड़ ने दिखाई राजनीतिक ताकत !!

मायावती ने की ‘संविधान बचाने’ की अपील, तो कांग्रेस ने पूछा- ‘फिर आप BJP की B-टीम क्यों हैं?’

मायावती ने दलितों और वंचित वर्ग के अधिकारों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि संविधान और बाबा साहब भीमराव अंबेडकर द्वारा निर्मित सिद्धांतों को बदलने की कोशिशें चल रही हैं। BSP इसे रोकने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने समर्थकों से पार्टी को मजबूत करने और यूपी में अकेले दम पर पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने की अपील की।

हालांकि, विपक्ष और कांग्रेस ने मायावती को बीजेपी की बी टीम कहकर निशाना बनाया। भाषण में राहुल गांधी का नाम नहीं आया, वहीं सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के प्रति आक्रामक भाषा का इस्तेमाल किया गया। मायावती ने कानून और सुरक्षा के मुद्दों पर भी अपने विचार रखे, जैसे कि पहलगांव में हुई आतंकी घटना और विदेश नीति के महत्व पर जोर।

मायावती की यह रैली यह दिखाती है कि BSP बिना मीडिया सपोर्ट के भी बड़ी संख्या में लोगों को जुटा सकती है। हालांकि, सवाल यह है कि क्या यह प्रदर्शन विधानसभा चुनाव में नतीजों में बदल पाएगा। बीएसपी के वोट बैंक और जनाधार को फिर से सक्रिय करने के लिए अभी लंबी दूरी तय करनी होगी।

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