JNU Clash: दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में छात्र राजनीति एक बार फिर हिंसा की चपेट में आ गई। 18 अक्टूबर को लेफ्ट समर्थक छात्रों और दिल्ली पुलिस के बीच झड़प हो गई। यह झड़प उस समय हुई जब छात्र पिछले हफ्ते हुए विवाद को लेकर पुलिस स्टेशन तक मार्च निकाल रहे थे।
मामला दरअसल पिछले हफ्ते हुए जनरल बॉडी मीटिंग (GBM) से जुड़ा है। इस बैठक के दौरान लेफ्ट संगठनों और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के समर्थक छात्रों के बीच विवाद हुआ था, जो हिंसक झड़प में बदल गया था। दोनों गुटों के कई छात्रों को चोटें भी आई थीं।
GBM के बाद दोनों पक्षों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी —
एक तरफ JNU Students’ Union के अध्यक्ष नीतीश कुमार (लेफ्ट गठबंधन से) ने आरोप लगाया था कि ABVP लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव नहीं होने देना चाहती और कैंपस में हिंसा फैला रही है।
वहीं ABVP के छात्रों ने पलटवार करते हुए कहा था कि लेफ्ट समर्थक छात्र क्षेत्रवाद और जातिवाद के मुद्दे उठा रहे हैं ताकि चुनाव को प्रभावित किया जा सके।
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झड़प कैसे शुरू हुई
लेफ्ट समर्थक छात्रों का आरोप है कि पिछले हफ्ते की हिंसा में शामिल ABVP छात्रों पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसी को लेकर उन्होंने 18 अक्टूबर को वसंत कुंज पुलिस स्टेशन तक मार्च निकालने की घोषणा की थी। छात्रों की मांग थी कि पुलिस उन छात्रों पर FIR दर्ज करे जो GBM में हिंसा में शामिल थे।
मार्च के दौरान स्थिति अचानक बिगड़ गई। लेफ्ट समर्थक छात्रों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हुई, जिसके बाद झड़प हो गई। कई छात्रों को चोटें आईं और पुलिस ने कुछ को हिरासत में भी लिया।
एक छात्र ने बताया —
“जब हम शांति से वसंत कुंज पुलिस स्टेशन की ओर मार्च कर रहे थे, तभी पुलिस ने हम पर लाठीचार्ज किया। हम सिर्फ FIR दर्ज करवाना चाहते थे। यह दलित छात्रों और हमारे यूनियन के प्रतिनिधियों के खिलाफ हुई हिंसा के खिलाफ था।”
छात्रों का कहना है कि पुलिस ने ABVP छात्रों का पक्ष लिया और शिकायत के बावजूद FIR दर्ज नहीं की।

प्रशासन की प्रतिक्रिया
विश्वविद्यालय प्रशासन ने बयान जारी करते हुए कहा है कि घटना की जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, छह छात्रों पर FIR दर्ज की गई है। इनमें JNUSU के अध्यक्ष नीतीश कुमार, मुंततिया फातिमा, मणिकांत पटेल, बिक्री बित्रीकर, और शौर्य मजूमदार शामिल हैं।
हालांकि, पुलिस ने कहा कि इन पर दर्ज FIR 18 अक्टूबर की झड़प से जुड़ी है, न कि पिछले हफ्ते हुई GBM हिंसा से।
ताजा स्थिति
हिरासत में लिए गए छात्रों को 19 अक्टूबर की सुबह रिहा कर दिया गया, लेकिन JNU कैंपस में माहौल अब भी तनावपूर्ण है। कई घायल छात्रों का इलाज एम्स और सफदरजंग अस्पताल में चल रहा है।
छात्र संगठनों का कहना है कि अगर जल्द ही प्रशासन और पुलिस ने कार्रवाई नहीं की, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
चुनावी पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि JNU में अगले महीने छात्र संघ चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में हिंसा और FIR के बाद कैंपस का माहौल गर्मा गया है। लेफ्ट और ABVP दोनों ही गुट एक-दूसरे पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बाधित करने का आरोप लगा रहे हैं।
दिवाली से पहले हुई इस झड़प ने विश्वविद्यालय में सियासी तापमान बढ़ा दिया है। प्रशासन स्थिति पर नज़र रखे हुए है, जबकि छात्र संगठनों ने कहा है कि “लड़ाई न्याय और लोकतंत्र की बहाली के लिए जारी रहेगी।”






