हाल के दिनों में कई शहरों और कस्बों से खबरें सामने आ रही हैं कि गैस सिलेंडर मिलने में देरी हो रही है या डिलीवरी सामान्य से धीमी है। इससे यह सवाल उठने लगा है कि क्या वाकई LPG gas shortage in India जैसी स्थिति बन रही है या यह सिर्फ सप्लाई चेन में अस्थायी दबाव है। इस पूरी स्थिति को समझने के लिए जरूरी है कि भारत की गैस खपत, आयात और स्टोरेज सिस्टम को समझा जाए।
ये भी पढ़े: 28 Day Recharge Plan Controversy: संसद में उठा 28 दिन वाले मोबाइल रिचार्ज का मुद्दा !!

भारत में LPG की खपत और आयात पर निर्भरता
भारत दुनिया के सबसे बड़े एलपीजी उपभोक्ताओं में शामिल है। देश हर साल लगभग 31.3 मिलियन टन LPG का इस्तेमाल करता है। इसमें से करीब 88% घरेलू रसोई में उपयोग होता है जबकि बाकी 12% होटल, रेस्टोरेंट और उद्योगों में इस्तेमाल होता है।
लेकिन यहां एक बड़ी चुनौती है। भारत का घरेलू उत्पादन इस मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार देश में सालाना उत्पादन करीब 12.8 मिलियन टन है। इसका मतलब है कि कुल जरूरत का 60% से ज्यादा हिस्सा आयात करना पड़ता है।
भारत ज्यादातर LPG मिडिल ईस्ट देशों जैसे सऊदी अरब, क़तर, कुवैत और UAE से खरीदता है। इन आयातों का बड़ा हिस्सा Strait of Hormuz से होकर गुजरता है, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा व्यापार मार्गों में से एक है।
Strait of Hormuz तनाव का असर
हाल के महीनों में मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव, खासकर ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच टकराव की वजह से इस समुद्री रास्ते को लेकर चिंता बढ़ गई है। अगर इस मार्ग पर जोखिम बढ़ता है तो तेल और गैस की सप्लाई पर सीधा असर पड़ सकता है।
क्योंकि भारत की लगभग 85–90% LPG शिपमेंट इसी रास्ते से होकर आती हैं, इसलिए यहां किसी भी तरह का संकट सीधे LPG gas shortage in India जैसी स्थिति पैदा कर सकता है।
भारत में गैस स्टोरेज क्यों है बड़ी समस्या
ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार भारत की सबसे बड़ी कमजोरी गैस स्टोरेज सिस्टम है। देश में एलपीजी सप्लाई का मॉडल ऐसा है जिसमें गैस आती है और तुरंत बाजार में भेज दी जाती है। बड़े पैमाने पर लंबे समय के लिए गैस स्टोर करने की व्यवस्था सीमित है।

भारत में फिलहाल केवल दो प्रमुख भूमिगत LPG स्टोरेज सुविधाएं हैं:
-
विशाखापट्टनम (आंध्र प्रदेश)
-
मैंगलोर/बंगलुरु क्षेत्र (कर्नाटक)
इन दोनों की कुल स्टोरेज क्षमता लगभग 1.4 लाख टन है। जबकि भारत में रोज करीब 80,000 टन LPG की खपत होती है। इसका मतलब यह हुआ कि देश का स्टोरेज दो दिन की जरूरत भी पूरी नहीं कर सकता।
इसके मुकाबले यूरोप जैसे देशों के पास बेहतर स्टोरेज सिस्टम है। कई यूरोपीय देश अपनी सालाना गैस खपत का करीब 25% तक स्टोर करके रखते हैं।
सरकार ने क्या कदम उठाए
संभावित LPG gas shortage in India को देखते हुए सरकार ने कुछ कदम उठाए हैं।
-
पेट्रोलियम मंत्रालय ने एक हाई-लेवल कमेटी बनाई है जो गैस सप्लाई की निगरानी कर रही है।
-
Essential Commodities Act लागू किया गया है ताकि जमाखोरी और कालाबाजारी को रोका जा सके।
-
गैस सिलेंडर डिलीवरी में OTP और बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन अनिवार्य किया गया है।
-
नए गैस सप्लायर खोजने की कोशिश हो रही है।
भारत अब नॉर्वे, अमेरिका और कुछ अफ्रीकी देशों से LPG आयात के विकल्प पर भी विचार कर रहा है। हालांकि इन देशों से गैस आने में समय ज्यादा लग सकता है।
आगे क्या हो सकता है
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पश्चिम एशिया में तनाव जल्दी कम नहीं हुआ तो LPG सप्लाई पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि सरकार नए स्रोत खोजने और घरेलू उत्पादन बढ़ाने की कोशिश कर रही है।
फिलहाल स्थिति पूरी तरह संकट वाली नहीं मानी जा रही, लेकिन अगर वैश्विक तनाव बढ़ा तो LPG gas shortage in India की स्थिति गंभीर हो सकती है। इसलिए भविष्य में गैस स्टोरेज क्षमता बढ़ाना और सप्लाई चेन को विविध बनाना बेहद जरूरी माना जा रहा है।






