IAS Nagarjun Gada Corruption Case: मध्य प्रदेश के आईएएस अधिकारी नागार्जुन गड़ा पर लगे भ्रष्टाचार और अवैध खनन से जुड़े गंभीर आरोपों को लेकर एक नया अपडेट सामने आया है। इस मामले में अब हरदा जिले के वर्तमान डीएम सिद्धार्थ जैन ने भी अपना बयान दिया है। दरअसल, नागार्जुन गड़ा पर आरोप है कि उन्होंने एक खनन कंपनी पर लगाए गए ₹51 करोड़ के जुर्माने को घटाकर सिर्फ ₹4000 कर दिया था।
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IAS Nagarjun Gada Corruption Case: क्या कहा हरदा के डीएम सिद्धार्थ जैन ने
डीएम सिद्धार्थ जैन ने स्पष्ट किया कि 51 करोड़ की राशि “जुर्माना” नहीं थी, बल्कि यह एक एक्सप्लेनेशन नोटिस था। उन्होंने कहा,
“माइनिंग में जब किसी को नोटिस दिया जाता है, तो वह असल में एक एक्सप्लेनेशन कॉल होता है। इस केस में भी ₹51 करोड़ की राशि एक अनुमानित वैल्यू थी, न कि फाइनल पेनल्टी। संबंधित पार्टी से जवाब मांगा गया था और फिर एडिशनल डीएम ने ड्यू प्रोसेस ऑफ लॉ फॉलो करते हुए आदेश पारित किया। वह ऑर्डर पब्लिक डोमेन में उपलब्ध है। अगर किसी को आपत्ति है, तो वह अपील कर सकता है।”
डीएम का यह बयान सामने आने के बाद अब यह बहस और तेज हो गई है कि आखिर 51 करोड़ की रकम 4000 तक कैसे पहुंच गई।
आरटीआई एक्टिविस्ट ने उठाए सवाल
इस पूरे मामले को आरटीआई एक्टिविस्ट आनंद जाट ने उजागर किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि अफसरों ने ₹1 करोड़ की रिश्वत लेकर इस मामले को दबा दिया।
आनंद जाट का कहना है,
“राज्य सरकार को जहां करोड़ों रुपये का राजस्व मिल सकता था, वहां अधिकारियों ने निजी लाभ के लिए सिर्फ ₹4000 में मामला निपटा दिया। मैंने दस्तावेजों की जांच की और पाया कि इसमें गड़बड़ी साफ दिख रही है।”
उनके मुताबिक, कंपनी पाथ इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को अवैध खनन का दोषी पाया गया था, क्योंकि उसने इंदौर-बैतूल नेशनल हाईवे प्रोजेक्ट के दौरान लगभग 3 लाख घन मीटर मौरंग (लाल मिट्टी) बिना अनुमति निकाली थी। प्रशासन ने पहले ₹52 करोड़ का नोटिस जारी किया था — जिसमें आधी राशि अवैध खनन और आधी पर्यावरण को नुकसान के लिए लगाई गई थी।

कैसे बदला मामला
इस मामले की शुरुआत में एडीएम प्रवीण फूल पगारे ने ₹52 करोड़ का नोटिस जारी किया था, लेकिन बाद में उनका ट्रांसफर हो गया।
इसके बाद डॉ. नागार्जुन गड़ा ने एडीएम का पद संभाला। उन्होंने मामले की दोबारा समीक्षा करते हुए कहा कि पर्याप्त दस्तावेज नहीं मिले हैं, और कंपनी द्वारा केवल 2688 घन मीटर खुदाई की बात मानी गई।
इसी आधार पर जुर्माना घटाकर ₹432 तक तय किया गया।
आईएएस नागार्जुन गड़ा की सफाई
आईएएस नागार्जुन गड़ा ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया है। उनका कहना है कि उन्होंने पूरा निर्णय कानूनी प्रक्रिया के तहत लिया और इससे जुड़ी सभी जानकारी पहले से ही पब्लिक डोमेन में उपलब्ध है।
गड़ा कर्नाटक के रहने वाले हैं और डॉक्टर से आईएएस अधिकारी बने हैं। उनकी कार्यशैली और यात्राएं सोशल मीडिया पर अक्सर चर्चा में रहती हैं।
सोशल मीडिया पर उठे सवाल
सोशल मीडिया पर इस मामले को लेकर लोगों ने जमकर प्रतिक्रियाएं दी हैं। कई लोगों का कहना है कि ₹51 करोड़ की राशि को ₹4000 में घटाना किसी बड़ी मिलीभगत या दबाव के बिना संभव नहीं है।
फिलहाल, इस मामले में कोई आधिकारिक जांच रिपोर्ट सामने नहीं आई है। लेकिन जैसे-जैसे दस्तावेज और बयान पब्लिक हो रहे हैं, वैसे-वैसे इस केस ने मध्य प्रदेश की प्रशासनिक साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आगे इस प्रकरण में क्या कार्रवाई होती है, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं।






