भारत-अमेरिका व्यापारिक रिश्तों में एक बड़ा मोड़ सामने आया है। 3 फरवरी की रात करीब 10:30 बजे अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक पोस्ट के ज़रिए ऐलान किया कि भारत और अमेरिका के बीच India US Trade Deal फाइनल हो गई है। इस पोस्ट के बाद भारतीय राजनीति, अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में हलचल तेज़ हो गई।
डोनाल्ड ट्रंप के मुताबिक, भारत पर लगाया गया रेसिप्रोकल टैरिफ अब घटाकर 18% किया जाएगा। इससे पहले भारत पर कुल मिलाकर 50% तक का टैरिफ लग रहा था, जिसमें 25% सामान्य और 25% अतिरिक्त (प्यूनिटिव) टैरिफ शामिल था। हालांकि, असली सवाल यही है कि क्या यह टैरिफ सीधे 50% से घटकर 18% हो जाएगा या फिर फिलहाल यह 43% (25% + 18%) पर आकर रुकेगा। यहीं से इस पूरे India US Trade Deal को लेकर भ्रम और बहस शुरू होती है।

ट्रंप का दावा और मोदी का जवाब
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पोस्ट में कहा कि उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi से फोन पर बात की। इस बातचीत में रूस-यूक्रेन युद्ध, ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। ट्रंप के अनुसार, पीएम मोदी ने रूस से तेल खरीद कम करने और अमेरिका से ज़्यादा ऊर्जा उत्पाद खरीदने पर सहमति जताई है।
ट्रंप ने यह भी दावा किया कि भारत अमेरिका से 500 अरब डॉलर से अधिक की ऊर्जा, तकनीक, कृषि, कोयला और अन्य उत्पाद खरीदेगा। इसके बदले में अमेरिका भारत पर लगाए गए टैरिफ को घटाकर 18% करेगा और भारत भी अमेरिकी उत्पादों पर अपने टैरिफ व नॉन-टैरिफ बैरियर्स कम करेगा।
वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से आए पोस्ट की भाषा अलग नज़र आती है। पीएम मोदी ने टैरिफ घटाए जाने का स्वागत किया और राष्ट्रपति ट्रंप को धन्यवाद दिया, लेकिन उन्होंने न तो “ट्रेड डील” शब्द का खुलकर इस्तेमाल किया और न ही रूस से तेल खरीद बंद करने जैसे किसी वादे की पुष्टि की। यही अंतर इस पूरे घटनाक्रम को और संवेदनशील बनाता है।
टैरिफ का गणित: 18%, 25% या 43%?
फिलहाल जो स्थिति साफ दिखाई देती है, वह यह है कि अमेरिका ने भारत पर लगाए गए सामान्य 25% टैरिफ को घटाकर 18% कर दिया है। यानी इसमें 7% की राहत मिली है।
लेकिन जो 25% अतिरिक्त प्यूनिटिव टैरिफ रूस से तेल खरीद को लेकर लगाया गया था, उस पर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। अगर वह टैरिफ हटता है, तो भारत के लिए कुल टैरिफ 18% रह जाएगा। अगर नहीं हटता, तो यह अभी भी 43% रहेगा।

यानी India US Trade Deal का सबसे अहम पहलू अभी भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
रूस, तेल और भारत की विदेश नीति
डोनाल्ड ट्रंप के बयान का सबसे विवादित हिस्सा रूस से तेल खरीद को लेकर है। भारत ने अब तक आधिकारिक तौर पर यह नहीं कहा है कि वह रूस से तेल खरीद बंद करेगा। रूस भारत का लंबे समय से रणनीतिक साझेदार रहा है, खासकर रक्षा और ऊर्जा के क्षेत्र में।
भारत की विदेश नीति अब तक संतुलन पर आधारित रही है—ना रूस के खिलाफ खुला रुख, ना अमेरिका से टकराव। ऐसे में ट्रंप का यह दावा कि भारत रूस से तेल खरीद बंद करेगा, भारत की संप्रभु विदेश नीति पर सवाल खड़े करता है। संसद से लेकर मीडिया तक, इसी बिंदु पर सबसे ज़्यादा बहस हो रही है।
यूरोपीय यूनियन डील का दबाव
इस पूरे घटनाक्रम को समझने के लिए यूरोपीय यूनियन (EU) के साथ भारत की हालिया फ्री ट्रेड डील को भी देखना ज़रूरी है। भारत-EU ट्रेड एग्रीमेंट को “मदर ऑफ ऑल डील्स” कहा जा रहा है। इस डील के बाद अमेरिका पर भी दबाव बढ़ा कि अगर वह भारत के साथ समझौता नहीं करता, तो अमेरिकी कंपनियां भारतीय बाज़ार में पिछड़ सकती हैं।
कई विश्लेषकों का मानना है कि इसी दबाव में अमेरिका ने भारत के साथ India US Trade Deal को आगे बढ़ाया।
डेयरी और एग्रीकल्चर: सबसे संवेदनशील मुद्दे
भारत-अमेरिका ट्रेड बातचीत में डेयरी और एग्रीकल्चर सेक्टर सबसे संवेदनशील रहे हैं। भारत दुनिया का सबसे बड़ा डेयरी उत्पादक है और यह सेक्टर धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक रूप से बेहद अहम है।
अमेरिका लंबे समय से चाहता रहा है कि उसे भारतीय डेयरी और कृषि बाज़ार में ज़्यादा पहुंच मिले। लेकिन भारत ने अब तक इस पर साफ रुख रखा है कि वह किसानों और पशुपालकों के हितों से समझौता नहीं करेगा।
ट्रंप के पोस्ट में कृषि उत्पादों की खरीद का ज़िक्र जरूर है, लेकिन यह साफ नहीं है कि यह सरकार-से-सरकार सौदा होगा या अमेरिकी कंपनियों को सीधे भारतीय बाज़ार में एंट्री मिलेगी।
आम आदमी को क्या फायदा?
अब सबसे बड़ा सवाल—इस India US Trade Deal से आम भारतीय को क्या फायदा होगा?
अगर टैरिफ कम होते हैं और व्यापार बढ़ता है, तो आईटी, फार्मा और एक्सपोर्ट सेक्टर को राहत मिल सकती है। इससे नौकरियों के मौके बढ़ सकते हैं और शेयर बाज़ार में भरोसा लौट सकता है।
हालांकि, अगर भारत को बदले में भारी मात्रा में अमेरिकी उत्पाद खरीदने पड़ते हैं, तो व्यापार घाटे और घरेलू उद्योगों पर असर भी पड़ सकता है।
फिलहाल बाजार की प्रतिक्रिया सकारात्मक दिख रही है—शेयर मार्केट में करीब 3% की तेजी इसी उम्मीद का संकेत है कि अमेरिका के साथ रिश्ते सुधरेंगे।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, India US Trade Deal एक अहम कूटनीतिक और आर्थिक घटनाक्रम है। यह संकेत देता है कि भारत-अमेरिका रिश्तों में जमी बर्फ पिघल रही है। लेकिन जब तक डील की पूरी डिटेल्स सामने नहीं आतीं—टैरिफ का पूरा गणित, तेल खरीद की शर्तें, कृषि और डेयरी सेक्टर पर असर—तब तक जश्न मनाना जल्दबाज़ी होगी। अभी इतना तय है कि बातचीत का रास्ता खुला है। यह भारत के लिए मौका भी है और चुनौती भी।





