Indore Contaminated Water Deaths: इंदौर में दूषित पानी से फैली बीमारी
देश के सबसे साफ शहर कहे जाने वाले Indore से एक गंभीर मामला सामने आया है। इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से तीन लोगों की मौत हो गई है, जबकि 150 से ज्यादा लोगों की हालत गंभीर बताई जा रही है। स्थानीय लोगों और कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मौत का आंकड़ा आठ तक पहुंच चुका है। इस घटना के बाद Indore Contaminated Water Deaths को लेकर प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पर सवाल उठने लगे हैं।
ये भी पढ़े: IndiGo GST Penalty: इंडिगो एयरलाइंस पर 458 करोड़ से ज्यादा का जुर्माना, कंपनी ने आदेश को बताया गलत

10–15 दिनों से आ रहा था कड़वा और पीला पानी
स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले 10 से 15 दिनों से इलाके में पीने का पानी कड़वा और पीले रंग का आ रहा था। लोगों को ऐसा लग रहा था जैसे पानी में ब्लीचिंग पाउडर मिला हुआ हो। मजबूरी में लोग उसी पानी को भरकर रखते थे, उसे थिरा होने देते थे और फिर पीते थे। कई लोगों ने बताया कि पानी पीने के बाद उल्टी, दस्त और जी घबराने जैसी शिकायतें शुरू हो गई थीं।
डायरिया से तीन मौतों की पुष्टि
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक मृतकों में नंदलाल, उर्मिला और तारा कोरी शामिल हैं। तीनों की मौत की वजह डायरिया बताई गई है। डॉक्टरों का कहना है कि दूषित पानी के कारण यह स्थिति बनी। Indore water crisis के इस मामले में 24 दिसंबर से लोगों की तबीयत बिगड़नी शुरू हुई थी। एक ही दिन में करीब 35 मरीज अस्पताल में भर्ती कराए गए थे। इसके बाद धीरे-धीरे मरीजों की संख्या 150 से ज्यादा हो गई।
मेन पाइपलाइन में लीकेज की आशंका
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार भागीरथपुरा इलाके में चौकी से लगे शौचालय के नीचे मेन पाइपलाइन में लीकेज पाया गया है। आशंका जताई जा रही है कि इसी जगह से गंदा पानी पीने की पानी की सप्लाई लाइन में मिल गया। इसी contaminated drinking water को पीने से लोग बीमार पड़ते चले गए। हालांकि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग फिलहाल इन मौतों को दूसरी बीमारियों से जोड़कर देख रहे हैं।

परिवारों का आरोप: शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
बीमार और मृतकों के परिजनों का कहना है कि उन्होंने कई बार प्रशासन से शिकायत की थी, लेकिन हर बार सिर्फ “करवा देंगे” कहकर बात टाल दी गई। लोगों का आरोप है कि अगर समय रहते पानी की जांच और सप्लाई सुधारी जाती तो Indore Contaminated Water Deaths जैसी स्थिति नहीं बनती।
स्वास्थ्य विभाग की जांच और सैंपल टेस्ट
Chief Medical and Health Officer ने बताया कि निजी अस्पतालों से उल्टी-दस्त के ज्यादा मरीज आने की सूचना मिली थी। इसके बाद एपिडेमोलॉजिस्ट और जिला महामारी नियंत्रण अधिकारी को मौके पर भेजा गया। प्रभावित घरों से पानी के सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे गए हैं। अधिकारियों के मुताबिक 48 घंटे में पानी की कल्चर रिपोर्ट आ जाएगी, जिसके बाद असली कारण साफ हो सकेगा।
नेताओं का दौरा और प्रशासनिक कार्रवाई
इलाके का दौरा करने पहुंचे Kailash Vijayvargiya ने पानी उबालकर पीने और क्लोरीन टैबलेट इस्तेमाल करने की सलाह दी। मेयर Pushyamitra Bhargava ने पूरे मामले की जांच के आदेश दिए हैं।
मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने मृतकों को श्रद्धांजलि देते हुए 2 लाख रुपये की सहायता देने का ऐलान किया है। उन्होंने यह भी कहा कि मरीजों के इलाज का पूरा खर्च सरकार उठाएगी। मामले में लापरवाही को देखते हुए जोनल अधिकारी और इंजीनियरों को सस्पेंड किया गया है। साथ ही तीन सदस्यीय जांच समिति बनाई गई है, जो पूरे मामले की जांच करेगी।






