February 11, 2026 6:55 AM

Mamata Banerjee Green File Controversy: ED की कार्रवाई, ग्रीन फाइल और PMLA 67 पर सियासी घमासान !!

Mamata Banerjee Green File Controversy पर सियासी हलचल तेज। ED रेड के दौरान सामने आई ग्रीन फाइल, PMLA Section 67 बना बड़ा फैक्टर।। ...

EDITED BY: Vishal Yadav

UPDATED: Friday, January 9, 2026

Mamata Banerjee Green File Controversy: ED की कार्रवाई, ग्रीन फाइल और PMLA 67 पर सियासी घमासान !!

8 जनवरी की कार्रवाई और ग्रीन फाइल की चर्चा

पश्चिम बंगाल की राजनीति में Mamata Banerjee Green File Controversy अचानक तेज हो गई है। 8 जनवरी को कोलकाता में मनी लॉन्ड्रिंग केस से जुड़ी कार्रवाई के दौरान ईडी की छापेमारी हुई और इसी बीच मुख्यमंत्री Mamata Banerjee खुद मौके पर पहुंच गईं। उन्होंने मीडिया के सामने हरे रंग की एक फाइल दिखाते हुए आरोप लगाया कि उनकी चुनावी रणनीति चुराने की कोशिश की जा रही है।

मुख्यमंत्री ने सीधे तौर पर केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah और प्रवर्तन निदेशालय Enforcement Directorate पर निशाना साधा। इसके बाद यह सवाल उठने लगा कि यह ग्रीन फाइल क्या है और ईडी के पास आगे क्या विकल्प हैं।

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Mamata Banerjee Green File Controversy: ED की कार्रवाई, ग्रीन फाइल और PMLA 67 पर सियासी घमासान !!

ED की रेड कहां और कैसे हुई

8 जनवरी की सुबह ईडी ने कोलकाता में रेड की। यह कार्रवाई एक पॉलिटिकल कंसलटेंसी फर्म I-PAC से जुड़े ठिकानों पर हुई। I-PAC के कुछ दफ्तरों और इसके प्रमुख के आवास पर छापेमारी की गई। रेड के दौरान ही ममता बनर्जी वहां पहुंचीं।

पहले वे I-PAC प्रमुख के घर गईं और बाहर निकलते समय उनके हाथ में एक हरी फाइल दिखाई दी। कैमरे के सामने उन्होंने कहा कि बीजेपी उनकी चुनावी रणनीति चुराना चाहती है। इसके बाद वह I-PAC के दफ्तर भी पहुंचीं। मुख्यमंत्री के पहुंचने के बाद सीएमओ के कुछ अधिकारी भी वहां आए और कुछ फाइलें अपने साथ ले गए। उन फाइलों में क्या था, यह साफ नहीं हो सका क्योंकि वे ईडी के हाथ नहीं लगीं।

हाईकोर्ट का रुख और केस दर्ज

रेड के बाद मामला और बढ़ा। I-PAC और ममता बनर्जी ने Kolkata High Court का रुख किया और ईडी की कार्रवाई को अवैध बताया। मुख्यमंत्री ने ईडी अधिकारियों के खिलाफ केस भी दर्ज कराया। इसी बीच यह बहस शुरू हो गई कि क्या ईडी के पास अब भी ऐसा कोई कानूनी हथियार है जिससे वह मुख्यमंत्री पर कार्रवाई कर सके।

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PMLA Section 67 क्यों अहम

Mamata Banerjee Green File Controversy में ईडी के पक्ष को मजबूत बताने की वजह PMLA की धारा 67 मानी जा रही है। इस धारा के तहत, इस कानून के अंतर्गत ईमानदारी से की गई किसी भी कार्रवाई को किसी सिविल कोर्ट में चुनौती नहीं दी जा सकती।

आसान शब्दों में कहें तो अगर ईडी यह साबित कर दे कि उसकी रेड कानून के मुताबिक और सद्भावना से की गई थी, तो उसके अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई नहीं हो सकती। कोलकाता पुलिस को पहले यह साबित करना होगा कि ईडी ने यह छापेमारी निजी या राजनीतिक फायदे के लिए की थी। जब तक ऐसा नहीं होता, तब तक ईडी के खिलाफ कार्रवाई मुश्किल मानी जा रही है।

ग्रीन फाइल बनी तो बढ़ सकती है मुश्किल

इस पूरे विवाद में सबसे अहम सवाल वही ग्रीन फाइल है। अगर ईडी यह साबित कर दे कि छापेमारी के दौरान जो फाइलें बाहर ले जाई गईं, वे जांच के लिए बेहद अहम थीं, तो मामला पूरी तरह पलट सकता है। कानूनी जानकारों के मुताबिक मुख्यमंत्री होने से किसी को गिरफ्तारी से स्वतः सुरक्षा नहीं मिलती।

इस संदर्भ में पहले Arvind Kejriwal से जुड़े मामलों का उदाहरण भी दिया जा रहा है, जहां मुख्यमंत्री पद होने के बावजूद जांच एजेंसियों की कार्रवाई आगे बढ़ी।

सियासत बनाम कानून की जंग

अब यह साफ है कि Mamata Banerjee Green File Controversy सिर्फ एक छापेमारी तक सीमित नहीं है। यह कानून और राजनीति के बीच सीधी टक्कर बन गई है। एक तरफ मुख्यमंत्री ईडी पर चुनावी साजिश का आरोप लगा रही हैं, दूसरी तरफ ईडी के पास PMLA 67 का कानूनी कवच बताया जा रहा है।

आने वाले दिनों में यह तय होगा कि जांच किस दिशा में जाती है और ग्रीन फाइल की भूमिका कितनी अहम साबित होती है। (Short/ Reel)

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