ईरान में बढ़ता तनाव और खुली चेतावनी
ईरान में जारी सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बीच हालात तेजी से और ज्यादा तनावपूर्ण होते जा रहे हैं। अब यह मामला सिर्फ अंदरूनी विरोध तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी टकराव की स्थिति बनती दिख रही है। ईरान ने अमेरिका और इजराइल को साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि अगर उस पर कोई सैन्य हमला हुआ तो जवाबी कार्रवाई में इजराइल और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया जाएगा।
11 जनवरी को राजधानी तेहरान में ईरानी संसद को संबोधित करते हुए संसद स्पीकर Mohammad Bagher Ghalibaf ने यह बयान दिया। उन्होंने कहा कि अगर ईरान पर हमला किया गया तो कब्जे वाले इलाके यानी इजराइल, अमेरिकी सैन्य अड्डे और युद्धपोत ईरान के वैध टारगेट होंगे। गालिबाफ इससे पहले ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड से जुड़े रह चुके हैं, इसलिए उनके बयान को सिर्फ राजनीतिक नहीं बल्कि सैन्य संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है।

अमेरिका और ट्रंप की भूमिका क्यों अहम
इस पूरे Iran US Israel Tension में अमेरिका की भूमिका सबसे अहम मानी जा रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump लगातार ईरान को लेकर सख्त बयान दे रहे हैं। उनका कहना है कि अगर ईरानी सरकार प्रदर्शन कर रहे लोगों पर हिंसा करती है या ज्यादा लोगों की जान जाती है तो अमेरिका चुप नहीं बैठेगा। ट्रंप यह भी कह चुके हैं कि अमेरिका जरूरत पड़ी तो प्रदर्शनकारियों की मदद करेगा।
हालांकि अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स यह भी बताती हैं कि खुद अमेरिका के अंदर इस मुद्दे पर एक राय नहीं है। कुछ ईरानी एक्टिविस्ट और विपक्षी समूह चाहते हैं कि अमेरिका जल्दी कदम उठाए, जबकि कई विशेषज्ञों का मानना है कि खुला अमेरिकी दखल ईरानी सरकार को यह कहने का मौका दे देगा कि सारे प्रदर्शन विदेशी साजिश हैं।
ईरान में प्रदर्शन क्यों भड़के
ईरान में ये विरोध अचानक शुरू नहीं हुए। पिछले कई महीनों से देश की आर्थिक हालत बेहद खराब चल रही थी। ईरानी करेंसी डॉलर के मुकाबले बुरी तरह गिर चुकी है। आम लोगों की कमाई की कीमत लगभग खत्म हो गई है। खाने-पीने का सामान, दवाइयां और रोजमर्रा की चीजें लगातार महंगी होती गईं।
इसी बीच सरकार की तरफ से टैक्स बढ़ाने का प्रस्ताव सामने आया। इसके बाद 28 दिसंबर 2025 को सबसे पहले व्यापारियों ने दुकानें बंद कर विरोध शुरू किया। धीरे-धीरे यह प्रदर्शन आम जनता तक फैल गया। अहवाज, हमदान, मशहद और केश जैसे शहरों में लोग सड़कों पर उतर आए।
महंगाई से सत्ता विरोध तक
शुरुआत में प्रदर्शन सिर्फ महंगाई और बेरोजगारी तक सीमित थे, लेकिन जल्द ही नारे सरकार के खिलाफ होने लगे। महिलाओं ने निजी आजादी और सत्ता परिवर्तन की मांग उठाई। कई जगहों पर ईरान के आखिरी शाह के बेटे Reza Pahlavi के समर्थन में भी नारे सुनाई दिए।

ईरानी सरकार का आरोप है कि इन प्रदर्शनों के पीछे अमेरिका और इजराइल का हाथ है। लेकिन प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे अपनी बुनियादी परेशानियों से तंग आ चुके हैं और अब पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
हिंसा, मौतें और गिरफ्तारियां
इन प्रदर्शनों के दौरान हालात कई जगहों पर हिंसक हो गए। मानवाधिकार संगठनों के मुताबिक अब तक सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है। अमेरिका स्थित मानवाधिकार संगठन HRAA का दावा है कि करीब 490 प्रदर्शनकारियों और 48 सुरक्षाकर्मियों की मौत की पुष्टि हुई है। वहीं दो हफ्तों के भीतर 10,000 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
इजराइल और क्षेत्रीय असर
तनाव तब और बढ़ गया जब अमेरिका ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति Nicolás Maduro के खिलाफ सख्त कार्रवाई की। इसके बाद इजराइल के नेता Yair Lapid ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि वेनेजुएला में जो हुआ, उससे सबक लेना चाहिए।
ईरान के सुप्रीम लीडर Ali Khamenei के वरिष्ठ सलाहकार अली लारिजानी ने भी कहा है कि अगर अमेरिका ने ईरान के अंदरूनी मामलों में दखल दिया तो पूरा क्षेत्र और ज्यादा अस्थिर हो जाएगा।
आगे क्या हो सकता है
न्यूयॉर्क टाइम्स और वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रंप के सामने ईरान को लेकर कई विकल्प रखे गए हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस रणनीति सामने नहीं आई है। कतर जैसे अमेरिका के करीबी सहयोगी देश भी संयम बरतने की अपील कर रहे हैं। अब ईरान की सख्त चेतावनी के बाद हालात किस दिशा में जाएंगे, यह आने वाले दिनों में साफ होगा।






